अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को झुकाने की एक और चाल नाकाम साबित हुई है. ट्रंप ने ईरान के साथ एमओयू करने का ऐलान किया लेकिन फिर कुछ घंटे बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फाइटर जेट में लगे बम की तस्वीर साझा कर दी. क्योंकि ईरान ने साफ कर दिया है कि एमओयू में परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई बात शामिल नहीं की गई है.
यहां तक की होर्मुज को लेकर भी ईरान ने वसूली की जगह पर्यावरण-टैक्स का नाम देकर ट्रंप को फिर मात दे दी है. ऐसे में दुनियाभर के रणनीतिकार, ट्रंप और अमेरिकी के माइंड गेम को जु़गज़वांग का नाम दे रहे हैं. यानी मजबूरी की ऐसी चाल, जिससे सिर्फ हार हाथ लगती है.
दुनिया के सबसे ताकतवर माने जाने वाले देश, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालात शतरंज की उस चाल की तरह हो गई है, जहां हर चाल चलने पर खिलाड़ी को निराशा हाथ लगती है. हर चाल चलने पर उसे हार बेहद करीब दिखने लगती है. यानी हर चाल में हार. शतरंज में इस चाल को कहते हैं जु़गज़वांग. यानी मजबूरी की चाल. यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ खिलाड़ी के पास कोई अच्छा विकल्प नहीं होता, लेकिन नियमों के अनुसार उसे चाल चलनी ही पड़ती है और वह चाल उसकी स्थिति को और खराब कर देती है.
शतरंग के खेल में ये शब्द यानी जुगज़वांग आया है जर्मन भाषा से, जिसमें ज़ुग का अर्थ है चाल या मूव और ज़ुवांग का अर्थ है मजबूरी. शतरंज में इस शब्द का पूरा अर्थ है खेल के दौरान खिलाड़ी की सभी चालें उसके नुकसान का कारण. ऐसा इसलिए, क्योंकि पिछले तीन महीने से यानी जिस दिन से अमेरिका ने ईरान पर आक्रमण किया था, तब से ट्रंप की हर चाल उल्टी पड़ रही है.
आपको सिलसिलेवार ढंग से बताते हैं कि क्यों ट्रंप की एक एक चाल अमेरिका के लिए भारी पड़ रही है.
ईरान को कम आंकना ट्रंप की सबसे बड़ी भूल
अमेरिका और इजरायल ने ये सोचकर ईरान की राजधानी तेहरान पर जबरदस्त हमला किया था कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और टॉप पॉलिटिकल और मिलिट्री लीडरशिप के सफाए से ईरान घुटनों पर आ जाएगा. ट्रंप को गफलत थी कि खामेनेई की मौत से ईरान, अमेरिका के सामने सरेंडर कर देगा और ट्रंप की कोई कठपुतली तेहरान के शासन पर पहुंच जाएगी. लेकिन हुआ इसका उलट. खामेनेई की मौत और ईरान की संप्रुभता पर हमले को ईरान की जनता ने दिल से लगाया और पूरा देश अमेरिका और इजरायल के खिलाफ उठ खड़ा हुआ.
ईरान ने होर्मुज की खाड़ी रोक अमेरिकी को किया परेशान
ईरान की नौसेना का पूरा जंगी बेड़ा भले समंदर की गर्त में समा गया, लेकिन आईआरजीसी की छोटी लेकिन आत्मघाती बोट्स ने होर्मुज स्ट्रेट में ऐसा कहर बरपाया कि पूरी दुनिया ने ट्रंप को इसका जिम्मेदार ठहरा दिया. क्योंकि होर्मुज में आईआरजीसी ने नाकेबंदी कर पूरी दुनिया की ऑयल सप्लाई को बाधित कर दिया. साफ था कि अमेरिका ने ईरान को जमकर पीटा, लेकिन सरेंडर कराने में नाकाम साबित हुआ.
ईरान के आगे अमेरिका की नाकेबंदी हुई फेल
ईरान के नेवल ब्लॉकेड के जवाब में अमेरिका ने भी होर्मुज के करीब ओमान की खाड़ी में नाकेबंदी की. लेकिन यहां भी अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर, सफेद हाथी साबित हुए और उल्टे पांव ओमान की खाड़ी से दूर जाना पड़ा. क्योंकि ईरान ने इन एयरक्राफ्ट कैरियर पर बोट्स के साथ-साथ मिसाइलों से भी जबरदस्त हमला किया था. ऐसे में अमेरिका ने खाड़ी के मित्र-देशों के साथ ऑपरेशन फ्रीडम छेड़ने की कोशिश की, लेकिन महज कुछ घंटों में वापस ले लिया.
अब ट्रंप और ट्रंप के सिपहसालार यानी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के सामने मुश्किल ये है कि अगर ब्लॉकेड जारी रहा तो, ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होती है और हटाया जाए तो पूरी यूएस मिलिट्री यानी सुपरवार की हार है. ईरान को होर्मुज में खुली छूट देने में भी अमेरिका की हार है और इससे कम में तेहरान मानने को तैयार नहीं है. तेहरान ने साफ कर दिया है कि ओमान के साथ मिलकर होर्मुज के कंट्रोल को लेकर एक नया मैनेजमेंट बनाने में जुटा है जिसमें अमेरिका या फिर किसी दूसरे देश की कोई दखलंदाजी नहीं होगी.
मध्यस्थ पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ कर दिया डबल गेम
ट्रंप ने अपने प्रिय फील्ड मार्शल यानी अमेरिका के फेल्ड मार्शल असीम मुनीर के जरिए भी ईरान पर डोरे डालने की कोशिश की. दो-दो बार मुनीर का तेहरान दौरा हो चुका है. लेकिन मुनीर अपनी फितरत से बाज नहीं आया और उल्टा ट्रंप के साथ डबल गेम खेलने में जुट गया है. अमेरिका ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को सरेंडर करने की शर्त रखी तो मुनीर ने ये कहकर ट्रंप को सन्न कर दिया कि इस्लामाबाद यूरेनियम के भंडार को रख सकता है.
पाकिस्तान की मध्यस्थता नाकाम
मुनीर ने इस्लामाबाद राउंड-2 के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन तेहरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने से साफ इंकार कर दिया. रविवार को ट्रंप ने जब ईरान के साथ एमओयू को लेकर नया ऐलान किया तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में वार्ता का स्वागत कर डाला. लेकिन महज कुछ घंटे बाद ही ईरान ने साफ कर दिया कि नए एमओयू में परमाणु कार्यक्रम और एनरीच यूरेनियम शामिल नहीं है. यानी इस्लामाबाद टॉक्स फिर ठंडे बस्ते में चली गई है.

