By Nalini Tewari
अमेरिका-ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस महीने अमेरिका की यात्रा करने वाले हैं. अगले सप्ताह दोनों अमेरिका के दौरे पर रहेंगें. लेकिन इस दौरे का लक्ष्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत या फिर राउंड टेबल मीटिंग से नहीं है.
पेजेश्कियान और अराघची संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबी का हिस्सा बनने के लिए अमेरिका जा रहे हैं, अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया है.
अगर ईरानी राष्ट्रपति और अब्बास अराघची इस बैठक में शामिल होने के लिए जाते हैं, तो ये अमेरिका के साथ हुए युद्ध के बाद पहला मौका होगा और यूएनजीए की बैठक में अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप से भी आमना-सामना होगा.
अमेरिका ने दिया ईरानी डेलिगेशन को वीजा
ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची समेत कई उच्च अधिकारियों को यूएनजीए की बैठक में शामिल होने के लिए वीजा दे दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान के मुख्य डेलिगेशन और अन्य जरूरी कर्मचारियों को वीजा देने की मंजूरी दे दी गई है. हालांकि विदेश मंत्रालय ने ये गुप्त रखा कि किन लोगों को वीजा दिया गया है.
लेकिन कहा जा रहा है कि ईरान के जिस डेलिगेशन को वीजा जारी करने की मंजूरी दी गई है, उसमें ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची का नाम भी शामिल है.
इन दिनों अमेरिका-ईरान के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी और हमले किए जा रहे हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब-हूती विद्रोहियों के बीच नया मोर्चा खुल चुका है. हूती विद्रोहियों को ईरान को पूरा सपोर्ट है, तो सऊदी अरब अलग-थलग पड़ा दिख रहा है. माना जा रहा है कि यूएनजीए में सैन्य तनावों को कम करने की कूटनीतिक कोशिशें होंगी.
यूएनजीए से इतर ट्रंप-पेजेश्कियान में डायरेक्ट बातचीत?
ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री अराघची, यूएन के मंच से अपनी बात दुनिया के सामने रखेंगे. माना जा रहा है कि दोनों प्रेसिडेंट ट्रंप से भी मुलाकात कर सकते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ये दावा कर रहे हैं कि ईरान बातचीत करना चाहता है, वो शर्तों को मानने के लिए तैयार है. अमेरिकी प्रशासन का ईरान को वीजा देना इसी की पहल माना जा रहा है.
दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए पर्दे के पीछे लगातार कूटनीतिक कोशिशें चल रही हैं. राष्ट्रपति ट्रंप भी कह रहे हैं कि युद्ध खत्म होने वाला है और ईरान ने समझौते की इच्छा जताते हुए अमेरिका से संपर्क साधा है. हालांकि ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि वो अमेरिका के सामने नहीं झुकेगा, और अपनी शर्तों के मुताबिक है आगे बढ़ेगा.
हालांकि दोनों देशों के बीच दो बार पहले भी बातचीत हुई है, और उसी के तहत सीजफायर पर सहमति बनी थी, लेकिन सीजफायर ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाया. अगर ट्रंप और पेजेश्कियान बातचीत करते हैं तो होर्मुज की खाड़ी पर अधिकार सबसे पेंचीदा मुद्दा होगा.


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