ईरान अपने न्यूक्लियर अधिकारों से किसी भी तरह का नहीं करेगा समझौता. इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दो टूक कहा है कि कोई भी देश ईरान से उसके अधिकार नहीं छीन सकता.
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दबाव बना रहे हैं कि ईरान अपना यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे बदले में जितने भी प्रतिबंध लगे हैं, उनसे छूट ले ले.
लेकिन ईरानी राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि वो अमेरिका के दबाव में नहीं आएंगे और न ही अपना यूरेनियम अमेरिका को देंगे.
ट्रंप होते कौन हैं, हमें रोकने वाले: पेजेश्कियान
इस्लामाबाद में दूसरे राउंड की बातचीत से पहले अमेरिका और ईरान के बीच जमकर जुबानी जंग जारी है. राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति पेजेश्कियान आमने सामने हैं. न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर दोनों देशों में भयंकर टकराव है.
ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अमेरिका दबाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, “ट्रंप कहते हैं कि ईरान अपने न्यूक्लियर अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, लेकिन यह नहीं बताते कि आखिर किस जुर्म में? वो कौन होते हैं किसी देश के अधिकार छीनने वाले?”
दरअसल ईरानी राष्ट्रपति दुनिया को ये यकीन दिला रहे हैं कि ईरान कोई भी न्यूक्लियर प्रोग्राम पर काम नहीं कर रहा है, खुद अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में ये कहा है कि ईरान न्यूक्लियर प्रोग्राम से कोसों दूर है, बावजूद इसके 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ये कहते हुए तेहरान पर एयरस्ट्राइक की थी कि उनका लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है.
ईरान पर ये युद्ध जबरन थोपा गया, हम पीछे नहीं हटेंगे: पेजेश्कियान
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर युद्ध थोपने का आरोप लगाते हुए कहा, “हम युद्ध नहीं चाहते, शांति के पक्षधर हैं. लेकिन अपने देश के सम्मान और संप्रभुता के लिए पीछे नहीं हटेगा.”
पेजेश्कियान ने कहा, “ईरान संवाद की अहमियत समझता है, लेकिन देश की रक्षा करने के लिए जंग में कूदा है. हमारी तैयारी पूरी है. अगर अमेरिका यही चाहता है, तो हम अंत तक लड़ेंगे.”
अमेरिका के 180 ड्रोन गिराए, एफ 35 को भी पहुंचा नुकसान: ईरानी स्पीकर
शांति वार्ता में अमेरिकी डेलीगेशन के सामने ईरान का प्रतिनिधित्व करने वाले ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबफ ने कहा, कि “उनके बलों ने करीब 180 ड्रोन को निष्क्रिय किया और अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट को भी निशाना बनाया.”
गालिबफ ने कहा कि “एफ-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट को निशाना बनाना दिखाता है कि ईरान रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है.”
गालिबफ ने यह माना कि अमेरिका के साथ बातचीत में कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन कई बड़े मतभेद अभी भी बाकी हैं. कहा, “अमेरिका, ईरानी सैन्य शक्ति के कारण बातचीत पर मजबूर हुआ है. अमेरिका ईरान की रिजीम चेंज करना चाहता था, लेकिन ऐसा नहीं कर पाया.”

