By Nalini Tewari
“यू कैन रन बन यू कान्ट हाइड”, 10 नवंबर को शाम 6 बजकर 10 मिनट पर ये लिखा था जम्मू-कश्मीर पुलिस ने. और थोड़ी देर बाद ही दिल्ली में फरीदाबाद आतंकी डॉक्टर के मॉड्यूल से जुड़े उस डॉक्टर उमर नबी की गाड़ी में धमाका होता है, जो जम्मू-कश्मीर पुलिस से भाग रहा था.
ऐसे में माना जा रहा है कि लाल किले के पास हुआ धमाका कोई प्लांटेड बम धमाका नहीं था. हड़बड़ी या फिर गलती से हुआ धमाका था. ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़ा डॉक्टर उमर नबी जबरदस्त दबाव में था.
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोमवार को धमाके से कुछ ही घंटे पहले फरीदाबाद में हरियाणा पुलिस की मदद से 2900 किलो विस्फोटक, असॉल्ट राइफल्स और बड़े आतंकी डॉक्टर्स मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था.
ऐसे में धमाके से जुड़े ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब तलाश रही है एजेंसियां
- क्या जम्मू-कश्मीर पुलिस के डर से भाग रहा था उमर?
टाइमिंग पर गौर किया जाए तो जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद में रेड की तो सोमवार सुबह पुलवामा का रहने वाला डॉक्टर उमर नबी जम्मू-कश्मीर पुलिस से बचने के लिए फरीदाबाद से आई 20 गाड़ी में भारी विस्फोटक लेकर फरार हो गया था. दोपहर में लालकिले के पास उसने गाड़ी पार्क कर दी. 3 घंटे तक वहीं छिपा रहा.
- 3 घंटे तक पार्किंग में खड़ी रही आई 20 गाड़ी, क्या अगले निर्देश का इंतजार कर रहा था उमर?
सोमवार यानी 10 नवंबर को दोपहर 3 बजकर 19 मिनट पर उमर ने गाड़ी खड़ी कर दी. आशंका इस बात की है कि हो सकता है कि वो अपने कमांडर या आका के अगले निर्देश का इंतजार कर रहा हो. जो उमर को ये बताता कि आगे क्या करना है.
- क्या घातक विस्फोटक को किसी और को सप्लाई किया जाना था?
आशंका इस बात की भी है कि गाड़ी में रखे गए विस्फोटक को छिपाए जाने की साजिश हो और जब एजेंसियों की जांच थोड़ी धीमी पड़े तो एक बार फिर से स्लीपर सेल की मदद से विस्फोटक के जरिए आईईडी बनाकर भारत के शहरों को दहलाया जाए.
- क्या उमर विस्फोटक छिपाने में नाकाम रहा या कमांडर से नहीं मिला निर्देश?
लाल किले की पार्किंग में 3 घंटे तक गाड़ी खड़ी रही लेकिन वहां तब तक कोई हलचल नहीं देखी गई. आशंका इस बात की भी है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया आईईडी पूरी तरह विकसित नहीं था. डॉक्टर उमर लालकिले के आसपास छिपा रहा और इंतजार करता रहा. लेकिन कड़ी सिक्योरिटी के चलते उस तक मदद नहीं पहुंचाई जा सकी.
- क्या जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बनाया उमर पर दबाव?
शाम तकरीबन 6 बजकर 20 मिनट पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “यू कैन रन बन यू कान्ट हाइड”. माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस डॉक्टर उमर पर पैनी नजर बनाए हुए थी और इसी कारण उमर हड़बड़ा गया और इस एक्स पोस्ट के तकरीबन 15-20 मिनट बाद लालकिले से उसने गाड़ी निकाल ली और भागने की कोशिश करने लगा.
- क्या गलती से हड़बड़ाहट में हुआ विस्फोट?
डॉक्टर उमर जानता था कि उसके बाकी साथी पकड़े जा चुके हैं और लगातार जम्मू-कश्मीर पुलिस उसे ट्रेस कर रही है. प्राथमिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि इसी बढ़ते दबाव के कारण आरोपी ने गड़बड़ी में बम को सक्रिय कर दिया, जिससे कारण गलती से बम फट गया. चूंकि गाड़ी में भारी मात्रा में विस्फोटक थे, जिसके चपेट में कई गाड़ियां आ गईं.
- आत्मघाती हमले का पैटर्न नहीं, किसी टारगेट से नहीं टकराई गाड़ी
आत्मघाती हमले में आरोपी अपनी कार को किसी टारगेट से टकराते हैं. लेकिन विस्फोटकों से भरी आई 20 गाड़ी को न ही किसी इमारत, ना बैरिकेड या ना ही किसी भीड़भाड़ वाले इलाके ले जाने की कोशिश की गई. बल्कि रेडलाइट पर जब गाड़ी स्लो थी, तब धमाका हुआ. ऐसे में एजेंसियों को ऐसा लग रहा है कि ये धमाका हड़बड़ाहट में गलती से हुआ हो सकता है.
- क्या फरीदाबाद में तैयार हो रहे थे फिदायीन, 26/11 जैसा हमला करने की थी प्लानिंग?
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जिस भी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है, चाहे वो लेडी डॉक्टर शाहीन शाहिद हो या आदिल अहमद और डॉक्टर मुजम्मिल. हर किसी के पास से एके 47, एके 56 और असॉल्ट राइफल, पिस्तौल मिली है. यानि सभी ने हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रखी थी. साथ ही फरीदाबाद के एक गांव से 2900 किलो विस्फोटक, डेटोनेटर्स, बम बनाने का सामान मिला है, जिससे ये आशंका पुख्ता हो रही है.
बम बनाकर सभी आतंकी अलग-अलग ठिकानों पर बड़ा हमला करने वाले थे. जैसा कि मुंबई में साल 2008 में अटैक किया गया था. लेकिन एजेंसियों की सतर्कता के चलते उमर को छोड़कर सभी डॉक्टर्स धर लिए गए. नहीं तो जैश से जुड़े ये सफेदपोश आतंकी फिदायीन के तरह सैकड़ों लोगों की जान लेने की कोशिश करते.

