By Dinesh Rajput from Rewari
क्रिकेट के मैदान में चौके-छक्के लगाने वाला प्राणपुरा की ‘जान’ था कभी विकास यादव. पढ़ाई में अव्वल रहने वाला विकास, सीआरपीएफ में सीधे असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चुना गया था. लेकिन देश सेवा के ग्राउंड पर विकास कैसे अमेरिका के हाथों कैच-आउट हो गया, हरियाणा के रेवाडी जिले के प्राणपुरा गांव में किसी को यकीन नहीं हो रहा. लेकिन एक बात का यकीन उसके बचपन के दोस्तों को है कि उनका विकास कभी किसी देश-विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकता.
रेवाड़ी का प्राणपुरा गांव, जिला मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर की दूरी पर हैं. करीब 500 घर की आबादी वाला ये गांव देश ही नहीं, बल्कि विदेश तक सुर्खियों में आ गया है. क्योंकि अमेरिका की सबसे बड़ी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी एफबीआई ने अपने मोस्ट-वांटेड पोस्टर में इस गांव का नाम दर्ज किया है. क्योंकि पूर्व सीआरपीएफ अधिकारी और रॉ एजेंट विकास यादव का जन्म इसी छोटे से गांव में वर्ष 1984 में हुआ था. गांव में बचपन के साथी, विकास को एक अव्वल क्रिकेटर और स्कूल के टॉपर के तौर पर जानते हैं.
प्राणपुरा के लोगों की मानें तो गांव की आबादी तकरीबन 1800 के आसपास है. गांव से सेना ही नहीं, बल्कि पुलिस और सीआरपीएफ जैसे पैरा-मिलिट्री फोर्स में भी काफी लोग भर्ती हुए हैं. गांव के कुछ लोग अभी भी सेना में सेवाएं दे रही हैं. रिटायर्ड हुए जवानों को मिलाकर गांव में वर्दीधारियों की संख्या करीब 30 है.
अमेरिकी एजेंसी के दावे के मुताबिक, न्यूयॉर्क में रह रहे प्रतिबंधित आतंकी संगठन, सिख फॉर जस्टिस के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कोशिश की साजिश में विकास यादव शामिल था. मोस्ट वॉन्टेड पोस्टर जारी करते हुए विकास की तीन फोटो भी एफबीआई ने जारी की. इनमें एक फोटो में वह सेना की वर्दी में भी है, जिसके बाद पता चला कि विकास आर्मी में रह चुका है.
परिजनों के अनुसार विकास 2009 में सेना में भर्ती हुआ था. परिवार में मां और उनका बड़े भाई के अलावा उनकी भाभी ओर पत्नी है. दोनों ही भाईयों के एक-एक बेटियां हैं. विकास का गांव में बहुत कम आना जाना रहा है. उसका बचपन अपने पिता के साथ बाहर ही बीता. विकास के पिता, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) में कार्यरत थे. ऐसे में उसकी उच्च शिक्षा रेवाड़ी से बाहर ही संपन्न हुई.
विकास का छोटा भाई हरियाणा पुलिस में सेवारत है और इनदिनों गुरुग्राम में तैनात है. मीडिया में खबर आने से मां परेशान है और किसी से कैमरे पर बात नहीं करना चाहती. परिवार के एक अन्य सदस्य ने बताया, जब से विकास की मां तक ये जानकारी पहुंची हैं, वे खुद परेशान हैं. फिलहाल वह घर में ही हैं. घर में बड़े बेटे (विकास के भाई) का परिवार रहता है. जबकि विकास का परिवार कहां पर है और किस जगह रहता है, ये उन्हें भी मालूम नहीं हैं. (विकास यादव: Most-Wanted या देश का हीरो)
इसी साल अप्रैल में दिल्ली में दर्ज एक एफआईआर में कोर्ट से जमानत मिलने के बाद से विकास कहां, किसी को नहीं पता है. हालांकि, गिरफ्तारी से पहले विकास का परिवार दक्षिणी दिल्ली में एक सरकारी कॉलोनी में रहता था.
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव गाजी गोपालपुर प्राणपुरा में करीब 500 घर हैं और . FBI की तरफ से जारी पोस्टर में कहा गया है कि विकास यादव अमेरिका में भारतीय मूल के एक अमेरिकी वकील और राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या की साजिश रचने के आरोप में वॉन्टेड है.
गांव वालों की मानें तो विकास एक सच्चा भारतीय है. वो कोई आतंकवादी नहीं है जिसके लिए गांव वालों को किसी तरह की शर्म का सामना करना पड़े. देश के दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान ही विकास अपने साथी (एक अन्य भारतीय नागरिक) के साथ बातचीत के दौरान एफबीआई की नजरों में चढ़ गया था. बातचीत के दौरान विकास ‘अमानत’ उपनाम का इस्तेमाल करता था.
भारत ने विकास यादव को एक ‘रौग-एजेंट’ घोषित कर दिया है जो एक आईटी कंपनी के मालिक से उगाही और प्रताड़ित करने के आरोप में जेल की हवा खा चुका है. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आर एंड डब्लू) यानी रॉ ने विकास को वापस उसके पैरेंट कैडर सीआरपीएफ भेज दिया था. सीआरपीएफ ने विकास को सेवाओं से बर्खास्त कर दिया है. क्योंकि उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है. ऐसे में ये तय करना पाना मुश्किल है कि विकास, देश का दुश्मन है या हीरो. (विकास यादव Rogue Agent, दस्तावेज से खुलासा !)
[दिनेश राजपूत रेवाड़ी स्थित स्थानीय पत्रकार हैं. ये रिपोर्ट उन्होंने टीएफए के लिए तैयार की है.]