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टेररिस्ट स्टेट से Platinum रिश्ते बनाएगा बांग्लादेश, भारत के खिलाफ कुछ भी करने को तैयार यूनुस

जिस पाकिस्तान से बांग्लादेश को लंबे संघर्ष के बाद स्वतंत्रता मिली, उसी पाकिस्तान के शह पर बांग्लादेश के मुखिया और उनके सलाहकार सोची समझी साजिश के तहत भारत को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले सप्ताह जहां मोहम्मद यूनुस ने ‘भारत के सेवेन सिस्टर्स’ (पूर्वोत्तर सात राज्यों) में चीन को लुभावना लालच दिया तो बांग्लादेश के राजदूत ने पाकिस्तान की शान में कसीदे पढ़े हैं. 

पाकिस्तान के डिप्टी पीएम मुहम्मद इशाक डार अप्रैल में बांग्लादेश की राजधानी ढाका का दौरा करेंगे. उससे पहले पाकिस्तान में बांग्लादेश के राजदूत ने कहा है कि “पाकिस्तान-बांग्लादेश संबंधों का स्वर्णिम युग शुरू हो चुका है और हम इसे प्लैटिनम स्तर पर ले जाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं.”

पिछले साल कुछ ऐसा ही रुख भारत के पड़ोसी देश मालदीव का भी था. भारत विरोधी बातें करना, पाकिस्तान के करीबी देशों से नजदीकी बढ़ाना. लेकिन कुछ ही महीनों में ये सब काफूर हो गया, क्योंकि चीन के कर्ज के जाल में फंसे मालदीव की मदद के लिए भारत आगे आया. बांग्लादेश की बयानबाजी और तल्खी बढ़ते देख ऐसा लग रहा है कि जल्द ही बांग्लादेशी ऊंट पहाड़ की नीचे आने वाला है.

पाकिस्तान के साथ स्वर्णिम युग, प्लैटिनम तक ले जाएंगे रिश्ते: बांग्लादेश

बांग्लादेश में पिछले साल अगस्त में शेख हसीना की सरकार चले जाने के बाद से अंतरिम सरकार पाकिस्तान से करीबी बनाने में लगी हुई है. पाकिस्तान अफसर चाहे वो सैन्य हों या खुफिया एजेंसी आईएसआई के भारत की सीमा के पास संवेदनशील जगहों का दौरा कर रहे हैं. बांग्लादेश ने पाकिस्तान के लोगों को वीजा के लिए रियायतें दी हैं, साथ ही इस महीने पाकिस्तान के डिप्टी पीएम भी ढाका पहुंचने वाले हैं. इशाक डार की यात्रा, मोहम्मद यूनुस के शासन में आने के बाद दोनों देशों के बीच पहली उच्चस्तरीय डिप्लोमेटिक यात्रा होगी.

ऐसे वक्त में पाकिस्तान में बांग्लादेशी राजदूत मोहम्मद इकबाल हुसैन खान ने कहा है कि “पाकिस्तान-बांग्लादेश संबंधों का स्वर्णिम युग शुरू हो चुका है और हम इसे प्लैटिनम स्तर पर ले जाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं.” इकबाद हुसैन ने कहा, “यह खुशी की बात है कि हमारे दोनों देशों के बीच व्यापार पहले ही शुरू हो चुका है और निश्चित रूप से ये संबंध कई और क्षेत्रों में भी विस्तार लेगा.सहयोग वाले क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जिन्हें बढ़ाने के लिए अपार क्षमता मौजूद है.”

भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रच रहे बांग्लादेश-पाकिस्तान, टीएफए की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में हुआ था खुलासा

फरवरी के महीने में ओमान की राजधानी मस्कट में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बांग्लादेश के समकक्ष तौहीद हुसैन से मुलाकात की तो सलाह दी कि पड़ोसी देश को ‘आतंकवाद को सामान्य गतिविधि’ ना बनाएं. जयशंकर का इशारा पाकिस्तान की तरफ था जहां, आतंकवाद को ‘स्टेट-नीति’ बना लिया गया है. अंतरिम सरकार के नेतृत्व में बांग्लादेश में आतंकवाद अपनी पैठ बना रहा है. 

टीएफए  ने इस मामले में इन्वेस्टिगेशन की तो पाया कि जयशंकर की बात में दम है. क्योंकि भारत की इंटेलिजेंस एजेंसियों को लगातार ऐसे इनपुट मिल रहे हैं, जिससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, बांग्लादेश में शरण ले रहे रोहिंग्या समुदाय और वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस के तार जुड़े पाए गए हैं. पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश से सटे भारत (पश्चिम बंगाल) के बशीरहाट, 24 परगना, सोनपुर और बोंगगांव जैसे इलाकों में हैम रेडियो ऑपरेटर्स को कुछ ऐसे संदिग्ध सिग्नल इंटरसेप्ट हुए जिससे कोवर्ट-गतिविधियों का अंदेशा हुआ.

ये सिग्नल इंटरसेप्ट, बांग्लादेशी, उर्दू और अरबी भाषा में थे और रात एक बजे से लेकर तीन बजे तक सुने गए. इसके बाद से ही देश के खुफिया-तंत्र के कान खड़े हुए हैं. दरअसल, हैम रेडियो ऑपरेटर्स, एमेचुअर रेडियो स्टेशन होते हैं जो टू-वे कम्युनिकेशन पर आधारित होते हैं. इसके लिए सरकार से परमिशन की जरूरत भी होती है. 

चिकन नेक के पास संवेदनशील इलाके में बांग्लादेश ने दी आईएसआई को पहुंच

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में पाकिस्तान पैठ बना रहा है. पाकिस्तानी सेना के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बांग्लादेश का दौरा किया था. इस प्रतिनिधिमंडल में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी, आईएसआई का भी एक अधिकारी शामिल था. इन पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत के संवदेशनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन-नेक) से सटे बांग्लादेश के रंगपुर इलाके का दौरा किया था. उसी दौरान पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने भारत और म्यांमार के ट्राई-जंक्शन पर चटगांव (चटोग्राम) और कॉक्स-बाजार का भी दौरा किया था.

चटगांव दौरे पर इसलिए संदेह है क्योंकि यहां पर म्यांमार से भागकर आए रोहिंग्या मुस्लिमों के कैंप हैं. आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) के पूर्व अधिकारियों की मदद से बांग्लादेश ने तीन अलग-अलग जिलों में रोहिंग्या ट्रेनिंग कैंप लगाए हैं. इन कैंप में रोहिंग्याओं को हथियारों और गुरिल्ला वारफेयर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. खबर है कि इन कैंप में कम से कम 50 रोहिंग्या मुसलमानों को मिलिट्री ट्रेनिंग दी जा रही है. साथ ही बांग्लादेश के दो कट्टरपंथी संगठनों के करीब 75 सदस्य भी यहां ट्रेनिंग ले रहे हैं. बांग्लादेश का जमात ए इस्लामी और हिज्ब उत तहरीर इन कैंपों को फंडिंग कर रहे हैं.

टेररिस्ट स्टेट के पीछे बांग्लादेश, चीन को भी दिया भारत विरोधी ऑफर 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मोहम्मद यूनुस चीनी सरकार को चिकन नेक के करीब बांग्लादेश में इकोनॉमिक बेस स्थापित करने की बात करते दिखे. मोहम्मद यूनुस ने कहा, “भारत के सात राज्य, भारत का पूर्वी भाग, जिन्हें सात बहनें (सेवेन सिस्टर) कहा जाता है, वो भूमि से घिरे राज्य हैं, उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. हम (बांग्लादेश) इस पूरे क्षेत्र के लिए महासागर (हिंद महासागर)के एकमात्र संरक्षक हैं. इसलिए यह एक बड़ी संभावना को खोलता है. इस वजह से यहां चीनी अर्थव्यवस्था का विस्तार हो सकता है. वो यहां आकर चीजें बनाएं, उनका उत्पादन करें, उन्हें बेचें, चीन ले जाएं और उन्हें पूरी दुनिया को पहुंचाए.”

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