चीन की सीमा से सिर्फ तीन किलोमीटर दूर, पूर्वोत्तर म्यांमार के नमखम (शान प्रांत) में गोला-बारूद भंडार में भीषण विस्फोट से बड़ी घटना घटी है. विस्फोट इतना भयंकर था कि इलाके के 100 से ज्यादा घर ध्वस्त हो गए, और 50 से ज्यादा लोग मौके पर ही मारे गए. जिस शान प्रांत में ये धमाका हुआ वो म्यांमार का गृह युद्ध प्रभावित क्षेत्र है.
म्यांमार में ये घटना ऐसे वक्त में हुई है जब म्यांमार के राष्ट्रपति (पूर्व सैन्य तानाशाह) यू मिन आंग ह्लाइंग 3 जून तक भारत दौरे पर हैं. म्यांमार के राष्ट्रपति ने एनएसए अजीत डोवल से राजधानी दिल्ली में मुलाकात की है.
दिल्ली के इस दौरे को लेकर दबी जुबान में पूरी दुनियाभर में चर्चा है, क्योंकि एक छद्म-लोकत्रंत के राष्ट्राध्यक्ष का भारत में कम स्वागत किया जाता है.
म्यांमार में विस्फोट, 50 से ज्यादा लोगों की मौत
म्यांमार के शान प्रांत में गोला-बारूद भंडार में विस्फोट से बड़ा हादसा हुआ है. इमारत में खनन के लिए भारी मात्रा में ‘जैलइग्नाइट’ जैसा संवेदनशील बारूद जमा था. धमाका चीन बॉर्डर के बेहद करीब हुई. धमाके के बाद कई दर्जन घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए और 50 से ज्यादा लोगों ने मौके पर दम तोड़ दिया तो 70 से अधिक लोग मलबे में दबने की आशंका है.
जिस इलाके में यह तबाही मची है, वह वर्तमान में म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ जंग लड़ रहे विद्रोही गुट ताअंग नेशनल लिबरेशन आर्मी (टीएनएलए) के नियंत्रण में है
माइनिंग के लिए रखा गया था विस्फोटक: टीएनएलए
यह घटना म्यांमार के अस्थिर इलाके में हुई है, जहां सैन्य और विभिन्न जातीय सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष जारी है. विद्रोही गुट टीएनएलए ने बयान जारी कर कहा कि, इमारत में विस्फोटक खनन और पत्थर खदान के काम के लिए थे, न कि हथियारों के लिए.
‘जैलइग्नाइट’ एक बेहद संवेदनशील विस्फोटक है. अगर इसे लंबे समय तक नमी वाले रिहायशी इलाकों के पास स्टोर किया जाए तो भीषण विस्फोट होने की आशंका गहरा जाती है.
विद्रोही गुट टीएनएलए भले ही माइनिंग के लिए विस्फोटक रखने की बातें कर रहा हो, लेकिन बड़े पैमाने पर बारूद को चीन सीमा के पास और रिहायशी आबादी के बीच रखना एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है.
फरवरी 2021 में म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से देश में अराजकता का माहौल है. टीएनएलए जैसे जातीय सशस्त्र संगठनों ने देश के बड़े हिस्सों, खासकर व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण चीनी सीमा के इलाकों पर कब्जा कर रखा है.
चीन हमेशा से इस क्षेत्र में स्थिरता चाहता है, क्योंकि नमखम इलाका चीन के बेहद करीब है, जिसके कारण उसके बॉर्डर पर भी खतरा बना रहता है.
नई दिल्ली में मौजूद म्यांमार के राष्ट्रपति
भारत का बेहद अहम पड़ोसी है म्यांमार. राष्ट्रपति बनने के बाद मिन का ये पहला विदेशी दौरा है. यह दौरा म्यांमार के क्षेत्रीय संबंधों में धीरे-धीरे वापसी को दर्शाता है. पांच साल पहले तख्तापलट के बाद कई पड़ोसी देशों ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश के सैन्य नेतृत्व से दूरी बना ली थी. यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब म्यांमार की सेना ने सीमावर्ती क्षेत्र में नए सिरे से आक्रामक अभियान शुरू किए हैं, जहां रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार पाए जाते हैं. लेकिन गृहयुद्ध के चलते भारत और थाईलैंड के अन्य महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग भी प्रभावित हैं.
म्यांमार के राष्ट्रपति भारत से करीबी बढ़ाकर अराकान आर्मी और विद्रोही गुटों के खिलाफ सैन्य तंत्र को मजबूत करना चाहते हैं, ताकि सत्ता में रहते हुए वो म्यांमार की अराजकता पर काबू पा सकें. वही म्यांमार में रेयर अर्थ मिनरल्स हैं, जो भारत के लिए उपयोगी हो सकता है.
वहीं मिन को बीजिंग का समर्थन प्राप्त है. लेकिन वो चीन का पहला विदेशी दौरा न करके भारत पहुंचे हैं, जिससे पता चलता है कि वो भारत के साथ अच्छे और मजबूत संबंध चाहते हैं.

