अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी वक्त युद्ध पार्ट 02 शुरु होने से पहले इजरायली सेना ने 900 साल पुराने किले पर कब्जे का दावा ठोंक दिया है. इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह को बड़ा झटका देते हुए दक्षिणी लेबनान में स्थित ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले और उससे जुड़ी रणनीतिक पहाड़ी पर अपना झंडा फहरा दिया है.
कब्जे के बाद इजरायली सेना ने कहा, यह इलाका ईरान समर्थित हिजबुल्लाह का महत्वपूर्ण ठिकाना था और यहां से इजरायल पर कई हमले किए जाते थे.
आपको बता दें कि 17 अप्रैल में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू किया गया था, लेकिन युद्धविराम कहने मात्र का है, दोनों पक्षों में भयंकर तनाव जारी है. सीजफायर के बावजूद इजरायल, लगातार हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर रहा था. इजरायल हिजबुल्लाह को खत्म करना चाहता है, और वो भी अमेरिका-ईरान के समझौते से पहले, ताकि उसपर दबाव नहीं डाला जा सके.
ब्यूफोर्ट हिजबुल्लाह मुक्त, इजरायल ने फहराया झंडा
इजरायली सेना यानी आईडीएफ ने लेबनान स्थित ब्यूफोर्ट किले पर इजरायली झंडा फहराकर किले पर नियंत्रण का ऐलान किया है.
इजरायली सेना के मुताबिक, “इस किले को हिजबुल्लाह ने अपना सैन्य ठिकाना बना रखा था और इसी किले के माध्यम से इजरायल पर टारगेट करता था. इसी इलाके से हिजबुल्लाह इजरायली शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले करता था. इस क्षेत्र में मौजूद लॉन्चिंग सिस्टम और अन्य सैन्य ढांचे को भी निशाना बनाया जा रहा है. इजरायल का दावा है कि यहां से पहले सैकड़ों रॉकेट और अन्य हथियार इजराइल की ओर दागे गए थे.”
आईडीएफ ने कहा, इस अभियान का मकसद ब्यूफोर्ट रिज और वादी अल-सलूकी क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल करना था. इसलिए ऑपरेशन के दौरान हिजबुल्लाह के ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया.
इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा, कि “सेना ने आसपास के गांवों में कई दिनों तक चली भीषण लड़ाई और हवाई हमलों के बाद यह कामयाबी हासिल की है.”
ओटोमन शासन का ऐतिहासिक किला, इजरायल ने अधिकार जमाया
ब्यूफोर्ट किला सैन्य तौर पर बेहद अहम स्थान रखता है. साल 1982 से 2000 तक दक्षिणी लेबनान पर इजरायली कब्जे के दौरान उसकी सेना का एक प्रमुख सैन्य अड्डा था. 700 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बने इस किले से दक्षिणी लेबनान के अलावा इजरायल के बड़े हिस्से पर नजर रखी जा सकती है.
इजरायली सेना के मुताबिक, ब्यूफोर्ट किला और उसके आसपास की पहाड़ी से दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इजरायल के बड़े हिस्से पर नजर रखी जा सकती है. पिछले 26 साल में इजरायल का लेबनान में सबसे बड़ा कब्जा माना जा रहा है.
इतिहास की बात की जाए, यह मध्यकालीन किला एक प्रमुख रणनीतिक सैन्य चौकी था. 16वीं सदी की शुरुआत में (1516 में) यह किला मामलुक सल्तनत से ओटोमन साम्राज्य के अधीन आ गया. ओटोमन शासन को आमतौर से तुर्की साम्राज्य के तौर पर जाना जाता है.
17वीं शताब्दी के प्रारंभ में, ओटोमन साम्राज्य ने माउंट लेबनान के अमीर फख्र अल-दीन द्वितीय के खिलाफ युद्ध लड़ा. उन्होंने इस किले का उपयोग ओटोमन सैनिकों के खिलाफ अपने विद्रोह के आधार के रूप में किया था. इसके बाद, ओटोमन तुर्कों ने किले के ऊपरी हिस्से को नष्ट कर दिया था.
लेकिन प्रथम विश्व युद्ध में ओटोमन साम्राज्य की हार के बाद, साल 1918 में इस क्षेत्र पर फ्रांसीसी जनादेश का नियंत्रण हो गया था.

