ईरान पर मंडरा रहा है अमेरिकी बमबारी का खतरा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ताजा बयान में कहा है कि अगर ईरान न्यूक्लियर डील पर सहमति नहीं बनाता है तो बमबारी की जाएगी. साथ ही कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा.
ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत हो रही है. लेकिन ईरान ने कहा है कि अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं की जाएगी. ट्रंप ने ईरान के तेजी से बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक पत्र लिखा था और अब सीधे-सीधे बमबारी करने की चेतावनी दे दी है.
….तो ईरान पर की जाएगी बमबारी: डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए बमबारी करने का वॉर्निंग दी है. ट्रंप ने कहा है, “अगर ईरान अमेरिका के साथ समझौता नहीं करता तो बमबारी की जाएगी.” अपनी आक्रामक नीतियों के कारण ट्रंप ने ईरान पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी दी है. कहा, “अगर वे डील से इनकार करेंगे तो अमेरिका, ईरान पर सेंकेडरी टैरिफ यानी अतिरिक्त शुल्क लगा देगा, जैसा मैंने चार साल (पहले कार्यकाल) में किया था.”
ईरान ने खारिज की ट्रंप की धमकी, सीधी बातचीत से भी किया इनकार
ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अमेरिका से सीधी बातचीत की संभावना को खारिज कर दिया गया है, लेकिन कहा है कि अप्रत्यक्ष वार्ता के रास्ते खुले हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चिट्ठी लिखी थी. तेहरान ने ट्रंप की धमकियों को खारिज कर दिया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि “ईरान ने ट्रंप के पत्र का जवाब ओमान के माध्यम से भेज दिया है.”
ट्रंप की धमकी से मिडिल ईस्ट में बढ़ेगा तनाव?
डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच अदावत पुरानी है. ईरान, ट्रंप को अपना कट्टर दुश्मन मानता है. ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने ईरान पर नकेल कस दी थी. साल 2018 में पहले अपने पहले कार्यकाल के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था. अमेरिका समेत कई पश्चिमी दुनिया के देश ईरान पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह क्षमता से अधिक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है. बड़े देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने के सीक्रेट एजेंडे पर काम कर रहा है. हालांकि ईरान सारे आरोपों से इनकार करता रहा है.
ईरान का ये रुख ट्रंप को और नाराज कर सकता है, क्योंकि ट्रंप ने सीधे बात करने का आह्वान किया है. ईरान अप्रत्यक्ष तौर से यानी तीसरे देश के माध्यम से बात करना चाहता है. लिहाजा ट्रंप की चिट्ठी का जवाब ओमान के जरिए अमेरिका को भेजा गया है.