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श्रद्धांजलि: भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं !

बॉलीवुड के माध्यम से देश के लोगों में देशभक्ति की रीत जगाने वाले वेटरन एक्टर, डायरेक्टर मनोज कुमार हमारे बीच में नहीं रहे हैं. ‘भारत कुमार’ के नाम से प्रसिद्ध मनोज कुमार ने 88 वर्ष की आयु में मुंबई के कोकिलाबेन धीरू अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली है.

मनोज कुमार को हिंदी सिनेमा में देशभक्ति और सामाजिक जागरूकता वाली फिल्मों का गेमचेंजर माना जाता है. है प्रीत जहां की रीति सदा, भारत का रहने वाला हूं, मेरे देश की धरती सोना उगले, कर चले हम फिदा, जैसे देशभक्ति से भरे हुए सुपरहिट गाने मनोज कुमार की फिल्मों की शान बने. इन गानों के जरिए देश के बच्चे-बच्चे ने देशभक्ति से ओतप्रोत गानों को गुनगुनाया, आज भी गुनगुनाया जाता है और आगे भी गुनगुनाते जाते रहेंगे. 

मनोज कुमार के निधन से बॉलीवुड शोक में डूब गया है. बताया जा रहा है कि शनिवार (5 अप्रैल) दोपहर 12 बजे मुंबई के विले पार्ले में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.  

हिंदी सिनेमा में देशभक्ति की भावना को जगा गए मनोज कुमार

रोमांटिक फिल्मों से करियर शुरु करने वाले मनोज कुमार को देशभक्ति फिल्मों ने ऐसी पहचान दिलवाई कि आज भी उनके गाने और फिल्म सुपरहिट हैं. साल 1957 में फैशन फिल्म से करियर की शुरुआत करने वाले मनोज कुमार ने को साल 1965 में क्रांतिकारी भगत सिंह की भूमिका ने ऐसी पहचान दी कि उसके बाद मनोज कुमार ने एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में दीं, वो भी देशभक्ति की. ‘शहीद’, ‘उपकार’ और ‘रंग दे बसंती’ और ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों के माध्यम से मनोज कुमार ने लोगों में देशभक्ति की अलख जगाई. 

मनोज कुमार की फिल्म उपकार का गीत ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ और फिल्म क्रांति का गाना ‘जिंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी’ आज भी हिट है. मनोज कुमार ने सहारा, चांद, हनीमून, पूरब और पश्चिम, नसीब, मेरी आवाज सुनो, नील कमल, पत्थर के सनम, पिया मिलन की आस जैसी फिल्मों में काम किया था. (https://x.com/Bhupesh/status/1908008211631788349)

आज भी सुपरहिट हैं मनोज कुमार के ये गाने

मनोज कुमार को पद्म श्री, दादा साहब फाल्के अवॉर्ड के साथ साथ राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

पाकिस्तान में जन्मे मनोज कुमार की ये है असली पहचान

मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 में पाकिस्तान के एबटाबाद में हुआ था. बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से दिल्ली आ गया. मनोज कुमार का पूरा परिवार काफी दिनों तक भारत के रिफ्यूजी कैंप्स में रहने को मजबूर हुआ, इस दौरान मनोज कुमार ने अपने छोटे भाई को भी हमेशा हमेशा के लिए खो दिया था. मनोज कुमार का असली नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी है लेकिन दिलीप कुमार की फिल्म शबनम के बाद उन्होंने अपना नाम मनोज कुमार रख लिया. मनोज कुमार हमेशा से दिलीप कुमार को अपना आदर्श बताते रहे हैं.

देश में शोक की लहर, पीएम मोदी ने तस्वीर शेयर कर दी श्रद्धांजलि

थाईलैंड से पीएम मोदी ने मनोज कुमार के साथ अपनी तस्वीरें शेयर करके नमन किया है. पीएम मोदी ने लिखा, “महान अभिनेता और फिल्मकार मनोज कुमार जी के निधन से बहुत दुःख हुआ. वे भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे.उन्हें खास तौर पर उनकी देशभक्ति के जोश के लिए याद किया जाता था. देशप्रेम उनकी फिल्मों में भी झलकता था. मनोज जी के कामों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को जगाया और वे पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे, ओम शांति.” (https://x.com/narendramodi/status/1907987237545128035)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मनोज कुमार को याद करते हुए लिखा

“मनोज कुमार जी एक बहुमुखी अभिनेता थे, जिन्हें हमेशा देशभक्ति से भरपूर फिल्में बनाने के लिए याद किया जाएगा. ‘भारत कुमार’ के नाम से मशहूर, ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’ जैसी फिल्मों में उनके अविस्मरणीय अभिनय ने हमारी संस्कृति को समृद्ध किया है और उन्हें पीढ़ियों से लोगों का प्रिय बनाया है. उनकी सिनेमाई विरासत उनके कामों के जरिए जिंदा रहेगी.”

जब इंदिरा गांधी से भिड़ गए थे मनोज कुमार, जीता केस

बताया जाता है कि इमरजेंसी की घोषणा के बाद एक्टर मनोज कुमार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आप,स में भिड़ गए थे. पहले मनोज कुमार और इंदिरा गांधी में आत्मीयता थी लेकिन इमरजेंसी की घोषणा के दौरान मनोज कुमार ने इंदिरा गांधी का विरोध किया. ऐसे में दोनों के बीच रिश्ते बदलने में देरी नहीं लगी. दरअसल मनोज कुमार ने खुलकर इमरजेंसी का विरोध किया था.

इंदिरा गांधी ने जो फिल्मी कलाकार इमरजेंसी का विरोध कर रहे थे, उन्हें पूरी तरह से बैन कर दिया गया था. मनोज कुमार की फिल्म दस नंबरी’ और ‘शोर’ को बैन कर दिया गया था. लेकिन मनोज कुमार ने हार नहीं मानी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कई हफ्तों के कोर्ट के चक्कर के बाद मनोज कुमार, इंदिरा गांधी और सरकार के खिलाफ किए केस में जीत गए. वो इकलौते ऐसे फिल्ममेकर थे जिन्होंने भारत सरकार के खिलाफ केस जीता था. 

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