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अपने मियां मिठ्ठू ट्रंप, जंगी जहाज को दिया अपना नाम

अपनी मियां मिठ्ठू बने रहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नाम से बेहद घातक युद्धपोत बनाने का ऐलान किया है. ट्रंप-क्लास बैटलशिप को अमेरिका का अब तक के सबसे बड़ा और 100 गुना ज्यादा पावरफुल जंगी जहाज बताया जा रहा है, जो दुनिया में किसी देश की नौसेना के जंगी बेड़े में नहीं है.

अपने नाम के जहाज की घोषणा के दौरान, ट्रंप के साथ अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और विदेश सचिव (मंत्री) मार्को रूबियो भी मौजूद थे. ट्रंप ने इस क्लास के दो जहाज बनाने का ऐलान किया है, जो सबसे बड़े और घातक के साथ-साथ “बहुमुखी और दुनिया में सबसे गुड लुकिंग होंगे.” इस ऐलान के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति के ऑफिस, व्हाइट हाउस ने इन जहाज की पेंटिंग भी जारी की. (https://x.com/WhiteHouse/status/2003241513430712331?s=20)

ट्रंप ने इसका ऐलान करते हुए कहा कि ये जहाज अमेरिका की नौसेना को और भी मजबूत बनाएंगे और देश की रक्षा क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान देंगे. ट्रंप ने यह भी कहा कि ये जहाज पूरी तरह से अमेरिका में निर्मित होंगे और इनमें अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ये जहाज न केवल अमेरिका के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच होंगे. ट्रंप ने यह घोषणा अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में की, जहां उन्होंने कहा कि ये जहाज अमेरिका की नौसेना को एक नए स्तर पर ले जाएंगे. (https://x.com/WhiteHouse/status/2003460945331278225?s=20)

अमेरिकी राष्ट्रपतियों के नाम पर हैं यूएस नेवी के जंगी जहाज

अमेरिका में राष्ट्रपति, अपने देश की सेनाओं का कमांडिंग इन चीफ भी होता है. लंबे समय से अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपतियों के नाम पर जंगी जहाज के नाम रखने की प्रथा रही है. यही वजह है कि पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन से लेकर अब्राहम लिंकन और ट्रूमैन से लेकर जॉर्ज बुश तक के नाम पर अमेरिकी जंगी जहाज के नाम हैं. लेकिन ये है कि किसी राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल में अपने नाम पर जंगी जहाज के क्लास का नाम अपने नाम पर कर दिया है.

यूएस नेवी के सेक्रेटरी जॉन सी पेहलन के मुताबिक, ट्रंप क्लास जहाज का नाम यूएसएस डेफयेंट (हिंदी अर्थ निडर) होगा.

चीन से पिछड़ गई है अमेरिकी नौसेना

दरअसल, यूएस नेवी के पास आज 300 जंगी जहाज है तो चीन की नौसेना के युद्धपोतों की संख्या 350 पार कर चुकी है. बस इसी से अमेरिका के कान खड़े हो गए हैं और अब इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन को काउंटर करने के लिए अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने में जुट गया है.

चीन की पनडुब्बियां का बेड़ा भी आज अमेरिका की बराबर आ गया है. कुछ सामरिक जानकारों का मानना है कि चीन के पास आज अमेरिका से ज्यादा पनडुब्बियां हैं. अमेरिका के पास आज 70 पनडुब्बियां हैं, जिनमें से 11 न्यूक्लियर सबमरीन हैं. चीन के पास भी 70-80 पनडुब्बियां की फ्लीट है लेकिन उसमें महज 03 ही परमाणु पनडुब्बियां है.

अमेरिका के पास आज 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं जबकि चीन के पास कुल तीन ही विमानवाहक युद्धपोत हैं. लेकिन अमेरिका को इस बात का खतरा सता रहा है कि चीन हर साल 10-15 जंगी जहाजों का निर्माण कर अपनी नौसेना में शामिल कर रहा है. ऐसे में अगले कुछ सालों में ही चीन के समुद्री बेड़े में 400 से भी ज्यादा जंगी जहाज हो जाएंगे. लेकिन ये रफ्तार अमेरिका में थोड़ी धीमी है. बस इसी से अमेरिका सकते में है. क्योंकि अमेरिका के इंटीग्रेटेड लॉन्ग प्लान के तहत वर्ष 2045 तक यूएस नेवी में 350 युद्धपोत ही हो पाएंगे.

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