By Nalini Tewari
ग्रीनलैंड और गाजा पीस बोर्ड के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देशों पर दबाव बनाने के लिए सड़कछाप हरकतें करते नजर आने लगे हैं. ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ प्राइवेट चैट तक रिलीज कर दी हैं.
सिर्फ इतना ही नहीं ग्रीनलैंड पर ट्रंप के खिलाफ सबसे ऊंची आवाज निकालने वाले मैक्रों को ट्रंप ने 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दे डाली है.
ये वही ट्रंप हैं, जिन्होंने हाल ही में मैक्रों की नकल उतारकर सबसे सामने मजाक उड़ाया था और नीचा दिखाने की कोशिश की थी.
मैक्रों ने भी ट्रंप के सामने नहीं झुकने का फैसला करते हुए वैश्विक मंच पर साफ-साफ कह दिया है कि फ्रांस जैसे को तैसा नीति लगाएगा. क्योंकि उन्हें गुंडों से ज्यादा सम्मान पसंद हैं.
मैक्रों ने क्या किया था मैसेज, ट्रंप ने किया लीक
ट्रंप ने फ्रेंच प्रेसिडेंट की प्राइवेट चैट लीक करके दुनिया में हड़कंप मचा दिया है. ट्रंप ने इमैनुएल मैक्रों की कूटनीतिक बातचीत को सार्वजनिक मंच पर लाकर ये दिखाने की कोशिश की है कि फ्रांस, कई देशों जैसे ग्रीनलैंड और ईरान के बारे में क्या सोचता है और क्या राय रखता है.
वायरल चैट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मैसेज करते हुए मैक्रों ने लिखा था कि, मेरे दोस्त, हम सीरिया पर पूरी तरह एक लाइन में हैं. हम ईरान पर बड़े काम कर सकते हैं. मुझे समझ नहीं आ रहा कि आप ग्रीनलैंड पर क्या कर रहे हैं. मैं दावोस के बाद गुरुवार दोपहर को पेरिस में जी 7 की मीटिंग रख सकता हूं. मैं यूक्रेनियन, डेनमार्क, सीरियाई और रूस को बातचीत के लिए बुला सकता हूं. आप यूएस वापस जाने से पहले गुरुवार को पेरिस में साथ में डिनर कर लो. इमैनुएल.
इन कारणों से मैक्रों के पीछे पड़े हैं ट्रंप
फ्रांस अमेरिका का एक मित्र देश हैं. दोनों शक्तिशाली देश हैं और सहयोगी भी. लेकिन ट्रंप और मैक्रों के बीच कुछ खास नहीं पटती. वजह ये है कि ट्रंप की हर बात को मैक्रों मानने के लिए तैयार नहीं होते और समय-समय पर अपना विरोध दर्ज करा देते हैं. यही कारण है कि ट्रंप किसी भी वक्त मैक्रों को नीचा दिखाने का मौका नहीं छोड़ते.
ग्रीनलैंड पर अमेरिका अपना कब्जा करना चाहता है. लेकिन यूरोप में मैक्रों एक ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. मैक्रों ने नाटो को एकजुट होकर ग्रीनलैंड की सुरक्षा करने को कहा. साथ ही फ्रेंच सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजकर ट्रंप से डायरेक्ट दुश्मनी मोल ले ली.
इन सबके बीच गाजा बोर्ड भी तनाव की वजह है. ट्रंप ने मैक्रों को बोर्ड सदस्य बनने का न्योता भेजा था. लेकिन मैक्रों ने बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने से मना कर दिया. फ्रांस को लगता है कि इस बोर्ड का काम सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं है. इसके अधिकार बहुत ज्यादा और अस्पष्ट हैं. यूएन चार्टर के अनुरूप नहीं हैं, इसी वजह से फ्रांस ने बोर्ड में शामिल होने से मना कर दिया है.
ट्रंप की नाराजगी की एक और बड़ी वजह फ्रांस का फिलिस्तीन को मान्यता देना भी है. साल 2025 सितंबर में फ्रांस ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता देने का फैसला किया और संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इसे औपचारिक रूप से घोषित भी कर दिया. जिसे ट्रंप की मिडिल ईस्ट नीति के खिलाफ माना गया.
मैक्रों ने बोर्ड में शामिल होने से मना किया तो ट्रंप बोले, जाने वाली है उनकी कुर्सी
ग्रीनलैंड विवाद और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हालिया विवाद ट्रंप और मैक्रों को एकदूसरे के खिलाफ ले आया है. बोर्ड सदस्य बनने से मना करने पर ट्रंप ने कहा कि “उन्हें मैक्रों को शामिल करने में कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि बहुत जल्द उनकी कुर्सी छिनने वाली है.”
ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि “अगर जरूरत पड़ी तो वे फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगा देंगे, फिर मैक्रों खुद बोर्ड में आने के लिए गिड़गिड़ाएंगे.”
मैक्रों ने किया ट्रंप पर पलटवार, बताया बुली
स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे सम्मेलन में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बिना नाम लिए बुली बताया है. ट्रंप के फ्रांसीसी शराब पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी पर जवाब देते हुए कहा, “फ्रांस धमकी नहीं, सम्मान में भरोसा करता है.”
“कुछ देश ऐसे व्यापार समझौते कर रहा है जो यूरोप के कारोबार को नुकसान पहुंचाते हैं, ज्यादा शर्तें थोपते हैं और यूरोप को कमजोर करने की कोशिश करते हैं. लगातार नए-नए टैक्स लगाए जा रहे हैं और यह बात बिल्कुल मंजूर नहीं की जा सकती, खासकर तब जब इन टैक्स का इस्तेमाल किसी देश की जमीन और संप्रभुता पर दबाव बनाने के लिए किया जाए.”
फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने बिना नाम लिए अमेरिका का मजाक उड़ाया
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट डालकर अमेरिका का मजाक बनाया है. फ्रेंच विदेश मंत्रालय ने मौजूदा स्थिति पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “अगर कभी आग लग सकती है, तो बेहतर है अभी घर जला दो. अगर कभी शार्क हमला कर सकती है, तो अभी लाइफगार्ड को खा लो. अगर कभी एक्सीडेंट हो सकता है, तो अभी गाड़ी ठोक दो.” फ्रांस के विदेश मंत्रालय के कहने का अर्थ था कि भविष्य के डर से अभी नुकसान करना पागलपन जैसा है.

