अमेरिका से चल रहे टैरिफ विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दोनों देशों के संबंधों को लेकर करीब 55 मिनट तक वार्ता की. चीन के तियानजिन में चल रहे एससीओ समिट के इतर, मोदी और शी के बीच हुई बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि ड्रैगन और हाथी को एक दूसरे को खतरा समझने के बजाए एक साथ आना चाहिए. लेकिन मोदी ने साफ कर दिया कि ये संबंध आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर ही आगे बढ़ सकते हैं.
चीन के राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी सहित पूरा एक प्रतिनिधिमंडल मौजूद था. शी जिनपिंग के साथ चीनी विदेश मंत्री वांग यी सहित दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.
डिसइंगेजमेंट समझौते के बाद एलएसी पर शांति
इस दौरान पीएम मोदी ने एससीओ समिट आयोजित करने और निमंत्रण देने के लिए चीन को बधाई देने के साथ ही आभार भी प्रकट किया. पीएम मोदी ने कहा कि पूर्वी लद्दाख पर दोनों देशों की सेनाओं के डिसइंगेजमेंट के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता का माहौल बना हुआ है. दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों (डोवल और वांग यी) के बीच बॉर्डर मैनेजमेंट के बारे में सहमति बनी है. पीएम मोदी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा और दोनों देशों के बीच सीधी फ्लाइट फिर से शुरू करने का भी जिक्र किया. (https://x.com/narendramodi/status/1962012857748570565)
पीएम मोदी दो दिवसीय शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इनदिनों चीन के तियानजिन शहर गए हुए हैं (31 अगस्त-1 सितंबर). वर्ष 2018 के बाद मोदी की चीन की ये पहली यात्रा है. इससे पहले पिछले वर्ष रूस के कजान में भी एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भी मोदी और शी की मुलाकात हुई थी. उस दौरान ही दोनों देशों ने एलएसी से अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाने का फैसला किया था और डिसएंगेजमेंट एग्रीमेंट किया था. खास बात ये है कि रविवार को शी जिनपिंग से वार्ता के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर मौजूद नहीं थे.
मोदी ने कहा कि दोनों देशों के सहयोग से 2.8 बिलियन लोगों के हित जुड़े हुए हैं. इससे पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा.
भारत और चीन दुश्मन नहीं पार्टनर: शी जिनपिंग
वार्ता के दौरान बोलते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक दूसरे के दुश्मन नहीं बल्कि पार्टनर्स हैं. ऐसे में दोनों देशों को एक दूसरे को खतरा समझने के बजाय विकास की संभावनाएं ढूंढने की जरूरत है.
शी ने भारत और चीन की प्राचीन सभ्यता को याद दिलाने के साथ ही दो सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश और ग्लोबल साउथ के अहम सदस्य बताते हुए दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए ऐतिहासिक जिम्मेदारी उठाने की बात कही. चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों को विकासशील देशों को भी आगे बढ़ाना है ताकि समाज को विकास के रास्ते पर ले जाया जा सके. शी ने अच्छे पड़ोसियों की तरह एक दूसरे की सफलता में सहयोगी बनने पर जोर दिया. (https://x.com/globaltimesnews/status/1962063730558320887)
मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिया न्योता
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने अगले वर्ष (2026) भारत में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग को आने का न्योता भी दिया.