रूस ने होर्मुज की खाड़ी को बताया है ईरान का असली परमाणु हथियार. मॉस्को ने अमेरिका पर तंज कसते हुए ईरान को युद्ध में बढ़त की तारीफ की है. रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और देश के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के एक बयान ने हलचल बढ़ा दी है. दिमित्री ने कहा, ईरान पहले ही अपनी सबसे बड़ी ताकत का ‘परीक्षण’ कर चुका है.
रूस ने अमेरिका-ईरान के बीच हुए युद्धविराम पर शक जताया है. दिमित्री ने कहा है कि इस सीजफायर का भविष्य साफ नहीं है. सीजफायर कैसे हुआ ये स्पष्ट नहीं है.
ईरान को ताकत दिखाने के लिए पारंपरिक न्यूक्लियर बम नहीं चाहिए: दिमित्री
रूसी वरिष्ठ नेता मेदवेदेव ने कहा है कि “ईरान को अपनी ताकत दिखाने के लिए किसी पारंपरिक परमाणु बम की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके पास होर्मुज के रूप में एक ऐसा ‘परमाणु हथियार’ है जिसका परीक्षण वह पहले ही कर चुका है.”
सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा दिमित्री ने कहा, “लोग ईरान के यूरेनियम संवर्धन और मिसाइलों पर नजर रख रहे हैं, लेकिन असली खतरा समुद्री रास्ते होर्मुज में छिपा है. अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर देता है, तो इसका असर किसी परमाणु विस्फोट से कम नहीं होगा.”
होर्मुज ने हराया, ट्रंप को झुकाया
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है. ऐसे में इस क्षेत्र पर नियंत्रण का सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
ईरान ने होर्मुज को हथियार की तरह से इस्तेमाल किया. अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान के प्रमुख संस्थानों को निशाना बनाया तो ईरान ने होर्मुज मार्ग ठप कर दिया. जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई, जिसका असर पूरी दुनिया में दिखने लगा. वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली. ईरान ने यहां अपनी नाकेबंदी लगा दी है और दुश्मन देशों के जहाजों पर हमला शुरु कर दिया. आईआरजीसी ने तो यहां तक कह दिया कि वो अमेरिका और इजरायल को एक लीटर तेल भी आगे नहीं ले जाने देंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज खोलने को लेकर यूरोप के देशों से मदद मांगी. लेकिन ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली समेत नाटो देशों ने अमेरिका के साथ युद्ध में कूदने से मना कर दिया.
ट्रंप ने तमाम कोशिशें कीं, खर्ग द्वीप पर अटैक की धमकी दी. ईरान को सभ्यता खत्म करने की चेतावनी दी. ग्राउंड एक्शन के लिए कमांडो को उतारने की बात कही, लेकिन ईरान किसी भी दबाव में नहीं आया. अंत में ट्रंप को ईरान की शर्तें मानने पर मजबूर होना पड़ा.
संयुक्त राष्ट्र में चीन-रूस ने किया अमेरिका का खेल, ईरान का दिया साथ
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन की तरफ से ईरान के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें सैन्य हस्तक्षेप करके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की मांग की गई थी. हालांकि रूस और चीन ने इस पर वीटो कर दिया. 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव पर 11 वोट पक्ष में, जबकि 2 (रूस और चीन) वोट विरोध में पड़े, वहीं पाकिस्तान और कोलंबिया ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि प्रस्ताव ‘मूल रूप से गलत और खतरनाक’ है क्योंकि उसमें ईरान पर किए गए अमेरिका और इजरायल के ‘अवैध हमलों’ का जिक्र तक नहीं था. तो चीन के राजदूत फू कोंग ने कहा कि प्रस्ताव ‘संघर्ष की जड़ों और पूरी तस्वीर’ को संतुलित तरीके से नहीं दर्शाता.
रूस और चीन के प्रतिनिधियों ने यूएन में ये संदेश दिया कि अगर ईरान पर हमले जारी रहे तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पूरी तरह बिगड़ जाएगा.

