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ट्रंप पर भड़के फ्रांसीसी राष्ट्रपति, ईरान के बाद NATO देश भी दे रहे गम

By Nalini Tewari

मिडिल ईस्ट में चल रहे गंभीर युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मरखरेपन से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भड़क गए हैं. फ्रेंच प्रेसिडेंट ने ट्रंप को गंभीर होने की सलाह दे डाली है.

ईरान के साथ युद्ध के दौरान ट्रंप ये सोचकर चल रहे थे कि फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली जैसे यूरोप के बड़े देश खुलकर अमेरिका के साथ खड़े हो जाएंगे. हुआ उल्टा, फ्रांस ने तो अमेरिकी सेना के लड़ाकू विमान को एयरस्पेस तक नहीं दिया. इसी बात से नाराज ट्रंप, प्रेसकॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति मैक्रों पर निजी हमला करने लगे और दुनिया के सामने मजाक उड़ाने लगे.   

ट्रंप ने एक निजी समारोह में मैक्रों पर तंज कसते हुए कहा, कि मैक्रों की पत्नी उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करती हैं. इसी बात से भड़के मैक्रों ने ट्रंप पर पलटवार करते हुए कहा है कि ट्रंप जो बोल रहे हैं, वो शब्द किसी राष्ट्रपति को शोभा नहीं देते.

ट्रंप की बातें निचले स्तर की हैं, इतना बोलना ठीक नहीं:  मैक्रों

ट्रंप के निजी आक्षेप पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने चुप्पी तोड़ी है. इमैनुएल मैक्रों ने कहा, “ट्रंप के शब्द बिल्कुल भी अच्छे नहीं थे. वे किसी राष्ट्रपति को शोभा नहीं देते.”

मैक्रों ने ये भी कहा, “ट्रंप बहुत ज़्यादा बोलते हैं… उनकी बातें न तो शालीन हैं और न ही किसी स्तर की. आपको गंभीर होना होगा. जब आप गंभीर होना चाहते हैं, तो आप हर रोज़ उस बात के ठीक उलटा नहीं कहते, जो आपने एक दिन पहले कही थी और शायद आपको हर रोज बोलना भी नहीं चाहिए.”

मैक्रों की निजी जिंदगी पर टिप्पणी करते रहते हैं ट्रंप

ट्रंप का मानना है कि फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों को होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के खिलाफ सामने आना चाहिए. ट्रंप ने इसके लिए नाटो देशों से मदद मांगी थी. लेकिन फ्रांस का साथ न मिलने से ट्रंप इस कदर नाराज हैं कि मैक्रों की निजी जिंदगी पर टिप्पणी करने लगे हैं. ट्रंप ने कहा, “मैंने फ्रांस में मैक्रों को फोन किया, जिनकी पत्नी उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती हैं और जो अभी भी अपने जबड़े पर लगी चोट से उबर रहे हैं.”

ट्रंप के बयान के पीछे साल 2025 का वो वायरल वीडियो है, जिसमें मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट विमान में उतरने से पहले उनके चेहरे पर हाथ मारती नजर आई थीं.

आपको बता दें कि ब्रिगिट मैक्रों अपने पति से लगभग 25 साल बड़ी हैं. इसके अलावा उनकी पत्नी के जेंडर का मुद्दा भी संवेदनशील रहा है, जिसमें दावा किया जाता रहा है कि मैक्रों की पत्नी ब्रिगिट असल में पुरुष हैं. हालांकि पिछले साल ही ब्रिगिट ने कुछ पत्रकारों पर मानहानि का तगड़ा मुकदमा ठोंका था.

इससे पहले भी दावोस में जब मैक्रों नीले चश्मे के साथ स्टेज पर दिखे थे तो ट्रंप ने मजाक बनाया था. कि आखिर उनकी आंखों पर ऐसा क्या हुआ था कि कमरे के अंदर भी मैक्रों को सनग्लासेज पहनना पड़ा.

वहीं कुछ महीने पहले ट्रंप ने एक मैक्रों के साथ की गई एक पर्सनल चैट भी लीक की थी. ट्रंप ने चैट दिखाते हुए कहा था कि कैसे फ्रांस के राष्ट्रपति उनके सामने गिड़गिड़ा रहे थे और प्लीज़-प्लीज़ कह रहे थे.

उस वक्त भी मैक्रों ने ट्रंप पर पलटवार करते हुए उन्हें बुली बताया था.

इन कारणों से मैक्रों के पीछे पड़े हैं ट्रंप

फ्रांस अमेरिका का एक मित्र देश हैं. दोनों शक्तिशाली देश हैं और सहयोगी भी. लेकिन ट्रंप और मैक्रों के बीच कुछ खास नहीं पटती. वजह ये है कि ट्रंप की हर बात को मैक्रों मानने के लिए तैयार नहीं होते और समय-समय पर अपना विरोध दर्ज करा देते हैं. यही कारण है कि ट्रंप किसी भी वक्त मैक्रों को नीचा दिखाने का मौका नहीं छोड़ते.

उदाहरण के तौर पर ट्रंप चाहते थे कि ईरान युद्ध में फ्रांस साथ दे, लेकिन मैक्रों ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से बात करने के बाद अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ संयुक्त बयान में संवाद पर जोर दिया. अप्रत्यक्ष तौर पर अमेरिका के साथ आने से मना कर दिया. इतना ही नहीं इसी सप्ताह इजरायल में सैन्य हथियार ले जा रहे एक अमेरिकी विमान को फ्रांस ने एयरस्पेस देने से मना कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने कहा था कि वो इस बात को ध्यान रखेंगे कि फ्रांस ने सहयोग नहीं किया था.

इसके अलावा ग्रीनलैंड पर अमेरिका अपना कब्जा करना चाहता है. लेकिन यूरोप में मैक्रों एक ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. मैक्रों ने नाटो को एकजुट होकर ग्रीनलैंड की सुरक्षा करने को कहा. साथ ही फ्रेंच सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजकर ट्रंप से डायरेक्ट दुश्मनी मोल ले ली.

गाजा बोर्ड भी तनाव की वजह है. ट्रंप ने मैक्रों को बोर्ड सदस्य बनने का न्योता भेजा था. लेकिन मैक्रों ने बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने से मना कर दिया. फ्रांस को लगता है कि इस बोर्ड का काम सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं है. इसके अधिकार बहुत ज्यादा और अस्पष्ट हैं. यूएन चार्टर के अनुरूप नहीं हैं, इसी वजह से फ्रांस ने बोर्ड में शामिल होने से मना कर दिया है.

ट्रंप की नाराजगी की एक और बड़ी वजह फ्रांस का फिलिस्तीन को मान्यता देना भी है. साल 2025 सितंबर में फ्रांस ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता देने का फैसला किया और संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इसे औपचारिक रूप से घोषित भी कर दिया. जिसे ट्रंप की मिडिल ईस्ट नीति के खिलाफ माना गया. 

पिछले साल जब ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बने तो व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान भी मैक्रों ने मीडिया के सामने ट्रंप की बोलती बंद कर दी थी. ट्रंप अपनी वाहवाही में कह रहे थे कि अमेरिकी ने यूक्रेन युद्ध में ये मदद दी, ये हथियार देने का वादा किया तो मैक्रों ने ट्रंप को टोकते हुए कह दिया कि आप (अमेरिका) वादा कर रहे हैं और यूरोप तो यूक्रेन को सैन्य मदद पहुंचा रहा है.

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