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IRIS डेना के सामूहिक ताबूतों की तस्वीरें जारी, ईरान ने अमेरिका को धमकाया

हिंद महासागर में भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर हुए हमले में मारे गए सैनिकों के ताबूतों की ईरान ने तस्वीरें जारी की हैं. ईरान ने अमेरिकी पर युद्ध अपराध का आरोप लगाते हुए कहा है कि हम इसे कभी नहीं भूलेंगे.

इस जहाज में 180 ईरानी सैनिक और क्रू मेंबर्स तैनात थे जब अमेरिकी नेवी ने टॉरपीडो से हमला कर जहाज को डुबो दिया. श्रीलंकन नेवी ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर कुछ सैनिकों को बचा लिया. इस हमले में 87 नाविक मारे गए, जबकि 32 नाविकों को श्रीलंका की नौसेना ने बचाया और उन्हें गाले के अस्पतालों में भर्ती कराया गया. श्रीलंका ने मारे गए ईरानी सैनिकों के शव को तेहरान भेजा है. तेहरान ने ताबूतों की तस्वीर जारी कर दुनिया से अमेरिका के खिलाफ आवाज उठाने की मांग की है.

वहीं हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात को स्वीकार किया था कि अमेरिकी सेना सिर्फ अपने मजे के लिए ईरानी युद्धपोतों पर एक्शन ले रही है और उन्हें डुबो रही है. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी कहा था कि सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत डेना को डुबो कर ईरानी सैनिकों को शांत मौत दी.

हम अमेरिका के इस युद्ध अपराध को कभी नहीं भूलेंगे: ईरान

ईरान की सरकार ने आईआरआईएस डेना युद्धपोत पर अमेरिका के हमले में शहीद हुए नाविकों के ताबूतों की तस्वीरें दुनिया को दिखाई हैं. ईरान के भारत स्थित दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “आईआरआईएस डेना युद्धपोत पर अमेरिकी बलों द्वारा किए गए आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले नौसेना शहीदों के पवित्र और पार्थिव शरीर.”

श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थुशारा रोड्रिगो ने शुक्रवार को बताया था कि “शवों को ईरान से आए चार्टर्ड विमान के जरिए वापस भेजा जाएगा.” इन नाविकों की मौत 4 मार्च को तब हुई थी, जब श्रीलंका के तट के ठीक पास आईआरआईएस डेना युद्धपोत पर टॉरपीडो से हमला किया गया था. इस हमले की आलोचना अंतरराष्ट्रीय कानून के घोर उल्लंघन के तौर पर हुई है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने हमले में मारे गए नाविकों को श्रद्धांजलि दी. कहा, “यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि ईरानी लोग इसे कभी नहीं भूलेंगे.”

अमेरिकी मिलिट्री कमांडर मजे के लिए डुबो रहे ईरानी जंगी जहाज: ट्रंप

अमेरिकी मिलिट्री कमांडर फन (मजे) के लिए डुबो रहे हैं ईरान के जंगी जहाज. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात को स्वीकार किया है. इन जंगी जहाज में आईआरआईएस डेना भी शामिल है जिसमें 100 से ज्यादा ईरानी नौसैनिक मारे गए हैं. ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के 20 से ज्यादा जंगी जहाज और पनडुब्बियों को तबाह कर दिया गया है. ईरानी नेवी पूरी तरह से खत्म हो गई है.

जिन जहाजों को ध्वस्त किया गया है उनमें डेना के अलावा आईआरआईएस मकरान,  आईआरआईएस शाहिद बघेरी,  ईरान के जनमरान,  एक सुलेमानी क्लास युद्धपोत, बयंदर, नागेहड़ी, एक पनडुब्बी और फास्ट पेट्रोलिंग बोट या छोटे जहाज शामिल हैं.

पछताएगा अमेरिका, भड़के ईरानी विदेश मंत्री

फ्रिगेट डेना पर लिए गए एक्शन के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची मे अमेरिका को महाक्रूर अपराध वाला करार दिया था, अराघची ने कहा, “अमेरिका ने ईरान के तट से 2,000 मील दूर समुद्र में एक क्रूरता की है, फ्रिगेट डेना भारतीय नौसेना की अतिथि थी और लगभग 130 नाविकों को लेकर जा रही थी. अमेरिका द्वारा उस पर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में बिना चेतावनी के हमला किया गया. मेरे शब्दों को याद रखें: अमेरिका को जिस मिसाल का उसने निर्माण किया है, उसका उसे कड़वा पछतावा होगा.”

इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने पहुंचा था ईरानी युद्धपोत

पिछले महीने 18 फरवरी को विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने आया था डेना जहाज. अमेरिकी नौसेना ने भी इस एक्सरसाइज में हिस्सा लिया था.  अमेरिका और ईरान के अलावा, 70 से ज्यादा देशों ने मिलन एक्सरसाइज में भाग लिया था. यह एक भव्य समुद्री आयोजन था जिसने वैश्विक नौसैनिक सहयोग, पेशेवर सौहार्द और भारत की समुद्री क्षमता का प्रदर्शन किया. ये आयोजन बेहद सफल था.  25 फरवरी को निकलने के बाद जहाज भारतीय इलाके से बाहर और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था. ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमला 28 फरवरी को हुआ. इस दौरान कभी भी ईरानी क्रू ने भारत से मदद नहीं मांगी थी. वहीं इसके साथ ही आए एक और युद्धपोत आईआरआईएस लवन के क्रू मेंबर्स ने मदद मांगी, जिसके बाद वो जहाज ईरानी नौसैनिकों के साथ कोच्चि में मौजूद है.

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहला युद्धपोत डुबोया गया, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बताया शांत मौत

44 साल बाद किसी पनडुब्बी ने बनाया जंगी जहाज को डुबोया है. साल 1982 के फॉकलैंड युद्ध में ब्रिटिश सबमरीन ने अर्जेंटीना के युद्धपोत में धमाका कर डुबोया था जिसके बाद अर्जेंटीना ने सरेंडर कर दिया था.

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में ईरानी युद्धपोत डेना को डुबोने की पुष्टि की और इसे “शांत मौत”  करार दिया. हेगसेथ ने कहा, “यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दुश्मन जहाज पर पहला टॉरपीडो हमला है.”

पीट हेगसेथ ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का हिस्सा बताया, जो 28 फरवरी 2026 से इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा है.

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