युद्ध के दौरान किस तरह प्रोपेगेंडा के जरिए दूसरे देश की सेना को दुनिया में बदनाम करने की कोशिश की जाती है, उसके कुछ उदाहरण रूस-यूक्रेन जंग के दौरान सामने देखने को आए हैं. एक घटना में यूक्रेन ने खुद अपने पैरों में कुल्हाड़ी मार ली है. ड्रोन फैक्ट्री पर हुए हमले को एक रिहायशी इलाका बताना यूक्रेन को भारी पड़ गया.
रूस ने यूक्रेन के सुमी प्रांत में एक ड्रोन फैसिलिटी पर अटैक किया था. इस अटैक के बाद यूक्रेन ने तस्वीरें जारी कर कहा कि रूस ने एक शांतिपूर्ण सिविलियन फैसिलिटी पर हमला किया है. तस्वीर में एक यूक्रेनी पुलिसकर्मी भी दिखाई पड़ रहा है, जो हमले के बाद मौका का मुआयना कर रहा था. लेकिन जहां पुलिसकर्मी खड़ा था वहां बॉक्स रखे हुए थे, जिस पर वायरी कंपनी का लोगो (प्रतीक) लगा था. साफ था कि ये सभी डिब्बे वायरी कंपनी के थे. वायरी, यूक्रेन की ड्रोन बनाने वाली कंपनी है. ये कंपनी, यूक्रेनी सेना के लिए ड्रोन बनाती है.
पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरी, ऑयल टैंकर्स और दूसरे संवेदनशील ठिकानों पर ड्रोन से अटैक कर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नाक में दम कर रखा है. ऐसे में रूसी सेना ने यूक्रेन की ड्रोन बनाने वाली फैक्ट्री और लॉन्च पैड्स को निशाना बनाना शुरु कर दिया है. इसी कड़ी में वायरी कंपनी की फैसिलिटी पर हमला किया गया था.
यूक्रेन को तस्वीरें करनी पड़ी डिलीट
सोशल मीडिया पर वायरी फैसिलिटी की तस्वीरों सामने आने के बाद सवाल खड़े होने लगे कि ये कहां से सिविलियन ठिकाना है. गलती का एहसास होने पर यूक्रेन ने सोशल मीडिया से इन तस्वीरों को हटा दिया. लेकिन तब तक सच उजागर हो चुका था.
ये कोई पहला मामला नहीं है जब यूक्रेन का फेक नैरेटिव दुनिया का सामने आया है. हाल में जब यूक्रेन की राजधानी कीव में एक कामकाजी ड्रोन फैक्ट्री पर अटैक किया गया, तब उसे फिल्म स्टूडियो कहकर प्रोपेगेंडा चला गया था. लेकिन तस्वीरों में ड्रोन उपकरण साफ दिखाई दे रहे थे. उस वक्त भी यूक्रेन के लिए फुट इन माउथ जैसी स्थिति हो गई थी.
युद्ध शुरु होने के बाद से यूक्रेन ने सिविलियन ठिकानों की आड़ में की गोलाबारी
पिछले साढ़े चार सालों में यानी जब से युद्ध शुरु हुआ है, तब से कई बार ऐसा देखने में आया है कि यूक्रेन ने अपने सैन्य ठिकानों को रिहायशी इलाकों में, अस्पताल, थिएटर और स्कूल के आस-पास शिफ्ट कर दिया है. इन जगहों से मिसाइल या फिर आर्टलरी की फायरिंग की जाती है. रूस की सेना जब पलटवार कर इन जगहों को चिन्हित कर निशाना बनाती है, तब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और (यूक्रेनी) सेना , सिविलियन ठिकानों पर हुए हमले करार दे रूस को पूरी दुनिया में बदनाम करने की कोशिश करती है.
युद्ध के लिए जरूरी नैरेटिव, प्रोपेगेंडा और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर
युद्ध में नैरेटिव बेहद महत्वपूर्ण होता है. प्रोपेगेंडा के जरिए दुश्मन देश की सेना और सरकार का मनोबल गिराया जा सकता है. सोशल मीडिया के जरिए दुनियाभर में दुश्मन को कूटनीति के स्तर पर अलग-थलग कर किया जा सकता है. जंग के मैदान से निकली एक-एक जानकारी को ‘वेपनाइज्ड’ यानी हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन इंफॉर्मेशन वॉरफेयर का दांव कई बार उल्टा पड़ जाता है. जैसा, हाल के दिनों में यूक्रेन के साथ देखने को मिल रहा है.
सोशल मीडिया पर एक अन्य वीडियो सामने आया है जिसमें यूक्रेन के लिए विदेश से आए अनाज के एक ट्रक से हथियार निकल रहे हैं. हथियारों का जखीरा अनाज के बीच में छिपा हुआ है. ऐसे में अगर इस ट्रक पर हमला होता है, तब इस बात का प्रचार-प्रसार (प्रोपेगेंडा) किया जा सकता है कि दुश्मन (रूस) ने अनाज के ट्रक पर हमला कर दिया. रूस नहीं चाहता है कि यूक्रेन के आम नागरिकों को खाना नसीब हो पाए.


22 Comments