मिडिल ईस्ट जंग के पार्ट-2 को दस दिन पूरे हो चुके हैं और अमेरिका की ईरान पर जबरदस्त बमबारी जारी है. लेकिन बड़ा सवाल ये कि क्या ईरान के खिलाफ ग्राउंड अटैक करेगा अमेरिका. अगर जवाब हां है, तब कैसे होगा ग्राउंड अटैक. क्योंकि एक ऐसा मैप सामने आया है जिससे अमेरिका के ईरान पर बूट्स ऑन ग्राउंड का सीक्रेट प्लान आउट हो गया है.
पिछले दस दिनों में अमेरिका ने ईरान के पश्चिम, दक्षिण और मध्य क्षेत्रों में कोई सा ऐसा प्रांत नहीं छोड़ा है जहां ईरानी सेना या फिर आईआरजीसी के ठिकानों को तबाह नहीं किया है. बावजूद इसके, ईरान झुकने के लिए तैयार नहीं है.
दसवें दिन, अमेरिका ने बंदर अब्बास, जहां ईरानी नौसेना और आईआरजीसी-नेवी का हेडक्वार्टर है, वहां बमबारी की. इसके अलावा दो ऐसे प्रांतों में अमेरिकी बमबारी हुई, जहां पिछले पांच महीनों से नहीं हुई थी. ये दो प्रांत हैं—फार्स और यज्द. फार्स अगर दक्षिणी ईरान में है तो यज्द, मध्य ईरान का हिस्सा है.
सीक्रेट मैप में यूएस फोर्सेज करेंगी समुद्री तट से हमला
इस बीच, इजरायल के सोशल मीडिया में ईरान का एक ग्राफिक्स मैप वायरल हो रहा है. इस मैप में दिखाया गया है कि अमेरिका सेना किस तरह ईरान पर ग्राउंड अटैक की तैयारी कर रही है. मैप के अनुसार, ईरान के पश्चिम से लेकर दक्षिण तक फैले तटीय इलाकों पर अमेरिका सेना हमला करेगी. यहां पर ईरान के खर्ग आईलैंड से लेकर खुजेस्तान, बुशहर, बंदर अब्बास और होर्मु्ग्जन प्रांतों में अमेरिकी नौसेना जीसीसी यानी गल्फ कोपरेशन काउंसिल यानी खाड़ी देशों की सेनाओं के साथ हमला बोलेगी.
अमेरिकी नौसेना की मदद करेंगे खाड़ी देश
हैरानी की बात ये हैं कि इस मैप में खाड़ी देशों को भी ईरान पर जमीनी अटैक करने के लिए दिखाया गया है. मिडिल-ईस्ट जंग के दौरान अमेरिका पर पलटवार करने के लिए ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन, कतर, बहरीन, इराक और कुवैत जैसे खाड़ी के देशों पर हमले किए हैं.
ईरान का दावा है कि इन देशों पर सीधे हमले नहीं किए गए हैं. बल्कि इन देशों में जो अमेरिकी मिलिट्री बेस हैं, वहां हमला कर बदला लिया गया है. लेकिन ईरान के इन हमलों में खाड़ी देशों की रिफाइनरी, होटल और रिहायशी इलाके भी जद में आए हैं.
ईरान ने यूएई जैसे देशों के ऑयल टैंकर्स और कार्गो जहाजों को भी होर्मुज स्ट्रेट में निशाना बनाया है. ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना है कि ईरान पर होने वाले ग्राउंड अटैक में खाड़ी के ये देश, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम की मदद कर सकते हैं. हालांकि, इन देशों ने किसी भी तरह से ईरान जंग में कूदने का अभी तक कोई साफ-साफ संकेत नहीं दिया है. यूएई ने हालांकि, बदला लेने का इशारा जरूर किया है.
ट्रंप ने ग्राउंड अटैक के सवाल पर दिया था ये जवाब
कुछ दिन पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर ग्राउंड अटैक का सवाल पूछा गया था. ट्रंप ने ये कहकर सवाल टाल दिया था कि दूसरे लोग ग्राउंड अटैक करेंगे. ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि ये दूसरे लोग कौन हैं. क्या, ये दूसरे लोग, सऊदी,यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देश हैं जिनपर हमला कर ईरान ने नाक में दम कर रखा है.
सऊदी अरब-ईरान की है पुरानी अदावत
शनिवार को ईरान ने सऊदी अरब को भी अपना निशाना बनाया है. सऊदी और ईरान की अदावत भी वर्षों पुरानी है. शिया और सुन्नी विवाद के साथ-साथ इस्लामिक देशों का खलीफा बनाने की चाहत न भी सऊदी और ईरान को एक दूसरे का जानी-दुश्मन बना रखा है.
इराक बॉर्डर से कुर्द मिलिशिया करेगी ईरान पर अटैक
ये जो ग्राउंड अटैक का मैप सामने आया है, इसमें ईरान पर इराक बॉर्डर से कुर्द मिलिशिया के हमले की जानकारी भी साझा की गई है. ट्रंप ने भी पहले इस बात के संकेत दिए थे कि अमेरिका ने इराक में सक्रिय कुर्द लड़ाकों को ईरान पर बॉर्डर के जरिए हमले के लिए हथियार और दूसरे सैन्य साजो सामान दिया था. लेकिन कुर्द लड़ाके समय रहते कार्रवाई नहीं कर पाए. ऐसे में इस बात की संभावना है कि जब अमेरिका और खाड़ी देश समंदर के रास्ते ईरान पर ग्राउंड अटैक करेंगे तब ये कुर्द लड़ाके उत्तर की दिशा से ईरान में घुसकर राजधानी तेहरान की तरफ आगे बढ़ेंगे. इस जमीनी हमले में कुर्द लड़ाकों को इजरायल की ग्राउंड फोर्सेज का साथ मिलेगा, ताकि बॉर्डर पर ईरानी सेना से निपटा जा सके.
कुर्द लड़ाकों पर ईरान ने की ड्रोन स्ट्राइक
शुक्रवार की देर रात, ईरान ने इराक में कुर्द लड़ाके के सुलेमानियेह गढ़ में जबरदस्त ड्रोन स्ट्राइक की. इन स्ट्राइक में सुलेमानियेह के पहाड़ों पर जबरदस्त आग को धधकते हुए देखा जा सकता है. यानी ईरान को भी इस बात का डर सता रहा है कि अगर कुर्द मिलिशिया से समय रहते नहीं निबटा गया तो, आने वाले समय में खासी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है.
बलोच लड़ाके भी करेंगे ईरान पर अटैक
मैप में ये भी दिखाया गया है कि पाकिस्तान से सटे ईरान के बलूचिस्तान और सिस्तान प्रांत में भी ग्राउंड अटैक होने जा रहा है. यहां पर ईरानी शासन से खार खाए बैठे बलोच अलगाववादी संगठन हमला करेंगे. आपको याद दिला दें कि वर्ष 2024 के शुरूआती महीनों में ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत पर एयर स्ट्राइक कर इन बलोच लड़ाकों पर कार्रवाई करने का ऐलान किया था. इस हमले के बाद पाकिस्तान तिलमिला कर रह गया था और ईरान पर भी सांकेतिक हवाई हमले किए थे.
होर्मुज की तरफ बढ़ते अमेरिकी जंगी बेड़े को आईआरजीसी की चेतावनी
ग्राउंड अटैक की संभावना इसलिए बढ़ रही है क्योंकि शुक्रवार को ईरान की आईआरजीसी ने अमेरिका के एक एयरक्राफ्ट कैरियर की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए चेतावनी दी. आईआरजीसी के मुताबिक, अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ईरान के तटीय इलाकों की तरफ बढ़ रहा है. ऐसे में जीरो-मार्क पहुंचते ही अमेरिकी जंगी जहाज, आईआरजीसी के निशाने पर आ जाएंगे. सेंटकॉम भी ऐसे वीडियो जारी कर ईरान पर दवाब बना रहा है कि यूएस नेवी का जंगी बेड़ा ओमान की खाड़ी से होर्मुज स्ट्रेट की तरफ बढ़ रहा है.
यूएस नेवी के जंगी बेड़े की ताकत जानिए
यूएस नेवी ने इस वक्त, ओमान की खाड़ी में दो-दो एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर रखे हैं. इन एयरक्राफ्ट कैरियर पर दर्जनों एफ-18 सुपर-होरनेट फाइटर जेट, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और टोही विमान तैनात रहते हैं, जो दिन-रात कभी भी ईरान के खिलाफ ऑपरेशन्स कर सकते हैं. इसके अलावा 19-20 जंगी जहाज भी यहां तैनात हैं, जिनमें एम्फीबियस युद्धपोत हैं, जो तटीय इलाकों तक पहुंच सकते हैं. इनके जरिए टैंक, इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल्स यानी आईसीवी और दूसरे मिलिट्री व्हीकल्स को तेजी से ईरान के तटीय इलाकों में घुसाया जा सकता है.
माना जा रहा है कि करीब 1000 मरीन कमांडो भी स्पेशल ऑपरेशन्स के लिए इस जंगी बेड़े का हिस्सा हैं, जो खर्ग और केशम द्वीप पर सरप्राइज अटैक कर सकते हैं.
डीप स्ट्राइक के लिए इजरायली डिफेंस फोर्सेज अलर्ट पर
माना जा रहा है कि जब ये ग्राउंड अटैक यानी अमेरिका के बूट्स ऑन ग्राउंड ईरान में उतरेंगे, उस दौरान, अमेरिका और इजरायल दोनों, आसमान से डीप स्ट्राइक भी कर सकते हैं. यानी मिसाइलों से और फाइटर जेट्स से बमबारी के साथ-साथ पैरा-ट्रूपर भी आसमान से ईरान के स्ट्रेटेजिक लोकेशन और ठिकानों पर पैराशूट के जरिए जमीन पर उतरकर हमला बोल सकते हैं.
क्या इतना आसान है ग्राउंड अटैक
लेकिन यहां ये भी ध्यान रखना होगा कि अमेरिका के लिए ईरान की पहाड़ियों में ग्राउंड अटैक इतना आसान नहीं होगा. क्योंकि ईरान की फैंटम फोर्स भी अमेरिकी सोल्जर्स के ईरान की धरती पर कदम रखने का बेसब्री से इंतजार कर रही है.

