अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गाजा पीस बोर्ड की लॉन्चिंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायली दौरा करने की तैयारी कर रहे हैं. इजरायल की ओर से कहा गया है कि अगले महीने पीएम मोदी इजरायल का दौरा करेंगे.
पीएम मोदी का इजरायल दौरा रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि ये दौरा ऐसे वक्त में होगा, जब मिडिल ईस्ट में तनाव है और गाजा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पीस बोर्ड पर आतुर हैं. इस बोर्ड के सदस्य बनने के लिए पीएम मोदी को भी न्योता मिला है. लेकिन भारत की चुप्पी अमेरिका को परेशान कर रही है.
हालांकि भारत की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तकरीबन एक महीने पहले जब इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी से फोन पर बात की थी, तो उस वक्त नेतन्याहू ने इजरायल आने का न्योता दिया था. पिछली बार साल 2017 में पीएम मोदी ने इजरायल का दौरा किया था.
अगले महीने मित्र नेतन्याहू से मिल सकते हैं पीएम मोदी
भारत और इजरायल दोनों एक दूसरे के अच्छे मित्र देश हैं साथ ही दोनों के बीच रणनीतिक और सैन्य साझेदारी है. पीएम मोदी और पीएम नेतन्याहू के बीच गहरी मित्रता हैं. दोनों एकदूसरे को अहमियत देते हैं. दोनों की गहरी दोस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिनों पहले जब पीएम मोदी ने नेतन्याहू को कॉल किया तो उन्होंने अपनी बेहद अहम सुरक्षा कैबिनेट बैठक छोड़कर पीएम मोदी का कॉल रिसीव किया था.
वैश्विक तनाव और मिडिल ईस्ट में चल रही तनातनी के बीच पीएम मोदी इजरायल पहुंच सकते हैं. ये दौरा इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा के लिए एक पीस बोर्ड बनाया है, जिसके लिए पीएम मोदी को न्योता भेजा गया है. लेकिन भारत ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है. यहां तक कि साइनिंग प्रोग्राम से भी भारत ने दूरी बना ली.
गाजा पीस बोर्ड का सदस्य बना इजरायल, लेकिन खुश नहीं
इजरायल ने ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड का सदस्य बनने के लिए हामी भर दी है. लेकिन इस बोर्ड में तुर्किए और कतर के शामिल होने से नेतन्याहू नाराज हैं. इजरायल का मानना है कि तुर्किए हमेशा से हमास का हमदर्द रहा है और इजरायल का विरोधी. ऐसे में बोर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो जाते है.
चूंकि अमेरिका और इजरायल के बीच अच्छी पार्टनरशिप है क्योंकि दोनों देशों का दुश्मन एक ईरान हैं. पिछले साल जून में दोनों देशों ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक्शन लिया था. अमेरिका, हमेशा इजरायल के साथ खड़ा रहा है. इसलिए बोर्ड के सदस्यों को लेकर नाखुश होने के बावजूद भी इजरायल सदस्य बनने के लिए तैयार हो गया है.
वहीं नई दिल्ली, गाजा शांति प्रक्रिया को लेकर गंभीर और लगातार बातचीत कर रहा है, लेकिन बोर्ड के सदस्य की भूमिका के लिए सावधानी से आकलन कर रहा है. अमेरिका को कोई जवाब नहीं दिया गया है. वहीं फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत टू स्टेट का समर्थक रहा है. भारत फिलस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देता है. लेकिन भारत के इस रुख से इजरायल के साथ संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा है.
इजरायल के हर एक्शन पर मिला भारत का साथ, आतंकवाद के खिलाफ दोनों देश हैं साथ
7 अक्टूबर 2023 को जब हमास के आतंकियों ने इजरायल में बड़ा आतंकी हमला किया, जिसमें 1200 से ज्यादा लोगों को आतंकियों ने मार डाला था, तो भारत वो पहला देश था, जिसने आतंकवाद के खात्मे के लिए इजरायल का साथ दिया था. हमास पर लिए गए एक्शन पर भारत का साथ मिला था. यहां तक कि ऐसी खबरें भी आईं थी कि जब इजरायली सेना के पास गोला बारूद की कमी पड़ी तो भारत की मदद से उसे पूरा किया गया था. ठीक इसी तरह से करगिल युद्ध के दौरान भारत की मदद के लिए इजरायल सामने आया था.
जनवरी 2026 की शुरुआती सप्ताह में पीएम मोदी और नेतन्याहू ने फोन पर बात की थी और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का फैसला लिया था.
हमास आतंकी कर रहे लश्कर आतंकियों की मदद, इजरायल-भारत ने मिलकर कमर कसी
पिछले साल जब 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ. पाकिस्तान से आए आतंकियो ने 26 लोगों को बैरसण घाटी में बेरहमी से धर्म पूछ-पूछकर कत्ल किया था. इस घटना से पहले हमास के खूंखार कमांडर्स पाकिस्तान में लश्कर के कैंप में देखे गए थे. ऐसी रिपोर्ट्स आईं थीं कि पाकिस्तान के आतंकियों को हमास आतंकियों ने ट्रेनिंग दी थी ताकि वो भारत में ठीक वैसा ही हमला कर सकें, जैसे की 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में किया गया था.
इस साल जनवरी में भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें हमास का आतंकी कमांडर नजी जहीर गुजरांवाला लश्कर आतंकियों के साथ देखा गया. नजीर जहीर हमास का वही आतंकी है जिसने पहलगाम हमले से पहले पाकिस्तान में एक भारत विरोधी रैली में हिस्सा लिया था. उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) का दौरा किया था और लश्कर-जैश के आतंकियों के साथ मिलकर भारत विरोधी स्पीच दी थी.
ऑपरेशन सिंदूर में इजरायली ड्रोन ने दिखाया कमाल
ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन आर्म्ड फोर्सेस ने इजरायली ड्रोन हेरोन एमके 2 का इस्तेमाल किया था. भारत ने इजरायल से लिए हारोप और हारपी ड्रोन का इस्तेमाल किया था. हारोप का इस्तेमाल आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया गया था. जबकि एंटी-रेडिएशन हारपी ड्रोन का इस्तेमाल पाकिस्तान की रडार स्टेशन के खिलाफ किया गया था.
भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और पाक के गैर-कानूनी कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए हारोप लोएटरिंग म्युनिशन का इस्तेमाल किया था. ये कामकाजी ड्रोन थे, जिनमें बम लगे थे. ये दुश्मन के ठिकाने पर बम सहित फट गए थे.
7 मई की शाम को जब पाकिस्तान ने भारत के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन अटैक किए थे, तो उसका बदला लेने के लिए भारत ने अगले दिन यानी 8 मई की सुबह हारपी ड्रोन से पलटवार किया. इन हारपी ड्रोन का इस्तेमाल, लाहौर में पाकिस्तान के रडार स्टेशन को तबाह करने के लिए किया गया था.
9-10 मई की देर रात भी भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के जिन 11 एयरबेस को तबाह किया था, उनके लिए फ्रांस की स्कैल्प और स्वदेशी ब्रह्मोस के साथ, इजरायल की रैम्पेज मिसाइल का इस्तेमाल किया था. रैम्पेज एक लॉन्ग रेंज प्रेशसियन मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल आसमान से जमीन पर मार करने के लिए किया जाता है.
भारतीय सेना के बाद इंडियन नेवी भी इस ड्रोन को इमरजेंसी खरीद के तहत ले रही है.
रॉकेट भारत से खरीद रहा इजरायल, गुजरात की कंपनी भी तैयार कर रही 10 हजार ड्रोन
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ इजरायल के ड्रोन और हथियारों का इस्तेमाल किया तो अब इजरायल ने दिया है भारत को हथियारों का ऑर्डर. इजरायल ने भारत की प्राइवेट कंपनी एनआईबीई लिमिटेड (पुणे) से यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर का ऑर्डर दिया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल किया था. इजरायल यही रॉकेट लेकर अपने दुश्मनों पर इस्तेमाल करना चाहता है. भारतीय कंपनी को साथ इजरायल का ये सौदा, करीब 17.52 मिलियन डॉलर (करीब 150 करोड़) का है.
इसके अलावा हमास के खिलाफ जंग में भी जब इजरायल को बड़ी संख्या में ड्रोन की जरूरत पड़ी थी, तो पिछले साल गुजरात की एक कंपनी सामने आई थी. ये कंपनी, इजरायल के लिए करीब 10 हजार ड्रोन तैयार कर रही है.

