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चीन सीमा पर भारतीय सेना का युद्ध-कौशल, ड्रोन बटालियन ने दी तैयारियों को धार

पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भले ही एससीओ समिट से इतर तियानजिन में मुलाकात कर दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं लेकिन एलएसी पर भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों में कोई कमी नहीं की है. यही वजह है कि एलएसी से सटे अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना की गजराज कोर ने ड्रोन से जुड़ी एक बड़ी एक्सरसाइज की है. 

युद्ध-कौशल 3.0 नाम की इस एक्सरसाइज में भारतीय सेना ने बड़े पैमाने पर बहु-डोमेन वातावरण में काम करने की क्षमता को रेखांकित किया, जिसमें ड्रोन निगरानी, वास्तविक समय लक्ष्य अधिग्रहण, सटीक हमले, वायु-स्पेस में प्रभुत्व और समन्वित युद्धक्षेत्र मैनुवर शामिल हैं.

अरूणाचल प्रदेश के कामेंग इलाके में युद्धाभ्यास

भारतीय सेना ने चीन सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश के कामेंग क्षेत्र में पूर्वी हिमालय की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और चरम मौसम की स्थिति में एक्सरसाइज को आयोजित की. इस अभ्यास में जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), गजराज कोर की उपस्थिति में सैनिकों द्वारा उन्नत प्रौद्योगिकी, संचालन नवाचार और पेशेवर उत्कृष्टता का उल्लेखनीय समन्वय प्रदर्शित किया गया. सेना की गजराज कोर का मुख्यालय असम के तेजपुर में है और अरुणाचल प्रदेश से सटी एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के एक बड़े हिस्से की रक्षा की जिम्मेदारी है. 

सेना ने खड़ी की असनी प्लाटून

युद्धाभ्यास के दौरान सेना की ‘असनी’ प्लाटून का परिचालन एक प्रमुख आकर्षण था. हाल ही में सेना की ये नई असनी प्लाटून को खड़ा किया गया है. असनी प्लाटून अपने युद्ध-कौशल के जरिए दिखाया कि कैसे अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी और युद्ध-कठोर रणनीति एक निर्णायक ‘एज’ लाभ प्रदान कर सकती है. 

रविवार को हुई मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात

रविवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति से तियानजिन में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की है. इस दौरान दोनों देशों ने पिछले साल पूर्वी लद्दाख में हुए डिसएंगेजमेंट करार के बाद सेएलएसी पर शांति और स्थिरता को लेकर संतोष जताया. इस दौरान पीएम मोदी ने परस्पर विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता की बात की तो शी जिनपिंग ने दोनों देशों को एक दूसरे को दुश्मन समझने के बजाए पार्टनर के तौर पर देखने पर जोर दिया. (हाथी और Dragon साथ-साथ, मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात)

चीन पर विश्वास करने में लगेगा वक्त

पीएम मोदी की चीन यात्रा और हाथी और ड्रैगन के एक साथ आने पर सामरिक जानकार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. क्योंकि जब-जब भारत ने चीन की तरफ दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया है, तब-तब चीन ने एलएसी पर घुसपैठ और विवाद खड़ा किया है. वर्ष 2017 में डोकलाम और 2020 में गलवान घाटी की झड़प को भारत भूल नहीं पाया है. करीब चार साल तक चले विवाद के बाद अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने डिसएंगेजमेंट करार किया था और अपनी-अपनी सेना को पीछे हटा लिया था. इस दौरान कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीधे फ्लाइट तक बंद कर दी गई थी. 

एलएसी पर शांति और स्थिरता के बाद अब कैलाश मानसरोवर यात्रा भी शुरू हो गई है और सीधे फ्लाइट भी. लेकिन भारतीय सेना ने साफ तौर से ऐलान किया है जब तक चीन की पीएलए आर्मी पर पूरा विश्वास नहीं हो जाता, सैन्य तैयारियां जारी रहेंगी. 

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