मोदी सरकार द्वारा लाए गए वक्फ बिल को लेकर संसद में घमासान जारी है. बुधवार को देर रात तक गहन चर्चा करने के बाद लोक सभा से बिल को पास कर दिया गया. राज्यसभा में पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है. वक्फ के नाम पर देश में अंधाधुंध संपत्तियों का अधिग्रहण और बेचना, भ्रष्टाचार, घोटालों और मनमानियों के साथ ही मौजूदा वक्फ कानून, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है.
देश की सुरक्षा के संभावित खतरों को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और गृह मंत्री अमित शाह ने भी लोक सभा में नए संशोधित बिल पर बोलते हुए जानकारी साझा की.
संसद और सीजीओ कॉम्प्लेक्स तक पर वक्फ ने ठोका दावा
दरअसल, जिस जगह देश की संसद है और जहां से नए संशोधित बिल को पास करने की प्रक्रिया जारी है, उस संसद को ही वक्फ जमीन बताई गई है. पिछले कई दशक से कोर्ट में संसद की जमीन को लेकर केस चल रहा है.
इसके अलावा, राजधानी दिल्ली के जिस सीजीओ कॉम्प्लेक्स में सीबीआई, एनआईए, सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे सुरक्षाबलों और जांच एजेंसियों के महत्वपूर्ण मुख्यालय हैं, उसे भी वक्फ की जमीन कहकर दावा किया जा रहा है.
नए संशोधन बिल से देश की सुरक्षा को बड़ी ‘उम्मीद’
अगर संसद से मोदी सरकार का नया वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2024 पास हो जाता है तो उसे उम्मीद (यूएमईईडी) यानी यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफेसियंसी एंड डेवलपमेंट एक्ट के नाम से जाना जाएगा.
बेट-द्वारका मामले ने नींद से जगाया सरकार को
कुछ महीने पहले गुजरात के बेट-द्वारका (द्वीप) का मामला जब कोर्ट में पहुंचा तो हर कोई हैरान रह गया. महाभारत कालीन जिस बेट-द्वारका को भगवान श्रीकृष्ण से जोड़ कर देखा जाता है, उस पर स्थानीय वक्फ बोर्ड ने अपनी जमीन होने का दावा कर दिया. अदालत भी वक्फ बोर्ड की मनमानी पर हैरान रह गई. क्योंकि वक्फ बोर्ड के फैसले को अदालतों में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है.
खास बात ये है कि पाकिस्तान से सटी समुद्री सीमा के बेहद करीब बेट-द्वारका, कोस्टगार्ड और भारतीय नौसेना के ऑपरेशन्स के लिए एक संवेदनशील क्षेत्र है.
वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को नहीं कर सकते कोर्ट में चैलेंज: अमित शाह
संसद में खुद गृह मंत्री ने कहा कि मौजूदा वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को देश की किसी भी अदालत में चैलेंज नहीं किया जा सकता है. ऐसे में ये कानून, प्राकृतिक न्याय प्रणाली का उल्लंघन है.
दरअसल, अभी के कानून के मुताबिक, वक्फ बोर्ड अगर किसी भी जमीन को अपना बता देता है तो उसके फैसले के खिलाफ वक्फ के ट्रिब्यूनल में ही अपील की जा सकती है. इस ट्रिब्यूनल में भी मुस्लिम धर्म के मानने वाले सदस्य ही होते हैं. ऐसे में क्या वाकई न्याय हो सकता है, हमेशा संशय बना रहता है. नए कानून में गैर-मुस्लिम भी राज्य और केंद्र के वक्फ बोर्ड के सदस्य बन सकते हैं. (https://x.com/SupriyaShrinate/status/1907472699569397879)
लुटियंस दिल्ली की 143 संपत्तियों को रातो-रात वक्फ के नाम किया गया
अमित शाह ने वर्ष 2013 में यानी 2014 के आम चुनाव से पहले लुटियंस दिल्ली की 143 संपत्तियों को वक्फ के नाम करने का भी गंभीर आरोप लगाया. लुटियंस दिल्ली, देश की राजधानी का वो इलाका है जहां केंद्र सरकार के दफ्तर हैं और जहां से देश को संचालित किया जाता है. साथ ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित कैबिनेट मंत्रियों और टॉप ब्यूरोक्रेट्स के सरकारी आवास हैं. (https://x.com/AmitShahOffice/status/1907422800056623197)
विपक्षी कांग्रेस पार्टी, जिसके कार्यकाल में वर्ष 2013 में इन संपत्तियों को वक्फ के हवाले कर दिया गया था, अमित शाह की दलीलों पर एतराज जताया है. कांग्रेस का दावा है कि ये संभी संपत्तियां, मस्जिद और दरगाहों से जुड़ी थी जिन पर अंग्रेजों के काल से विवाद था. कोर्ट तक मामला गया था और कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन (यूपीए) सरकार को मामले के समाधान का आदेश दिया गया था.
धर्म से नहीं जमीन के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़ा है वक्फ: मोदी सरकार
मोदी सरकार का मत है कि नए वक्फ कानून को (मुस्लिम) धर्म से जोड़ने कर नहीं देखना चाहिए. ये महज जमीन के प्रबंधन से जुड़ा मामला है जिसमें गरीब और शोषित मुस्लिमों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं को निश्चित तौर से फायदा होगा.
ऐसे में वक्फ एक धार्मिक संस्थान के बजाए एक प्रशासनिक निकाय है जिस पर स्थानीय प्रशासन से लेकर राज्य और केंद्र सरकार सहित न्यायालयों का भी अधिकार है.
वक्फ बोर्ड के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल बनाया जाएगा, जिससे बेहतर पहचान, निगरानी और प्रबंधन सुनिश्चित होगा.
सरकार का मानना है कि ऑडिटिंग और अकाउंटिंग उपायों से कुप्रबंधन को रोका जा सकेगा और सुनिश्चित किया जाएगा कि वक्फ के फंड का इस्तेमाल केवल कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.
अखिलेश यादव ने उठाया चीन द्वारा कब्जाई जमीन का मुद्दा
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सासंद अखिलेश यादव ने नए वक्फ बिल पर मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि वक्फ की जमीन पर कब्जा करने के बजाए चीन द्वारा कब्जाई हुई जमीन को छुड़वाने के लिए सरकार को कोशिश करनी चाहिए.
1962 के युद्ध में भारत को हराने के बाद चीन ने अक्साई चिन (42 हजार वर्ग किलोमीटर) पर कब्जा कर लिया था. साथ ही 1963 में पाकिस्तान ने भी गिलगित-बालटिस्तान की शक्सगम वैली को चीन को हस्तांतरण कर दी थी.
वक्फ बोर्ड के अधीन 39 लाख एकड़ जमीन: गृह मंत्री
गृह मंत्री अमित शाह ने संसद को बताया कि इस वक्त देश के अलग-अलग वक्फ बोर्ड के कब्जे में करीब 39 लाख एकड़ जमीन है. इसमें से करीब 21 लाख एकड़ पिछले 10 सालों में जोड़ी गई है. क्योंकि 2013 तक वक्फ के अधीन महज 18 लाख एकड़ जमीन थी. अमित शाह ने वक्फ बोर्ड द्वारा बेहद कम इंकम टैक्स देने का मामला भी सदन में उठाया.