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पाकिस्तान का डबल गेम, सऊदी अरब में तैनात की आर्मी

ईरान के खिलाफ पाकिस्तान का डबल गेम का खुलासा हुआ है. क्या शांति वार्ता की आड़ में इस्लामाबाद ने अमेरिका और सऊदी अरब को तैयारी का मौका दिया, ताकि ईरान को घेरा जा सके. क्या पाकिस्तान मध्यस्थता की आड़ में ईरान को दे रहा था धोखा. ये सवाल इसलिए क्योंकि जिस वक्त शांति वार्ता चल रही थी, उसी वक्त पाकिस्तानी सैनिकों ने सऊदी अरब में संभाल लिया मोर्चा.

पाकिस्तानी सैन्य बलों को सऊदी अरब में तैनात किया गया है. पाकिस्तान ने करीब 13,000 सैनिक और 10 से 18 लड़ाकू विमान सऊदी अरब भेजे हैं. सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि लड़ाकू और सहायक विमान समेत पाकिस्तानी आर्मी के जवान किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पहुंचे हैं.

मध्यस्थता फेल होने के बाद मिडिल ईस्ट एक बार फिर धधकने को तैयार है. यही कारण है कि सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिक अपने बेड़े के साथ पहुंचे हैं.

पाकिस्तानी सैनिकों से क्षेत्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी मजबूती: सऊदी अरब

पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान-सऊदी अरब के बीच एक सैन्य संधि हुई थी, जिसके मुताबिक एक देश पर अटैक दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी जंग के दौरान सऊदी अरब पर भी हमले किए थे, यानि सऊदी अरब पर जो ईरान ने हमला किया है, पाकिस्तान वो खुद पर हमला मान कर चल रहा है.

अब ये दोगलापन और डबल गेम नहीं तो क्या, एक ओर तो पाकिस्तान, ईरान को बेहद करीबी मित्र बताता है, तो वहीं उसके खिलाफ सऊदी अरब में सैनिकों को तैनाती कर दी. अब एक तरफ पाकिस्तान खुद को मध्यस्थता करके शांतिदूत जैसा पेश कर रहा है और वहीं दूसरी तरफ सऊदी में सेना की तैनाती कर दी, जिसके बाद पाकिस्तान की नीयत साफ नहीं लग रही.

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि “इस तैनाती का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय बढ़ाना और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करना है.”

ईरान ने किए थे सऊदी अरब पर हमले, अमेरिकी सैन्य बेस था टारगेट

40 दिन के युद्ध में अमेरिका के खिलाफ ईरान ने सऊदी अरब को भी टारगेट किया था. सऊदी अरब स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को ईरान ने भारी नुकसान पहुंचाया है,

सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य बेस, मुख्य रूप से प्रिंस सुलतान एयरबेस (रियाद के दक्षिण में), ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच ईरानी मिसाइल हमलों का शिकार हुए हैं. इन हमलों में कई अमेरिकी सैनिक हताहत हुए और बेस को भारी नुकसान हुआ, जिससे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल गया है

पाकिस्तान में क्या खिचड़ी पक रही, सऊदी,तुर्किए, मिस्र के विदेश मंत्री पहुंचे

अमेरिका-ईरान की बातचीत से पहले पिछले सप्ताह पाकिस्तान में मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों का जमावड़ा रहा. पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार के निमंत्रण पर सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद,  तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान और मिस्त्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती इस्लामाबाद पहुंचे थे. सभी ने क्षेत्रीय स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा की थी.

आपको बता दें कि पाकिस्तान में हुई ईरान-अमेरिका की शांति वार्ता के पीछे मिस्र, सऊदी अरब, चीन और कतर का भी अहम हाथ रहा है. बताया जा रहा है कि इन सभी देशों के अधिकारी पाकिस्तान में मौजूद रहे और परोक्ष रूप से इन वार्ताओं में मध्यस्थ की भूमिका निभाई.

हालांकि ये वार्ता फेल रही, लेकिन सवाल है कि क्या मुस्लिम देशों के साथ मिलकर पाकिस्तान कुछ अलग खिचड़ी पका रहा है. अमेरिका की चरण वंदना करने वाला पाकिस्तान, क्या अपने सबसे करीबी मित्र ईरान को धोखा देने की तैयारी कर रहा है.

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