नौसेना के बाद अब इंडियन कोस्टगार्ड के समुद्री जहाज में महिलाओं की तैनाती शुरु हो गई है. इंडियन कोस्टगार्ड के प्रदूषण नियंत्रण पोत आईसीजीएस समुद्री-प्रताप में पहली बार 02 महिला अधिकारियों को तैनात किया गया है. सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में समुद्री-प्रताप को कोस्टगार्ड में शामिल किया गया.
समंदर में प्रदूषण से लड़ेगा समुद्री-प्रताप
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा निर्मित, समुद्री-प्रताप, दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है. 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से निर्मित, समुद्र प्रताप देश का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है और भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा पोत है. समुद्र प्रताप के शामिल होने से प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इससे भारत के विशाल समुद्री क्षेत्रों में विस्तारित निगरानी और प्रतिक्रिया अभियानों को संचालित करने की क्षमता भी मजबूत होगी.
गोवा में आयोजित कमीश्निंग सेरेमनी में नौसैनिकों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्र प्रताप को विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन इसकी भूमिका केवल इसी तक सीमित नहीं है. एक ही प्लेटफॉर्म में कई क्षमताओं को एकीकृत करने के कारण, यह जहाज तटीय गश्ती में प्रभावी साबित होगा और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा.
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा अपनाए गए आधुनिक दृष्टिकोण का परिणाम है, जिसका उद्देश्य वर्तमान समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए लचीलापन और तत्परता बढ़ाना है.
रक्षा मंत्री ने समुद्री प्रदूषण से लेकर तटीय स्वच्छता, खोज एवं बचाव से लेकर समुद्री कानून प्रवर्तन तक, बहुआयामी भूमिका निभाने के लिए तटरक्षक बल की सराहना की. उन्होंने कहा कि जिस तरह से तटरक्षक बल अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा है, उससे देश के शत्रुओं को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यदि वे भारत की समुद्री सीमाओं पर बुरी नजर डालने या किसी भी प्रकार का दुस्साहस करने का साहस करते हैं, तो उन्हें करारा और मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा.
यह जहाज उन्नत प्रदूषण पहचान प्रणालियों, प्रदूषण से निपटने के लिए विशेष नौकाओं और आधुनिक अग्निशमन क्षमताओं से सुसज्जित है. इसमें हेलीकॉप्टर हैंगर और विमानन सहायता सुविधाएं भी हैं, जो इसकी पहुंच और प्रभावशीलता को काफी बढ़ा सकती हैं. राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि इन क्षमताओं के कारण, यह पोत खराब समुद्री परिस्थितियों में भी स्थिर रूप से काम कर सकेगा, जिससे वास्तविक परिचालन में बहुत लाभ मिलेगा.
आईसीजीएस समुद्री-प्रताप में तैनात हुई महिला अधिकारी
पहली बार, इस जहाज पर दो महिला अधिकारी होंगी. रक्षा मंत्री ने सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप समावेशी और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए आईसीजी की सराहना करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि आज महिला अधिकारियों को पायलट, ऑब्जर्वर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक्स ऑफिसर और लॉ ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, साथ ही उन्हें होवरक्राफ्ट संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं न केवल सहायक भूमिका निभा रही हैं, बल्कि अग्रिम मोर्चे पर योद्धाओं के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रही हैं. भारतीय तटरक्षक बल के समुद्र प्रताप में नियुक्त दोनों महिला अधिकारी भावी पीढ़ियों के लिए आदर्श हैं. भारतीय तटरक्षक बल सभी के लिए अवसरों और विकास का स्रोत बना रहेगा.
खुफिया आधारित बल बनने की आवश्यकता
रक्षा मंत्री ने वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय तटरक्षक बल के लिए एक प्लेटफॉर्म-केंद्रित बल से खुफिया-आधारित और एकीकरण-केंद्रित बल में परिवर्तित होने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने समुद्री कानून प्रवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और समुद्री साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारतीय तटरक्षक बल के अंदर विशिष्ट कैरियर स्ट्रीम विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया.
आत्मनिर्भर भारत महज नारा नहीं बल्कि कार्यशैली का हिस्सा
भारतीय तटरक्षक बल के आत्मनिर्भरता प्रयासों की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा अब कार्यशैली का हिस्सा बन गया है. उन्होंने कहा कि मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहलों के अनुरूप, भारतीय तटरक्षक बल ने स्वदेशी संसाधनों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आज हमारे तटरक्षक जहाजों और विमानों का निर्माण, रखरखाव और मरम्मत देश में ही हो रही है. यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.
पूरे हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता को सुनिश्चित करेगा भारत
रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री अनिश्चितता के वर्तमान दौर में भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि वह न केवल अपने हितों की रक्षा करता है, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता को भी सुनिश्चित करता है. उन्होंने आगे कहा कि यह दृष्टिकोण भारत को एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति बनाता है.

