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तेहरान के लिए सबकुछ करेंगे, पुतिन का खुला समर्थन

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर टिक गई है, खासतौर से अमेरिका की. अमेरिका के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की है.

ये दौरान पुतिन ने ईरान की जमकर तारीफ की है और कहा है कि ईरान अपने देश की संप्रभुता के लिए बहुत बहादुरी से लड़ रहा है. और पुतिन ने अब्बास अराघची को भरोसा दिया है कि रूस हमेशा ईरान के साथ हर स्थिति में मजबूती से खड़ा रहेगा.

दावा किया जा रहा है कि 40 दिनों तक चले युद्ध के दौरान रूस ने न सिर्फ ईरान को खुफिया जानकारियां दी थीं, बल्कि घातक हथियार भी देकर अमेरिका संग जंग में मदद पहुंचाई थी.

बहादुर ईरान संप्रभुता के लिए लड़ रहा: पुतिन  

अमेरिका-इजरायल से तनाव के बीच ईरान को रूस का साथ मिला है. सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की बैठक हुई. इस बैठक में ईरान की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई, जिसमें होर्मुज बातचीत का प्रमुख मुद्दा था.

अब्बास अराघची को पुतिन ने भरोसा दिया है कि वो पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे. पुतिन ने ईरानी लोगों की प्रशंसा करते हुए कहा, वे अपनी संप्रभुता के लिए बहादुरी से संघर्ष कर रहे हैं.
पुतिन ने ईरानी विदेश मंत्री से कहा, कि रूस तेहरान के हितों का समर्थन करेगा और रूस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए सब कुछ करेगा, जो वो कर सकता है.

रूस-ईरान के मजबूत हैं संबंध: अब्बास अराघची

पुतिन से मुलाकात के दौरान अराघची ने कहा कि “हालात चाहे जैसे हों, ईरान और रूस के संबंध आगे और मजबूत होंगे. दोनों देशों के रिश्ते सबसे ऊंचे स्तर की रणनीतिक साझेदारी हैं. मौजूदा युद्ध, क्षेत्रीय तनाव या अंतरराष्ट्रीय दबाव से रूस और ईरान की नजदीकी कम नहीं होगी.”

अराघची ने कहा, “रूस और ईरान पहले से ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय मामलों में सहयोग बढ़ा रहे हैं. और आगे बढ़ाते रहेंगे.”

रूस के सहारे ईरान ने अमेरिका को पछाड़ा

28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर अटैक किया था, तो उस वक्त उन्हें लगा था कि अयातुल्ला खामेनेई और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत से ईरान टूट जाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया था कि अब कट्टरपंथी खामेनेई की मौत से ईरान से बातचीत आसान हो जाएगी. लेकिन ईरान ने वो कर दिखाया, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी.

ईरान ने खाड़ी देशों समेत 11 से ज्यादा देशों में हमला बोल दिया, जिससे कई अमेरिकी सैनिक तो मारे ही गए, इजरायल-अमेरिका के लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस सिस्टम और युद्धपोतों, ड्रोन्स को भी नुकसान पहुंचा.

सवाल ये है कि ईरान ने ये सब किया कैसे. बताया जा रहा है कि ईरान ने ऐसे ऐसे हथियार बनाए जो दुनिया से अनजान थे. जिन्हें ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा ईरान के पीछे सबसे बड़ी ताकत है रूस और चीन की. ये दोनों देश शुरुआत में भले ही खुलकर सामने नहीं आए, लेकिन कहा जा रहा है कि रूस, ईरान को सैन्य मदद दे रहा है. जिसका खुलासा खुद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने युद्ध के दौरान किया था.

अराघची ने कहा था, “ईरान और रूस के बीच सैन्य सहयोग कोई नई बात नहीं है. यह पहले भी होता रहा है और भविष्य में भी जारी रहेगा. रूस के साथ हमारी बहुत अच्छी साझेदारी है. वे कई अलग-अलग दिशाओं में हमारी मदद कर रहे हैं.”

दरअसल अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि “रूस ने ईरान को मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों और संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए जानकारी मुहैया कराई थी.

संयुक्त राष्ट्र में भी रूस ने किया था अमेरिका का खेल,  ईरान का दिया साथ

40 दिनों तक चले युद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन की तरफ से ईरान के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें सैन्य हस्तक्षेप करके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की मांग की गई थी. हालांकि रूस और चीन ने इस पर वीटो कर दिया. 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव पर 11 वोट पक्ष में, जबकि 2 (रूस और चीन) वोट विरोध में पड़े.

रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि प्रस्ताव ‘मूल रूप से गलत और खतरनाक’ है क्योंकि उसमें ईरान पर किए गए अमेरिका और इजरायल के ‘अवैध हमलों’ का जिक्र तक नहीं था. तो चीन के राजदूत फू कोंग ने कहा कि प्रस्ताव ‘संघर्ष की जड़ों और पूरी तस्वीर’ को संतुलित तरीके से नहीं दर्शाता.

रूस और चीन के प्रतिनिधियों ने यूएन में ये संदेश दिया कि अगर ईरान पर हमले जारी रहे तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पूरी तरह बिगड़ जाएगा.

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