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ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र, कुल 70 बहादुर सैनिकों को वीरता मेडल

अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन के जरिए अंतरिक्ष में जाकर असाधारण शौर्य दिखाकर हिंदुस्तान का नाम रोशन करने वाले प्रसिद्ध एस्ट्रोनॉट और भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को शांति काल में देश के सबसे बड़े वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र दिए जाने की घोषणा की गई है.

18 दिन तक आईएसएस पर रहकर शुभांशु शुक्ला ने कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए. 

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुभांशु शुक्ला सहित कुल 70 बहादुर सैनिकों को वीरता पुरस्कार दिए जाने की मंजूरी दी है, जिनमें छह मरणोपरांत शामिल हैं. 

77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने  एक (01) अशोक चक्र, तीन (03) कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (एक मरणोपरांत सहित), एक बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना पदक (वीरता) (पांच मरणोपरांत सहित), छह (06) नौ सेना पदक (वीरता) और दो (02) वायु सेना पदक (वीरता) शामिल हैं.

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ स्पेस मिशन जाने के लिए रिजर्व में रखे गए वायुसेना के दूसरे अधिकारी (एस्ट्रोनॉट), ग्रुप कैप्टन प्रशांथ नायर को देश के दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार, कीर्ति चक्र दिए जाने का ऐलान किया गया है.

दो (02) महिला सैनिकों (नौसैनिकों) को शांति काल के तीसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार, शौर्य चक्र दिए जाने की घोषणा भी राष्ट्रपति ने की है. भारतीय नौसेना की दो (02) जाबांज महिला अधिकारियों को ये पुरस्कार दिए जा रहा है. ये दोनों हैं, लेफ्टिनेंट कमांडर डिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा अलागिरीसामी. पिछले वर्ष इन दोनों महिला अधिकारियों ने एक बोट के जरिए समंदर में 25 हजार नॉटिकल मील यानी लगभग पूरी पृथ्वी का चक्कर अकेले काटकर इतिहास कायम किया था.

अन्य कीर्ति चक्र पाने वाले वीर सैनिक

1. मेजर अरशदीप सिंह (1 असम राइफल्स)—

14 मई 2025 को भारत-म्यांमार सीमा पर एक विशेष गश्ती दल का नेतृत्व करते हुए अचानक हुए हमले में उन्होंने घने जंगल के बीच ऊँचाई पर मौजूद दुश्मन ठिकाने पर साहसिक हमला किया। भारी गोलीबारी के बावजूद उन्होंने कई सशस्त्र उग्रवादियों को निष्क्रिय किया और अपनी टुकड़ी को सुरक्षित रखा.

2. नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा (पैरा स्पेशल फोर्सेज)–

11 अप्रैल 2025 को किश्तवाड़ के जंगलों में आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान उन्होंने भारी फायर के बीच आगे बढ़ते हुए एक विदेशी आतंकवादी को नज़दीक से मार गिराया और दूसरे को भी निष्क्रिय किया। उनका साहस और धैर्य असाधारण रहा.

अन्य शौर्य चक्र

लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार (पैरा स्पेशल फोर्सेज)

11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत-म्यांमार सीमा पर सटीक अभियान की योजना बनाकर स्वयं नेतृत्व किया, जिसमें एक मजबूत उग्रवादी शिविर नष्ट किया गया और 9 आतंकवादी मारे गए.

2. मेजर अंशुल बलटू (32 असम राइफल्स)

29 अप्रैल 2025 को असम के दीमा हसाओ जिले में मुठभेड़ के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत साहस दिखाते हुए एक उग्रवादी को ढेर किया, जिससे कुल तीन आतंकवादी मारे गए.

3. मेजर शिवकांत यादव (पैरा स्पेशल फोर्सेज)

12–13 मई 2025 की रात शोपियां में कठिन परिस्थितियों में आतंकवादियों का पीछा करते हुए एक खतरनाक आतंकवादी को नज़दीकी मुकाबले में मार गिराया.

4. मेजर विवेक (42 राष्ट्रीय राइफल्स)

15 मई 2025 को पुलवामा में तलाशी अभियान के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक ‘ए+ श्रेणी’ के आतंकवादी को मार गिराया.

5. मेजर लैशांगथेम दीपक सिंह (पैरा स्पेशल फोर्सेज)

अपहृत नागरिकों को छुड़ाने के उच्च जोखिम वाले अभियान में उन्होंने साहस दिखाते हुए आतंकवादियों को नज़दीक से निष्क्रिय किया और एक निर्दोष नागरिक को सुरक्षित बचाया.

6. कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर (पैरा स्पेशल फोर्सेस)

21 जुलाई 2025 को उधमपुर के बसंतगढ़ क्षेत्र में घात लगाकर किए गए अभियान में एक कुख्यात जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी को मार गिराया.

7. सूबेदार पी.एच. मोसेस (1 असम राइफल्स)

14 मई 2025 को भारी गोलीबारी के बीच रेंगते हुए बेहतर मोर्चा संभाला और कई आतंकवादियों को निष्क्रिय किया.

8. लांस दफादार बलदेव चंद (42 राष्ट्रीय राइफल्स) – मरणोपरांत

19 सितंबर 2025 को किश्तवाड़ में आतंकवादियों से आमने-सामने की लड़ाई में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अंत तक लड़ते रहे और सर्वोच्च बलिदान दिया.

9. राइफलमैन मंगलेम सांग वैफेई (3 असम राइफल्स)

9 जून 2025 को मणिपुर में घुसपैठ-रोधी अभियान के दौरान तीन सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराकर अपनी टुकड़ी को सुरक्षित रखा.

10. राइफलमैन धुर्बा ज्योति दत्ता (33 असम राइफल्स)

19 सितंबर 2025 को बाढ़ राहत से लौटते समय हुए हमले में घायल होने के बावजूद वाहन को खतरे से बाहर निकालकर आठ साथियों की जान बचाई.

11. एक सीआरपीएफ के अधिकारी

राष्ट्रपति ने 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल और 7 युद्ध सेवा मेडल प्रदान करने की भी स्वीकृति दी है. इसके अलावा, सेना मेडल (विशिष्ट) पर 2 बार, 43 सेना मेडल (विशिष्ट) और 85 विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किए गए हैं.

साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर, ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफ़ाज़त, ऑपरेशन ऑर्किड, ऑपरेशन मेघदूत सहित विभिन्न अभियानों, बचाव कार्यों और हताहत निकासी अभियानों में उत्कृष्ट योगदान के लिए 81 मेंशन-इन-डिस्पैच भी दिए गए हैं.

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