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होर्मुज नहीं ट्रंप स्ट्रेट, युद्धविराम से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के हसीन सपने

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़बोलापन एक बार फिर दुनिया के सामने हैं. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जहां स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित होने से दुनिया परेशान है, वहीं ट्रंप ने इस मार्ग को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ बता डाला है. सऊदी अरब के कारोबारियों से फ्लोरिडा में मुलाकात के दौरान ट्रंप ने मिडिल ईस्ट के इस प्रमुख मार्ग को स्ट्रेट ऑफ ट्रंप से संबोधित किया. जैसे ही ये खबर आग की तरह ईरान में पहुंची बड़ी प्रदर्शन शुरु हो गया. स्थानीय लोगों ने अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

ट्रंप अक्सर ऐसी बातें बोलकर सुर्खियां बटोरते हैं फिर यूटर्न लेकर अपने बयान पर सफाई देने लगते हैं. ट्रंप के लिए ये कोई नई बात नहीं हैं और इसी कारण ट्रंप को कोई गंभीरता से नहीं लेता है. इससे पहले भी ट्रंप ने अपने ओवल दफ्तर में कनाडा, ग्रीनलैंड को अपने देश के मैप में दिखा चुके हैं.

बहरहाल एक्सपर्ट मान रहे हैं कि 28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर अटैक किया था, तो शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि ईरान का पलटवार आक्रामक होगा और वो एक महीने तक युद्ध में टिक जाएगा.

होर्मुज का नाम बदलना चाहते हैं ट्रंप, एक बयान से हलचल बढ़ी

ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. इस बार उन्होंने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कह दिया है. फ्लोरिडा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा “उन्हें स्ट्रेट ऑफ ट्रंप खोलना होगा… मेरा मतलब होर्मुज है. माफ कीजिए, यह एक गलती थी, लेकिन फेक न्यूज इसे दुर्घटना बताएगी, मेरे साथ कोई दुर्घटना नहीं होती.”

ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सख्त चेतावनी भी दी है, कहा कि “अगर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को नहीं खोला गया, तो अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा. हालांकि ट्रंप ने एक बार फिर से ईरान के लिए डेडलाइन बढ़ा दी है. ट्रंप ने कहा, अगर ईरान नहीं माना तो नक्शे से मिटा दिया जाएगा.”

खार्ग द्वीप के पास इकट्ठा हुए हजारों लोग, दिखाई एकजुटता

ट्रंप का बयान आते ही होर्मुज के करीब खार्ग द्वीप ईरानी लोगों को पहुंचना शुरु हो गया. सभी लोगों ने मानव श्रृंखला बनाते हुए एकजुटता दिखाई और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी. ईरानी लोगों ने एक दूसरे का हाथ थाम रखा था और अमेरिका को संदेश दिया कि अगर अमेरिका स्ट्रेट ऑफ ट्रंप का सपना देख रहा है, तो वो सिर्फ एक सपना है. ईरानी लोगों अपनी संप्रभुता के लिए जान देने के लिए तैयार हैं.

खार्ग द्वीप पर बढ़ते अमेरिकी खतरे को देखते हुए ईरानी सेना ने भी तैयारी शुरु कर दी है. ईरान खार्ग क्षेत्र में अमेरिकी कदमों को लेकर गंभीर है और किसी भी संभावित संघर्ष को लेकर तैयार है. ईरान के जमीनी टुकड़ी के कमांडर ने कहा है कि जमीनी युद्ध दुश्मन के लिए बेहद खतरनाक और महंगा साबित होगा. 

बताया जा रहा है कि अमेरिका के खार्ग में ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारियों के बीच ईरान में तमाम स्थानों पर युवकों की भर्तियां चल रही हैं. ईरान की बसीज, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) और सेना द्वारा संचालित केंद्रों पर युवकों की भारी भीड़ देखी गई है. ईरान अमेरिका के साथ संभावित ज़मीनी युद्ध के लिए दस लाख से अधिक जमीनी लड़ाकों को जुटा रहा है.

आईआरजीसी ने कहा है कि “अगर अमेरिकी कमांडो यहां आए तो ताबूत में जाएंगे.”

बातचीत के लिए गिड़गिड़ा रहा ईरान, हमें तेल के शिपमेंट भेज रहा: ट्रंप

एक ओर से अमेरिका ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी कर रही है, वहीं युद्धविराम और शांति की भी कोशिशें जारी हैं. ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान को लेकर कहा, “ईरान इस समय भारी दबाव में है और समझौता करने के लिए तैयार है. वे समझौते के लिए बेताब हैं.” ट्रंप ने दावा किया है कि “ईरान ने तेल के कई शिपमेंट भेजे हैं और दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है.”

 ट्रंप ने कहा कि “वह अभी भी कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं और उम्मीद है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे. लेकिन ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना जरूरी शर्त है, ताकि तेल आपूर्ति सामान्य हो सके.”

मैं एक महान शांतिदूत, मुझे नोबल नहीं तो किसी को नहीं मिलेगा: ट्रंप

मिडिल ईस्ट को युद्ध में झोंकने वाले ट्रंप ने खुद को शांतिदूत बताया है. ट्रंप ने कहा कि “अगर उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला तो फिर यह किसी को भी नहीं मिलेगा.” ट्रंप ने कहा है कि “वह चाहते हैं कि इतिहास में उनकी पहचान एक महान शांति दूत के रूप में बने, क्योंकि उन्होंने कई युद्धों तो रुकवाया है.”

ईरान पर अटैक पर सफाई देते हुए ट्रंप ने इस कार्रवाई को एक सैन्य ऑपरेशन बताया. बोले, “पिछले कई दशकों से वह पश्चिम एशिया में अस्थिरता का कारण रहा है, लेकिन अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद उसकी स्थिति कमजोर हुई है. अगर अमेरिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो ईरान जल्द ही परमाणु हथियार हासिल कर सकता था.”

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