रूस-यूक्रेन में चल रही सीजफायर की बातचीत के बीच यूरोपीय देशों ने यूक्रेन की मदद के लिए अंतर्राष्ट्रीय शांति सेना बनाने की तैयारी शुरु कर दी है. ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने ताजा बयान में कहा है कि ब्रिटेन और फ्रांस के गठबंधन से एक ऐसी शांति सेना तैयार की जा रही है, जो यूक्रेन की मदद करेगी. इसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फिनलैंड जैसे देश शामिल होंगे.
नाटो की जगह इस शांति सेना की तैनाती की सुगबुगाहट के बीच रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने साफ कह दिया है कि “वह यूक्रेनी धरती पर नाटो देशों के किसी भी सैनिक को स्वीकार नहीं करेंगे.” सवाल ये है कि रूस-यूक्रेन के बीच मध्यस्थता कराने वाला अमेरिका, यूक्रेन की सिक्योरिटी के लिए इस शांति सेना को मान्यता देगा या नहीं. वहीं इटली ने “शांति सेना को भेजने का कदम युद्ध को और भड़काने वाला बताया है.”
यूक्रेन की रक्षा करेंगे शांति सैनिक, ब्रिटेन-फ्रांस का प्लान तैयार
रूस-यूक्रेन के बीच शांति सहमति को लेकर अमेरिका प्रयासरत है. अमेरिका दोनों ही देशों से संपर्क में है. खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन और वोलोडिमिर जेलेंस्की से बातचीत करते सहमति बनाने की कोशिश की है. लेकिन इन सबके बीच यूरोप के देश खासतौर पर ब्रिटेन और फ्रांस दोनों ने बाकी देशों से यूक्रेन की रक्षा के लिए शांति सेना बनाने का प्लान तैयार कर लिया है. ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा है कि “वो यूक्रेन में शांति सेना भेजने के लिए तैयार हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस और फिनलैंड सहित कई देशों का कहना है कि वो भी यूक्रेन की मदद में शामिल होने के लिए तैयार हैं.”
सैनिकों का आधिकारिक आंकड़ा नहीं जारी किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें शुरुआती तौर पर 10 हजार से 30 हजार तक सैनिक हो सकते हैं. इसमें कौन-कौन से देश के सैनिक शामिल हैं, ये नहीं बताया गया है.
ब्रिटेन में कमांडर्स की हाईलेवल बैठक
शांति सैनिकों की तैयारी और तैनाती को लेकर ब्रिटेन में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई है, जिसमें तकरीबन 20 देशों के सैन्य कमांडर्स हिस्सा ले रहे हैं. इस बैठक में यूक्रेन में भेजे जाने वाले सैनिकों को लेकर चर्चा प्रमुखता से होने वाली है. इस बैठक से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने पिछले सप्ताह एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की थी, जिसमें जेंलेंस्की, इटली की प्रधान मंत्री जियोर्जिया मेलोनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड के नेताओं और नाटो और यूरोपीय संघ के अधिकारियों सहित लगभग 30 नेता शामिल थे. इस मीटिंग में भी शांति सेना को लेकर चर्चा की गई थी. (https://x.com/Keir_Starmer/status/1902797916739424303)
शांति नहीं, युद्ध को और सुलगाएंगे शांति सैनिक- जॉर्जिया मेलोनी
इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने ब्रिटेन और फ्रांस के शांति सैनिक यूक्रेन भेजे जाने की आलोचना की है. मेलोनी ने कहा, “3 साल से यूक्रेन और रूस के बीच जंग जारी है. लाखों लोग युद्ध की वजह से मारे गए हैं. ऐसे में हमारा काम दोनों के बीच शांति स्थापित करना है ना कि आग को और सुलगाना है. मैक्रों और कीर स्टार्मर दोनों नेता शांति सैनिक भेजकर युद्ध को बढ़ावा दे रहे हैं. उनके इस फैसले से यूरोप और बर्बाद हो जाएगा. सैनिक भेजना प्रभावी रणनीति नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप जो कर रहे हैं वो सही है. इटली यूरोप के ट्रैप (जाल) में नहीं फंसने वाला है.”
किसी भी नाटो देश के सैनिकों को स्वीकार नहीं करेंगे: रूस
रूस ने साफ तौर पर कहा है कि “वो यूक्रेन की धरती पर नाटो के किसी भी सैनिक को बर्दाश्त नहीं करेंगे, चाहे वो किसी भी तरह के हों. रूस ने ये भी कह दिया है कि यूरोपीय देशों की ऐसी कोशिश (शांति सेना) युद्ध विराम की चल रही वार्ता को प्रभावित कर सकती है.”
अगले हफ्ते सऊदी अरब में फिर वार्ता
पुतिन और जेलेंस्की से ट्रंप की फोन कॉल के बाद, व्हाइट हाउस ने बताया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए अगले हफ्ते सऊदी अरब में फिर वार्ता होनी है. आखिरी वार्ता, 11 मार्च को अमेरिकी विदेश सचिव की यूक्रेन के विदेश सचिव के साथ हुई थी. (रशियन Salad नहीं बनना चाहता यूक्रेन, ट्रंप से की टेबल पर बैठने की गुजारिश)