ईरान के साथ जारी तनाव के बीच पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) का एक सीक्रेट ईमेल लीक हुआ है, जो नाटो से संबंधित है. ईरान युद्ध में ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी जैसे देशों का साथ न मिलने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘देख लेने’ जैसी धमकी तो दे ही रखी है, वहीं लीक ईमेल में पेंटागन ने स्पेन को नाटो से बाहर निकाल देने की मांग की है.
ईरान जंग में स्पेन ने अमेरिका का खुलकर विरोध किया था. यही कारण है कि पेंटागन चाहता है कि स्पेन को नाटो देशों की सूची ने बाहर कर दिया जाए.
ईरान के समर्थन में बोलता है स्पेन: पेंटागन
ईरान के साथ जंग के दौरान स्पेन ने अमेरिका के लिए अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया था. पेंटागन का कहना है कि ईरान के साथ जारी जंग में स्पेन ने साथ नहीं दिया, उल्टा अमेरिका के विरोध और ईरान के समर्थन में बयानबाजी करता रहा. इस कारण से स्पेन को नाटो में नहीं रखना चाहिए.
हालांकि ब्रिटेन-फ्रांस जैसे देशों ने भी ईरान और होर्मुज तनाव पर अमेरिका से अलग रुख अपनाया था. लेकिन स्पेन मुख्य टारगेट बन गया है. स्पेन की सरकार ने अमेरिकी सेना को ईरान पर हमले के लिए अपने बेस या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था. अमेरिका के पास स्पेन में रोटा नेवल स्टेशन और मोरोन एयर बेस जैसे दो अहम ठिकाने हैं.
अमेरिका इस बात से गुस्सा है कि नाटो के सहयोगी देशों ने ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को एक्सेस, बेसिंग और ओवरफ्लाइट (एबीओ) की अनुमति नहीं दी. जब नाटो का कोई सदस्य देश युद्ध में शामिल होता है तो नाटो के अन्य देश उस देश को अपने देश में घुसने, मिलिट्री ऑपरेशन के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करने और अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाजत देते हैं. लेकिन ईरान से युद्ध में नाटो ने ऐसा नहीं किया.
ईमेल में कहा गया है कि स्पेन को सस्पेंड करने का असर सैन्य से ज्यादा प्रतीकात्मक होगा, जिससे अमेरिका की खिलाफत करने वाले दूसरे देशों को कड़ा संदेश जाए.
होर्मुज की खाड़ी में मदद न मिलने पर ट्रंप नाटो पर आगबबूला
ट्रंप चाहते थे होर्मुज खुलवाने के लिए यूरोप की मदद मिले, लेकिन ब्रिटेन, फ्रांस समेत सभी नाटो देशों ने पल्ला झाड़ लिया. ट्रंप की उस वक्त और बेइज्जती हुई जब उनकी घोषणा के बाद ब्रिटेन ने कह दिया कि उनका देश होर्मुज में कोई भी युद्धपोत नहीं भेजेगा.
ट्रंप ने कई बार नाटो को धमकाया, मदद मांगी, कागजी शेर कहा लेकिन नाटो एकजुट रहा. ट्रंप ने फ्रांस और ब्रिटेन को भी दो टूक कहा, कि अमेरिका इस बात को कभी नहीं भूलेगा कि यूरोप से मदद नहीं मिली.
ट्रंप ने नाटो से अमेरिका को अलग करने का भी मन बना लिया है. लेकिन उससे पहले स्पेन को लेकर लीक हुए ईमेल को लेकर तनातनी बढ़ती दिख रही है.
स्पेन ने ऐसा कहा क्या था, जिसके कारण नाटो से निकालने की सिफारिश
दरअसल स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों का विरोध किया था. 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद कहा था कि “उनकी सरकार जंग के खिलाफ है. हमारे सिद्धांत और मूल्य स्पष्ट हैं, हम युद्ध के खिलाफ हैं.”
स्पेन के प्रधानमंत्री ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को एकतरफा कदम बताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ाने वाला बताया था. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में सांचेज ने कहा कि “ऐसी कार्रवाई वैश्विक व्यवस्था को और अस्थिर तथा टकरावपूर्ण बना सकती है.
हालांकि उन्होंने ईरान सरकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड की गतिविधियों को भी अस्वीकार्य बताया था. स्पेन ने सभी पक्षों से तुरंत तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह सम्मान करने की मांग की थी. कहा था, “ मौजूदा संकट का समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत और शांतिपूर्ण रास्ते से ही संभव है.”
पेंटागन के ईमेल में ब्रिटेन की टेंशन बढ़ाने वाला नोट
ईरान के खिलाफ मदद न मिलने पर ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर को डरपोक बताया था. क्योंकि ब्रिटेन ने शुरू में हमले के लिए अपने दो बेस इस्तेमाल करने से मना कर दिया था.
अब पेंटागन के नोट में ब्रिटेन को लेकर भी एक चौंकाने वाला सुझाव है. पेंटागन ने कहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन के फॉकलैंड आइलैंड्स पर अपने डिप्लोमैटिक सपोर्ट की दोबारा समीक्षा करे. इन द्वीपों पर ब्रिटेन का कब्जा है लेकिन अर्जेंटीना भी इन पर दावा करता है.
अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, ट्रंप के अच्छे दोस्त माने जाते हैं. साल 1982 में इन द्वीपों के लिए ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच भीषण युद्ध हुआ था, जिसमें 650 अर्जेंटीना और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे.
अमेरिका ने तैयार कि अच्छे-बुरे सहयोगियों की लिस्ट
ईरान जंग के बाद अमेरिका ने नाटो के अंदर अच्छे और बुरे देशों की एक सूची जारी की है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक जो देश नाटो के लिए रक्षा खर्च बढ़ाते हैं और अमेरिका का साथ देते हैं, उन्हें आदर्श सहयोगी माना जाएगा.
अमेरिका ने अच्छे देशों की सूची में पोलैंड, जर्मनी और बाल्टिक देशों (एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया), चेक रिपब्लिक और अल्बानिया को शामिल किया है. हालांकि, पोलैंड का इस लिस्ट के बाद कहना है कि हमें इस बात का भरोसा नहीं है, कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर हमारा साथ देगा. आपको बता दें कि पोलैंड ने खुद को रूस से खतरा बताया है.

