By Nalini Tewari
मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चिढ़े बैठे हैं, वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता तो दी है बधाई. पुतिन ने कहा है कि हम उम्मीद करते हैं कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता की तरह अच्छा काम करते रहेंगे.
रूसी राष्ट्रपति ने ऐसे वक्त में मोजतबा खामेनेई को बधाई दी है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्कंप ने मॉस्को को तेहरान को सैन्य मदद के लिए चेतावनी जारी की थी. लेकिन पुतिन ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार करते हुए ईरान के साथ प्रतिबद्धता जताई है. इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी साफ कहा कि रूस के साथ ईरान का सैन्य सहयोग पहले भी था और आगे भी जारी रहेगा.
अराघची के बयान और मोजतबा खामेनेई के साथ खड़े रहने का क्रेमलिन के बयान से साफ है कि रूस के सहारे ही ईरान, अमेरिका-इजरायल से भिड़ा हुआ है. रूस के साथ-साथ चीन भी ईरान को मदद कर रहा है.
माना जा रहा है कि जैसे-जैसे सैन्य संघर्ष के दिन बढ़ रहे हैं, युद्ध का दायरा भी बढ़ रहा है. खाड़ी देश तो इस युद्ध की चपेट में हैं कि अब रूस की मदद के ऐलान के बाद अमेरिका और रूस में यूक्रेन मोर्चे पर ठन सकती है.
मोजतबा खामेनेई के साथ खड़े रहेंगे: पुतिन
ईरान में भड़के युद्ध को रूसी राष्ट्रपति पुतिन बेहद करीबी से नजर रखे हुए हैं. पुतिन ने हाल ही में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से भी फोन पर बात की थी. और कहा था कि रूस हर स्थिति में ईरान के साथ खड़ा है. अब मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनते ही पुतिन वो पहले राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिन्होंने उन्हें बधाई दी है.
आपको बता दें कि मोजतबा, अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे हैं और उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुने गए हैं.
रूस और ईरान के बीच संबंध और अधिक मजबूत होंगे और दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देंगे. क्रेमलिन की ओर से जारी बयान में पुतिन ने कहा है, “मुझे पूरा भरोसा है कि आप अपने पिता के काम को सम्मान के साथ जारी रखेंगे और मुश्किल हालात में ईरानी लोगों को एकजुट करेंगे.”
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि, “मैं अपनी तरफ से तेहरान के लिए हमारे पक्के सपोर्ट और हमारे ईरानी दोस्तों के साथ हमारी एकता की पुष्टि करना चाहूंगा.”
पुतिन ने कहा,”इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के सुप्रीम लीडर एक्सेलेंसी अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा होसैनी खामेनेई… इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के सुप्रीम लीडर के तौर पर आपके चुनाव के मौके पर मेरी तरफ से बधाई स्वीकार करें.”
मोजतबा खामेनेई को बधाई देना, रूस के रुख को स्पष्ट कर रहा है कि अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज करते हुए पुतिन ईरान के साथ खड़े हैं.
रूस हमें सैन्य मदद पहले भी देता था, आगे भी देता रहेगा: अब्बास अराघची
28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर अटैक किया था, तो उस वक्त उन्हें लगा था कि अयातुल्ला खामेनेई और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत से ईरान टूट जाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया था कि अब कट्टरपंथी खामेनेई की मौत से ईरान से बातचीत आसान हो जाएगी. लेकिन ईरान ने वो कर दिखाया, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी.
ईरान ने खाड़ी देशों समेत 11 से ज्यादा देशों में हमला बोल दिया, जिससे कई अमेरिकी सैनिक तो मारे ही गए, इजरायल-अमेरिका के लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस सिस्टम और युद्धपोतों, ड्रोन्स को भी नुकसान पहुंचा है.
सवाल ये है कि ईरान ने ये सब किया कैसे. बताया जा रहा है कि ईरान ने ऐसे ऐसे हथियार बनाए जो दुनिया से अनजान थे. जिन्हें ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा ईरान के पीछे सबसे बड़ी ताकत है रूस और चीन की. ये दोनों देश शुरुआत में भले ही खुलकर सामने नहीं आए, लेकिन कहा जा रहा है कि रूस, ईरान को सैन्य मदद दे रहा है. जिसका खुलासा खुद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया है.
अराघची ने अपने ताजा बयान में कहा, “ईरान और रूस के बीच सैन्य सहयोग कोई नई बात नहीं है. यह पहले भी होता रहा है और भविष्य में भी जारी रहेगा. रूस के साथ हमारी बहुत अच्छी साझेदारी है. वे कई अलग-अलग दिशाओं में हमारी मदद कर रहे हैं.”
दरअसल अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि “रूस ने ईरान को मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों और संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए जानकारी मुहैया कराई है. इस जानकारी के बाद ट्रंप ने रूस को धमकाया था, कहा था कि अगर रूस ऐसा कर रहा है तो उन्हें बहुत नुकसान सहना पड़ेगा.”
ज्यादा दिन नहीं टिकेगा ईरान का नया सुप्रीम लीडर: ट्रंप
मोजतबा खामेनेई को ट्रंप ने धमकी दी है. ट्रंप ने कहा कि, वाशिंगटन की मंजूरी के बिना ईरान का अगला नेता ‘लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा. अगर उन्हें हमसे मंजूरी नहीं मिलती है, तो उनका कार्यकाल लंबा नहीं चलेगा. हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमें हर 10 साल में वापस न जाना पड़े, जब मेरे जैसा कोई राष्ट्रपति न हो जो ऐसा न करे. मैं नहीं चाहता कि लोगों को पांच साल बाद वापस जाकर वही गलती दोबारा करनी पड़े, या इससे भी बदतर, उन्हें परमाणु हथियार बनाने की इजाजत मिल जाए.

