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ग्रीनलैंड की ओर बढ़ा अमेरिका, यूरोप में सैन्य गतिविधियां

क्या सच में सिर्फ 20 दिनों में ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेगा अमेरिका. क्या वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि पेंटागन की ओर से पूरी तैयारी का सिग्नल है.?

वेनेजुएला के एक्शन के बाद से पिछले 02 दिनों से यूरोप में अमेरिकी मिलिट्री की गतिविधियां जबरदस्त तरीके से बढ़ गई हैं. जिसके बाद यूरोपीय देशों ने अपने एजेंसियों और सेना को सक्रिय कर दिया है.

ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड, चीन और रूसी गतिविधियां तेज हैं, इसलिए अमेरिका के कंट्रोल में आना चाहिए. 

ट्रंप के बयान के बाद डेनमार्क और यूरोप की धड़कनें बढ़ी हुई हैं, वहीं ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की, तो यह नाटो गठबंधन के अंत की शुरुआत होगी. 

वहीं डेनमार्क को फ्रांस, ब्रिटेन का साथ मिला है. फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा है कि सीमाओं को ताकत के बल पर नहीं बदला जा सकता.

यूरोप की ओर रवाना हो रहे सी 17ए एयरक्राफ्ट

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस के मुताबिक, अमेरिका के सी-17ए एयरक्राफ्ट अमेरिका से लगातार यूरोप की तरफ रवाना हो रहे हैं. इनमें से एक एयरक्राफ्ट ने अमेरिका के फोर्ट कैंपबेल (केंटुकी) से उड़ान भरी, जो स्पेशल ऑपरेशन्स एविएशन रेजीमेंट का बेस है. 

इस एयरक्राफ्ट ने जर्मनी के रेमस्टेन बेस पर लैंडिंग की. इसके अलावा अमेरिका के टोही विमान पी-8 और केसी-स्ट्रेटोटैंकर (रिफ्यूलिंग) के लिए भी अमेरिका और यूरोप के बीच लगातार उड़ान भर रहे हैं. 

अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ने पर यूरोप में भी हलचल तेज हो गई है. हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि ये तैयारी, वेनेजुएला के एक ऑयल टैंकर को पकड़ने के लिए किया जा रहा है जो रूस की सुरक्षा में है. ये टैंकर अटलांटिक महासागर में है.

लेकिन ये बात भी सही है कि ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर 20 दिनों में कब्जे की बात कही है, जिसे लेकर डेनमार्क ने नाटो खत्म करने की धमकी दे डाली है.

ग्रीनलैंड को वेनेजुएला समझने की गलती न करे अमेरिका: पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन 

ग्रीनलैंड पर अधिकार रखने वाले डेनमार्क की महिला प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की. 

पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा, “ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का दबाव किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने बार-बार यह बात कही है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति जब ग्रीनलैंड की बात करते हैं, तो उन्हें गंभीरता से लेना होगा, लेकिन यूरोप पूरी तरह से इस बात के साथ है कि सीमाओं का सम्मान किया जाना चाहिए.”

ग्रीनलैंड पर कब्जे की कोशिश, यानि नाटो का अंत: पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन 

ट्रंप के बयान के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड में आशंकाएं बढ़ी हुई हैं.क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो का हिस्सा भी है. ऐसे में डेनिश पीएम ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि “अगर अमेरिका किसी दूसरे नाटो देश पर सैन्य हमला करता है, तो सब कुछ रुक जाएगा. इसमें नाटो और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से बनी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था भी शामिल है.”

वहीं ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स फ्रेडरिक नील्सन ने भी कहा है कि “ग्रीनलैंड की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती. अमेरिका रातोंरात ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं कर सकता.”

फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी का क्या है अमेरिकी दावे पर रुख

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के बयान के बाद कई यूरोपीय नेताओं ने डेनमार्क का समर्थन किया है. फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि “सीमाएं ताकत के बल पर नहीं बदली जा सकतीं.”

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि “ग्रीनलैंड का भविष्य डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों को ही तय करना है.”

जर्मनी के विदेश मंत्री ने कहा कि “ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और इसलिए वह नाटो की सामूहिक सुरक्षा के दायरे में आता है.”

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