ईरान युद्ध के कारण फैली अस्थिरता पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ यूरोप लगातार मजबूत कर रहा है आवाज. नाटो से अलग होने या फिर स्पेन जैसे देशों को बाहर करवाने की योजना बनाने वाले अमेरिका को जर्मनी ने जमकर लताड़ लगाई है.
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि ईरान जितना कमजोर सोचा गया था, उससे कहीं ज्यादा मजबूत निकला और अब अमेरिका के पास इस जंग से बाहर निकलने का कोई रास्ता दिख नहीं रहा.
अमेरिका के पास कोई योजना नहीं: जर्मन चांसलर
मिडिल ईस्ट में सैन्य हलचल का असर यूरोप पर पड़ने लगा है. होर्मुज की खाड़ी बाधित होने के कारण यूरोप के जहाज भी फंसे हुए हैं, तो वहीं अमेरिका की मदद न करने के कारण ट्रंप, ब्रिटेन-फ्रांस जैसे देशों से चिढ़े बैठे हैं.
ऐसे में जर्मन चांसलर मर्ज ने एक कार्यक्रम में “अमेरिका को इस युद्ध को लेकर घेरा. मर्ज ने कहा, मेरी समझ नहीं आ रहा कि अमेरिका इस जंग से बाहर निकलने का क्या रास्ता चुन रहा है. उनका मतलब यह है कि अमेरिका लड़ रहा है लेकिन उसके पास कोई साफ योजना नहीं है कि यह जंग कैसे खत्म होगी. बिना किसी योजना के लंबी जंग यूरोप को भी नुकसान पहुंचाती है.”
ईरान को कमजोर समझना गलती थी: जर्मन चांसलर
जर्मन चांसलर ने ईरान को मजबूत सेना वाला बताया. फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, “ईरान जितना कमजोर समझा गया था वो उससे कहीं ज्यादा मजबूत निकला है. ईरान अमेरिका के साथ बातचीत में बहुत चालाकी से काम ले रहा है.”
दरअसल 28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने तेहरान पर हमला करके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई समेत ईरान के सभी शीर्ष नेतृत्व का खात्मा किया, तो पूरी दुनिया को लगा था, कि ईरान हार गया, लेकिन ईरान के पलटवार से हर कोई हैरान रह गया. युद्ध 40 दिनों तक चला, और फिर अमेरिका को थकहार कर ईरान को बातचीत की टेबल पर लाना पड़ा.
दोनों देशों में भले ही सीजफायर है, लेकिन होर्मुज को लेकर तनातनी बढ़ी है. ईरान ने कह दिया है कि “अगर अमेरिका ने होर्मुज पर लगाई नाकेबंदी नहीं हटाई तो कोई बातचीत नहीं की जाएगी.”
होर्मुज में बारूदी सुरंगे दुनिया के लिए चिंता की बात: जर्मन चांसलर
मर्ज ने ईरानी सैन्य बल आईआरजीसी की आलोचना की है. कहा, “आईआरजीसी अपने सरकार की बेइज्जती करवा रही है. होर्मुज की खाड़ी जो दुनिया का सबसे जरूरी तेल रास्ता है वहां आंशिक रूप से बारूदी सुरंगें बिछी हुई हैं. ये बहुत ही चिंता का विषय है.”
हाल ही में तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन ने जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टीनमीयर से बातचीत में कहा था कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष अब यूरोप तक असर डाल रहा है. एर्दोगन ने जर्मनी को चेतावनी दी कि “अगर इसे कूटनीति और शांति के रास्ते से नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले समय में नुकसान और ज्यादा गंभीर हो सकता है.”
एर्दोगन ने कहा कि “क्षेत्र में चल रहा संघर्ष अब सीमित नहीं रहा है. इसका असर धीरे-धीरे यूरोप तक पहुंच रहा है और वहां की आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है.”


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