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भारत-चीन संबंधों में अमेरिका का अड़ंगा, बीजिंग ने Pentagon रिपोर्ट की खारिज

चीन ने पेंटागन की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिसमें एलएसी को लेकर भारत के साथ संबंधों में अड़ंगा डालने की कोशिश की गई थी. चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वो भारत-चीन के सुधरते संबंधों को बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं. 

चीनी प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि भारत के साथ सीमा विवाद सिर्फ दोनों देशों का मामला है, किसी भी अन्य देश को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं है.

नई दिल्ली-बीजिंग में सुधर रहे रिश्ते, अमेरिका दरार डालने की कोशिश में: चीनी विदेश मंत्रालय

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “चीन भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और लंबे समय के दृष्टिकोण से देखता है. भारत के साथ उसके संबंध सुधर रहे हैं, लेकिन अमेरिका ऐसा नहीं चाहता. इसलिए उसकी रक्षा नीति को गलत ढंग से पेश कर रहा है. सीमा विवाद भारत-चीन का है, किसी और देश को इसमें बोलने का कोई अधिकार नहीं है.”

लिन जियान ने कहा, कि “चीन भारत के साथ संबंधों को ‘रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य’से देखता है. हम संबंधित देशों द्वारा इस पर किसी भी अनावश्यक टिप्पणी का विरोध करते हैं.”

चीन के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि पेंटागन की रिपोर्ट चीन की रक्षा नीति को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है और भारत समेत अन्य देशों के साथ उसके संबंधों में दरार डालने की कोशिश करती है. यह रिपोर्ट चीन की सैन्य नीतियों को गलत ढंग से पेश करती है. अमेरिका बार-बार ऐसी रिपोर्ट जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करता है और टकराव की राजनीति को बढ़ावा देता है.

अमेरिका ने भारत-चीन में दरार डालने के लिए अपनी रिपोर्ट में क्या कहा?

अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को चीन की मिलिट्री क्षमताओं पर सौंपी सालाना रिपोर्ट में अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर (युद्ध विभाग) ने कहा कि “भारत-चीन के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है. दोनों के बीच अरुणाचल प्रदेश बड़ा मुद्दा है. अरुणाचल प्रदेश, चीन के लिए हमेशा कोर इंटरेस्ट बना रहेगा, जहां भारत के साथ सीमा विवाद है.”

पेंटागन रिपोर्ट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम नरेंद्र मोदी की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात का हवाला दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, “इस बैठक से पहले एलएसी पर तनाव कम करने को लेकर सहमति बनी थी और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की शुरुआत हुई.”

वहीं पेंटागन ने पाकिस्तान को लेकर कहा कि “चीन ने पिछले पांच सालों में पाकिस्तान को 36 जे-10C लड़ाकू विमान और चार फ्रिगेट जहाज दिए. इसके अलावा दोनों देश मिलकर JF-17 फाइटर जेट बना रहे हैं.”

इंडो पैसिफिक देशों को भड़काने का काम करता रहा है अमेरिका, चीन भड़का

चीन ने अमेरिका से कहा है कि “वह झूठे आरोप लगाना बंद करे और टकराव की बजाय सहयोग का रास्ता अपनाए. क्योंकि इस तरह की रिपोर्टें क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए नुकसानदेह हैं.”

चीन का आरोप है कि “इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों को भड़काने का काम अमेरिका करता आया है. भारत के चीन के साथ संबंध सुधारने के बाद, अब अमेरिका ने फिलीपींस जैसे देशों को चीन के खिलाफ उकसाना शुरु कर दिया है. अमेरिका ने भी फिलीपींस, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर एक नया क्वाड बनाकर खड़ा कर लिया है. अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने ही भारत के साथ मिलकर क्वाड संगठन खड़ा किया था. लेकिन भारत के चीन के साथ संबंध सुधारने के चलते अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन और अब डोनाल्ड ट्रंप ने क्वाड की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए भारत आने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है. जबकि, क्वाड मीटिंग इस वर्ष भारत में होनी थी.”

चीन संग संबंधों को लेकर सतर्क है भारत

ये बात सच है कि चीन ने भारत के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की जरूर कोशिश की है, लेकिन अरुणाचल प्रदेश को लेकर अपने दावे करने बंद नहीं किए हैं. कभी अरुणाचल प्रदेश को अपने नक्शे में दिखाना और कभी चीनी नाम देना जारी है. यही वजह है कि चीन के साथ सीमा पर संबंधों को सामान्य बनाने में भारत भी बेहद सतर्क है. पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी के विवादित इलाकों से भारतीय सैनिक पीछे जरूर हट गए हैं, लेकिन सैनिकों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है. 

लेकिन ये बात भी सही है कि पिछले साल से भारत-चीन के संबंधों में सुधार हुआ है. मानसरोवर यात्रा शुरु हुई है, भारत-चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट शुरु हुई है. एससीओ बैठक में संबंधों के सुधार और गर्मजोशी को उस वक्त पूरी दुनिया ने देखा था जब पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच जियानतिन में मुलाकात हुई थी. उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि हमने भारत को चीन के हाथों खो दिया है.

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