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तुलसी गबार्ड को महाकुंभ का जल भेंट, मोदी से की अमेरिकी संबंधों पर मुलाकात

भारत-अमेरिका समग्र वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया. दोनों देश आतंकवाद से लड़ने और समुद्री एवं साइबर सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

—-अमेरिकी डीएनआई तुलसी गबार्ड से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

रायसीना डायलॉग में शामिल होने के लिए भारत पहुंचीं अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है. इस दौरान पीएम मोदी और तुलसी के बीच रक्षा, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी, काउंटर टेररिज्म और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा हुई.

मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने तुलसी को महाकुंभ का जल भेंट स्वरूप भेंट किया तो यूएस इंटेलिजेंस चीफ ने प्रधानमंत्री को तुलसी की माला गिफ्ट की.. मोदी ने ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की पहली उच्च स्तरीय यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण बताया.

मोदी ने इस साल के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा को लेकर भी तुलसी से चर्चा की और बताया कि भारत की 140 करोड़ जनता उत्सुकता से इंतजार कर रही है.

राजनाथ सिंह ने तुलसी से व्यक्त की खालिस्तानी गतिवधियों पर चिंता

अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (डीएनआई) तुलसी गबार्ड ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की है. इस मुलाकात में सबसे अहम बातचीत खालिस्तानियों के मुद्दे पर हुई है, जो अमेरिका में रहकर भारत विरोधी साजिश में शामिल हैं. राजनाथ सिंह ने सिख फॉर जस्टिस यानी भारत के मोस्टवांटेड गुरपतवंत सिंह पन्नू के संगठन के खिलाफ चिंता व्यक्त की है. इस संगठन पर भारत प्रतिबंध लगा चुका है. सूत्रों के मुताबिक राजनाथ सिंह ने अमेरिका प्रशासन से पन्नू के संगठन एसएफजे पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.

राजनाथ सिंह और तुलसी गबार्ड में खालिस्तानियों के मुद्दे पर हुई अहम बात

रायसीना डायलॉग से पहले तुलसी गबार्ड ने एनएसए अजीत डोवल के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मीटिंग की है. इस दौरान भारत-अमेरिका के बीच रक्षा समझौतों को लेकर अहम बातचीत की गई है. सूत्रों के मुताबिक राजनाथ सिंह ने तुलसी गबार्ड के सामने प्रमुखता से भारत में बैन खालिस्तानी संगठन एसएफजे का मुद्दा उठाया है. इस संगठन का चीफ गुरपतवंत सिंह पन्नू आए दिन भारत के खिलाफ साजिश रचता है. हाल ही में गुरपतवंत सिंह पन्नू का एक वीडियो वायरल हुआ था, जो 20 जनवरी का बताया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया था कि वो डोनाल्ड ट्रंप के शपथग्रहण समारोह में पहुंचा था. राजनाथ सिंह ने तुलसी गबार्ड के सामने खालिस्तानी संगठन पर कड़े एक्शन की मांग की है. 

पन्नू को लेकर बाइडेन प्रशासन ने भारत पर लगाए थे गंभीर आरोप

ट्रंप प्रशासन से पहले बाइडेन प्रशासन ने भारत के मोस्टवांटेड खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में भारतीय एजेंसियों को कटघरे में खड़ा किया था. हद तो तब हो गई जब एनएसए अजीत डोवल के खिलाफ अमेरिका ने वारंट जारी कर दिया था. इस घटना के बाद भारत और अमेरिका के संबंध बेपटरी हो गए थे. हालांकि बाइडेन प्रशासन ने जाते-जाते भारत के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश की. अब राजनाथ सिंह के अलावा एनएसए डोवल ने भी तुलसी गबार्ड के सामने खालिस्तानियों का मुद्दा उठाया है.

खालिस्तानियों ने कैलिफोर्निया के मंदिर पर किया था हमला

9 मार्च को कैलिफोर्निया में एक हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने बीएपीएस के मंदिर पर हमला किया था और भारत विरोधी नारेबाजी की थी. हिंदुओं को धमकाते हुए अमेरिका छोड़ देने को कहा था. कैलिफोर्निया से 10 दिन पहले न्यूयॉर्क में भी मंदिर में अटैक किया गया था. इसके अलावा खालिस्तानी समर्थकों ने भारत के खिलाफ जनमत संग्रह का भी आयोजन किया है.

राजनाथ-गबार्ड में और किन-किन मुद्दों पर हुई बात?

रक्षा मंत्रालय ने राजनाथ और तुलसी की मुलाकात पर आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि दोनों देशों ने “सैन्य अभ्यास, रणनीतिक सहयोग, रक्षा औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण और विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में सूचना-साझाकरण सहयोग के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की.”

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, “दोनों नेताओं ने अत्याधुनिक रक्षा नवाचार और विशिष्ट प्रौद्योगिकियों में सहयोग के अवसरों का पता लगाया, जो उनके साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. इसके अलावा उन्होंने अंतर-संचालन को बढ़ाने और रक्षा औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण को बढ़ावा देने के प्रमुख क्षेत्रों पर भी चर्चा की.”

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