ईरान के साथ तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की राजधानी बीजिंग में मौजूद हैं. लेकिन ट्रंप के चीन पहुंचने और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के पहले चीन ने वॉशिंगटन की जमकर निंदा की है. चीन ने ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर कटघरे में खड़ा किया है, और जिनपिंग संग वार्ता से पहले ही चीन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है.
चीन ने अमेरिका को ताइवान के संबंध में वादा याद दिलाया है और कहा है कि ताइवान, चीन का एक आंतरिक मामला है, चीन के अधिकार क्षेत्र का मामला है.
आपको बता दें कि पिछले दिसंबर में ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियारों के पैकेज की घोषणा की थी, जो अब तक का सबसे बड़ा पैकेज है. लेकिन चीन इस हथियार बिक्री का विरोध कर रहा है.
ताइवान चीन का हिस्सा, वॉशिंगटन को बीजिंग की दो टूक
चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय की प्रवक्ता झांग हान ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली दो दिवसीय बैठकों के दौरान ताइवान निश्चित रूप से चर्चा का विषय होगा.
झांग ने कहा कि ताइवान “चीन के मूल हितों का केंद्र” है, और अमेरिका के पिछले प्रशासनों द्वारा किए गए वादों का सम्मान करना “अंतर्राष्ट्रीय दायित्व हैं जिन्हें पूरा करने के लिए अमेरिकी पक्ष कर्तव्यबद्ध है.”
“हम अमेरिका द्वारा चीन के ताइवान क्षेत्र के साथ किसी भी प्रकार के सैन्य संबंध बनाने का कड़ा विरोध करते हैं, और अमेरिका द्वारा चीन के ताइवान क्षेत्र को हथियार बेचने का भी कड़ा विरोध करते हैं. यह स्थिति सुसंगत और स्पष्ट है.”
दरअसल चीन लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और यही कारण है कि ताइवान के किसी भी देश के साथ संबंधों का कड़ा विरोध करता है.
हालांकि वाशिंगटन की “एक चीन” नीति के तहत अमेरिका आधिकारिक तौर पर ताइवान की संप्रभुता पर कोई रुख नहीं अपनाता है, लेकिन चीन का मानना है कि हथियार देकर और ताइवान के साथ संबंध रखकर अमेरिका क्षेत्रीय शांति को नुकसान पहुंचाने का काम करता है.
मैं जिनपिंग का मना लूंगा, ईरान युद्ध में हमें चीन की मदद की जरूरत नहीं: ट्रंप
चीन पहुंचने से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं असाधारण प्रतिभा के धनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चीन के द्वार खोलने का आग्रह करूंगा ताकि ये प्रतिभाशाली लोग अपना जादू चला सकें और पीपुल्स रिपब्लिक को और भी ऊंचाइयों पर ले जा सकें!”
ट्रंप ने कहा, “हमारे पास चर्चा करने के लिए बहुत से मुद्दे हैं. सच कहूं तो मैं यह नहीं कहूंगा कि ईरान उनमें से एक है, क्योंकि ईरान पर हमारा काफी हद तक नियंत्रण है. लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमें ईरान के मामले में चीन से किसी मदद की ज़रूरत है और शी जिनपिंग का इस विषय पर रुख काफी अच्छा रहा है.”
ट्रंप ने भी चीन पर दबाव बनाया है. क्योंकि अगर चीन ने ट्रंप की बात नहीं मानी, ऐसी स्थिति में अमेरिका, ताइवान को सीधे हथियार बेचना शुरु कर सकता है. ट्रंप ने इस बात के संकेत दे दिए हैं. मीडिया से बात करते हुए सोमवार रात को ट्रंप ने खुद कहा कि शी जिनपिंग से ताइवान को हथियार बेचने पर चर्चा की जाएगी.
बीजिंग में ट्रंप का स्वागत चीनी उपराष्ट्रपति ने किया
बीजिंग पहुंचने पर ट्रंप का स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने किया. इस दौरान अमेरिका में चीन के राजदूत शिए फेंग, चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू और चीन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. गुरुवार को ट्रंप के सम्मान में औपचारिक राज्य समारोह आयोजित किया गया है. ट्रंप के साथ अमेरिकी उद्योग जगत के कई बड़े नाम भी बीजिंग पहुंचे हैं. उनके प्रतिनिधिमंडल में एलन मस्क और जेनसन हुआंग शामिल हैं. माना जा रहा है कि अमेरिका इस दौरे के जरिए व्यापारिक समझौतों को आगे बढ़ाने और तकनीक तथा सप्लाई चेन से जुड़े तनाव कम करने की कोशिश करेगा.

