पाकिस्तान का जैसा वजीर ए आजम वैसा है सिपाहसलार. अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम से पहले प्रस्ताव में लेबनान का नाम लेकर जिस तरह से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रायता फैलाया था, ठीक वैसे ही बातचीत के ऐसे नाजुक मोड़ पर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को कैंसर कहकर ऐसी किरकिरी करवा दी है.
पाकिस्तान ने इजराइल को कैंसर कहा है, जिसके बाद इजराइल ने उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.
फटकार के बाद ख्वाजा आसिफ द्वारा विवादित पोस्ट हटाना इस बात का संकेत है कि अमेरिका नहीं चाहता कि शहबाज के जोकर्स के कारण इजरायल भड़के और युद्धविराम पर असर पड़े.
इजरायल को कैंसर बताया, नेतन्याहू की धमकी से डरे ख्वाजा को डिलीट करनी पड़ी पोस्ट
पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम में मध्यस्थता कर रहा है, जिसके लिए अहम बातचीत 11 अप्रैल यानि शनिवार को होनी है. ऐसे संवेदनशील मौके पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इजरायल को बुरा और मानवता के लिए अभिशाप बता डाला और यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने का आह्वान किया.
ख्वाजा आसिफ ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “निर्दोष नागरिकों को इजरायल द्वारा मारा जा रहा है, पहले गाजा में, फिर ईरान में और अब लेबनान में, नरसंहार लगातार जारी है, मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीनी भूमि पर इस कैंसर जैसे राज्य की स्थापना की, वे नरक में जलें.”
रक्षा मंत्री के इस पोस्ट के बाद फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पसीने छूट गए. जब तक वो लोग कुछ कर पाते ख्वाजा आसिफ की पोस्ट को लाखों लोगों तक पहुंच गई.
हालांकि थोड़ी देर बाद इजरायल को कैंसर बताने वाली पोस्ट ख्वाजा आसिफ को डिलीट करनी पड़ी. लेकिन ख्वाजा आसिफ ने जो कुछ कहा उस पर इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से प्रतिक्रिया भी आ गई.
इजरायल को पाकिस्तान पर संदेह, कहा, बर्दाश्त नहीं करेंगे
इजरायल ने ख्वाजा आसिफ के आपत्तिजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा की है और अमेरिका ईरान के बीच “निष्पक्ष मध्यस्थ” के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा इजरायल के खिलाफ विनाश का आह्वान करना बेहद आपत्तिजनक है. यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी तरह से बर्दाश्त किया जा सके, खासकर उस सरकार से जो शांति के लिए निष्पक्ष मध्यस्थ होने का दावा करती है.”
यहूदियों से छुटकारा जैसी बातों को गंभीरता से लेता है इजरायल: गिदोन सार
इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी ख्वाजा आसिफ के बयान को आपत्तिजनक बताया और इस कहा, “शांति मध्यस्थता का दावा करने वाली सरकार की ओर से ये खुलेआम यहूदी-विरोधी रक्तपात के आरोप हैं, ऐसा बयान देना ठीक नहीं है.”
विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा, ” इजरायल इन खुलेआम यहूदी-विरोधी खून के आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है, जो एक ऐसी सरकार की तरफ से हैं जो शांति में बीच-बचाव का दावा करती है. यहूदी देश को कैंसर वाला कहना असल में उसे खत्म करने की मांग करना है. इजरायल उन आतंकवादियों से अपना बचाव करेगा जो उसे खत्म करने की कसम खाते हैं.”

