By Nalini Tewari
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. ये दो टूक बयान विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के 100 प्रतिशत वाले टैरिफ की धमकी पर दिया है.
ब्रिक्स की अपार सफलता और भारत-रूस-चीन-ईरान की करीबी से अमेरिका ऐसा बिदका है कि 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी संसद में एक बिल पास किया गया है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीद करने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही गई है.
लेकिन विदेश मंत्रालय ने अपना बयान जारी करके भारत सरकार का रुख सामने रख दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा, “140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों से किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाएगा.”
अमेरिका 100 प्रतिशत वाला दांव, भारत का कड़ा बयान
भारत और अमेरिका के बीच संबंध पूरी तरह से पटरी पर नहीं हैं, रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका भारत पर बार-बार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. सिर्फ भारत ही नहीं चीन के खिलाफ भी अमेरिका आर्थिक एक्शन लेने की तैयारी कर रहा है. इसी के तहत अमेरिकी संसद ने एक संशोधन बिल पास किया जिसमें रूस से तेल और गैस खरीद करने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान है.
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस बिल के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए आगे की रणनीति बता दी है कि भारत झुकेगा नहीं. विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “भारत ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अधिनियम पारित किए जाने का संज्ञान लिया है.”
“भारत के 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों से किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाएगा. भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.”
“हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग स्रोतों से खरीद जारी रखेगा. भारत का फैसला बदलते अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के आधार पर होगा. ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले बदलते मार्केट हालात को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे.”
भारत अपने हित की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा: विदेश मंत्रालय
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि “वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी.”
मंत्रालय ने कहा, “हाल के महीनों में अमेरिका के अलग-अलग अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर बातचीत हुई है. भारत ने बताया है कि इसके असर न सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर भी पड़ सकते हैं.”
आपको बता दें कि अमेरिका चाहता है कि भारत-रूस के बीच तेल व्यापार न हो और भारत रूस की जगह अमेरिका से तेल खरीदे. अमेरिका आरोप लगाता रहा है कि भारत-चीन दोनों रूस से तेल खरीदकर आर्थिक फायदा पहुंचा रहे हैं और यूक्रेन के साथ युद्ध में मदद कर रहे हैं. लेकिन भारत ऐसे आरोपों को खारिज कर चुका है, भारत पहले भी कई बार कह चुका है कि जहां से सस्ता तेल मिलेगा, भारत खरीदेगा.
अमेरिका के बिल पर एक नजर
अमेरिकी कांग्रेस ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध बढ़ाने वाला कानून पास किया है. इस कानून के तहत अमेरिकी प्रशासन उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकता है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं. अगस्त में सीनेट से मंज़ूरी मिलने के बाद, अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 16 सितंबर को यह बिल पास किया है.
भारत की ओर से कहा गया है कि वो सारे घटनाक्रम पर नजर रख रहा है.

