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अमेरिका खरीदेगा ग्रीनलैंड, डेनमार्क जाएंगे रूबियो

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका ने शुरु कर दी है अगले चरण की तैयारी. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो जल्द करने वाले हैं डेनमार्क का दौरा, क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क स्वायत्त क्षेत्र है. 

ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे वाले डोनाल्ड ट्रंप के बयान के खिलाफ पूरा यूरोप एकजुट है, तो इस बीच अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने सफाई दी है, कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं करेगा, जबकि वो ग्रीनलैंड को खरीदेगा.

वहीं डेनमार्क की पीएम मेटे फेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने अमेरिका को साफ तौर पर कह दिया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है. 

जर्मनी, फ्रांस, इटली, ब्रिटेन, समेत यूरोपीय देशों ने भी अपने संयुक्त बयान में अमेरिका का विरोध करते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने का अधिकार सिर्फ वहां के निवासियों का है. 

डेनमार्क में रूबियों करेंगे उच्चस्तरीय बैठक, ग्रीनलैंड की बिक्री पर होगी बात

बताया जा रहा है कि जल्द ही अमेरिकी विदेश मंत्री डेनमार्क के दौरे पर जाएंगे, जहां पर ग्रीनलैंड को लेकर उच्च स्तरीय चर्चा की जाएगी. दरअसल वेनेजुएला पर नियंत्रण के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूरे यूरोप और लैटिन अमेरिकी देशों को भय में डाल दिया है. 

ट्रंप ने रूस-चीन तो निशाना साधते हुए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल की बात कही है, जिसके बाद संशय है कि क्या अमेरिकी सेना अब रातों-रात एक्शन लेकर डेनमार्क शासित देश ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेगी.

अमेरिकी विदेश मंत्री मारको रुबियो ने कहा है कि वह अगले हफ्ते डेनमार्क सरकार से ग्रीनलैंड के मुद्दे पर बातचीत करेंगे. डेनमार्क के साथ ये चर्चा ग्रीनलैंड को खरीदने को लेकर होगी. 

आपको बता दें कि अपने पिछले कार्यकाल (2019) में भी ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव दिया था, जिसे डेनमार्क ने ‘बेतुका’  बताकर ठुकरा दिया था.

हम अमेरिका के साथ बयानबाजी की गलतफहमी दूर करना चाहते हैं: डेनमार्क के विदेश मंत्री

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने रुबियो से बैठक का अनुरोध किया है. ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ड ने फेसबुक पोस्ट में बताया कि बैठक का मकसद अमेरिका के ग्रीनलैंड के संबंध में दिए गए कड़े बयान पर चर्चा करना है.

वहीं डेनिश विदेश मंत्री रासमुसेन ने बताया कि हम ये बैठक इसलिए चाहते हैं क्योंकि हमें लगता है कि इस चर्चा का कुछ हिस्सा गलतफहमी पर आधारित है. हमें लगता है कि अमेरिकी अधिकारियों से बैठक करना जरूरी है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर किया जा सके.

ग्रीनलैंड को है अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण

ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ग्रीनलैंड को लेकर बयान दे चुके हैं. ग्रीनलैंड पर अमेरिकी आधिपत्य ट्रंप का पुराना एजेंडा है. अब सत्ता में वापसी और वेनेजुएला के तेल नियंत्रण के बाद ग्रीनलैंड के खनिज पर ट्रंप की नजर है.

आपको बता दें कि 57000 आबादी वाला ग्रीनलैंड खनिज संसाधनों से भरपूर है और आर्कटिक क्षेत्र में इसकी भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए सैन्य और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है. 

ट्रंप ने ग्रीनलैंड के लिए नियुक्त किया विशेष दूत, डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ की पत्नी के विवादित नक्शे ने माहौल बिगाड़ा

पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के लिए एक विशेष दूत नियुक्त करने का ऐलान किया था. उस वक्त भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपना पुराना रुख दोहराते हुए कहा था ग्रीनलैंड पर अमेरिका कब्जा नहीं कर सकता, उसकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.

इसके अलावा पिछले सप्ताह ट्रंप के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ की पत्नी ने एक विवादित नक्शा सोशल मीडिया पर शेयर किया था. जिसमें ग्रीनलैंड पर अमेरिकी झंडा लहराते दिखाया. राष्ट्रपति ट्रंप के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ और इमिग्रेशन जार स्टीवन मिलर की पत्नी केटी मिलर ने इस पोस्ट में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी झंडा लिपटा हुआ था और उस पर ‘जल्द ही’ लिखा था. 

केटी मिलर व्हाइट हाउस में कम्युनिकेशन डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुकी हैं और ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल में डोज में सलाहकार थीं. 

इसके बाद ट्रंप ने जब ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कही तो मामला बिगड़ गया. डेनमार्क की पीएम की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई.

नाटो देश डेनमार्क का पलटवार, डेनिश किंगडम के तीनों देशों में किसी पर भी कब्जे का अधिकार नहीं

डेनमार्क नाटो का एक सहयोगी देश है. ट्रंप के बयान के बाद डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि अगर अमेरिका ऐसी कोशिश करता है तो नाटो गठबंधन खत्म हो जाएगा.

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा, “अमेरिका के ग्रीनलैंड पर कब्जे की जरूरत के बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है. अमेरिका को डेनिश किंगडम के तीन देशों में से किसी पर भी कब्जे का कोई अधिकार नहीं है. डोनाल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड पर कंट्रोल की धमकियां देना बंद करना चाहिए.”

डेनमार्क को मिला यूरोपीय देशों का साथ, अमेरिका के खिलाफ जारी बयान

इटली की प्रधानमंत्री जोर्जिया मेलोनी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. 

यूरोप के नेताओं ने कहा, “आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा केवल सामूहिक रूप से ही सुनिश्चित की जा सकती है नाटो सहयोगियों (जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल है) के साथ मिलकर-संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों को बनाए रखा जाए. इसमें संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सीमाएं शामिल है. ये सार्वभौमिक सिद्धांत हैं और हम इनकी रक्षा करना कभी नहीं छोड़ेंगे. इस प्रयास में संयुक्त राज्य अमेरिका एक अनिवार्य साझेदार है नाटो सहयोगी होने के नाते और 1951 में डेनमार्क के साम्राज्य तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुए रक्षा समझौते के तहत. ग्रीनलैंड उसके लोगों का है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड को ही है.”

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