अमेरिका-ईरान के बीच समझौता हम पर लागू नहीं होता और इजरायल, अमेरिका का गुलाम नहीं है. जैसा बयान देने वाले इजरायली रक्षा मंत्री बेन ग्वीर को अमेरिका ने वीज़ा देने से मना कर दिया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी इजरायली मंत्री का वीज़ा अमेरिका ने नहीं जारी किया है. बेन ग्वीर को अमेरिका में एक पारिवारिक समारोह में हिस्सा लेना था, लेकिन वीज़ा न मिलने के कारण इजरायली रक्षा मंत्री को अपना अमेरिका का दौरा रद्द करना पड़ा है.
ये घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर फाइनल हस्ताक्षर किए जाने हैं, जिसका विरोध इजरायल कर रहा है. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से कह दिया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी राय अलग-अलग हो सकती है.
अमेरिका ने नहीं दिया इजरायली रक्षा मंत्री को वीज़ा
बेन ग्वीर को अमेरिका का वीजा नहीं मिला है. ग्वीर एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अमेरिका के मियामी जाना चाहते थे, लेकिन अमेरिकी दूतावास से वीजा क्लियरेंस न मिलने की वजह से उन्होंने अपना दौरा कैंसिल कर दिया है. बताया जा रहा है कि सोमवार को ग्वीर ने तेल अवीव स्थित अमेरिकी दूतावास से वीजा के लिए संपर्क किया. इस पर दूतावास के अधिकारियों ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अपने ऑफिस में आने के लिए कहा. दूतावास का कहना था कि बेन ग्वीर पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. इसलिए उन्हें खुद दूतावास आकर बायोमेट्रिक डेटा देना होगा.
बेन ग्वीर ने जब दूतावास में व्यक्तिगत रूप से पेश न होने और बायोमेट्रिक डेटा देने से इनकार कर दिया. जिसके बाद अमेरिकी दूतावास ने उन्हें वीजा नहीं देने से मना कर दिया.
अमेरिकी दूतावास ने पहली बार इजरायल के किसी मंत्री के साथ ऐसा व्यवहार किया है. आमतौर पर इजरायल के मंत्रियों को अमेरिका स्पेशल वीजा देता है, जिससे उन्हें यात्रा करने में कोई कठिनाई न हो.
माना जा रहा है कि अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली डील का इजरायल का विरोध करना इस तनातनी की वजह हो सकती है.
हम अमेरिका के अधीन नहीं, समझौता हम पर लागू नहीं: बेन ग्वीर
इजरायली के रक्षा मंत्री बेन ग्वीर ने ईरान डील को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. बेन ग्वीर ने कहा- “ट्रंप का समझौता हम पर लागू नहीं होता. इजरायल अमेरिका के अधीन (गुलाम) नहीं है, और हम एक आजाद और संप्रभु देश हैं. हमारा फर्ज इजरायल के नागरिकों, आईडीएफ के सैनिकों और यहूदी लोगों के प्रति है. साथ ही, हजारों सालों के निर्वासन के दौरान सताए गए और मारे गए यहूदियों के प्रति हमारा ऐतिहासिक फर्ज है कि हम इजरायल की धरती पर यहूदियों को सुरक्षा दें. जब भी हमने इजरायल की सुरक्षा की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेके, हमें बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. ओस्लो समझौते में ऐसा ही हुआ, 2006 के लेबनान समझौते में भी यही हुआ, और गाजा में नियंत्रण की हर कोशिश में भी यही हुआ, जो बाद में हमारे लिए बड़ी मुसीबत बन गई.”
इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं: बेन ग्वीर
बेन ग्वीर ने अपनी सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखी, जिसमें कहा, “हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के आभारी हैं. फिर भी, इजरायल कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ (कमजोर या अस्थिर देश) नहीं है. मैं प्रधानमंत्री से हमेशा ये बातें कहता हूं और हर अहम ऐतिहासिक मोड़ पर बंद कमरों में भी इन्हें दोहराता हूं: ऐतिहासिक पलों में ऐतिहासिक फैसला लेना जरूरी होता है. मेरा रुख साफ है: हम इस समझौते में शामिल नहीं हैं क्योंकि यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता और हम पर किसी भी तरह से लागू नहीं होता. हिजबुल्लाह को पूरी तरह खत्म करने से कम किसी भी चीज पर समझौता नहीं किया जा सकता; हमारे लड़ाकों ने जिन इलाकों पर कब्ज़ा किया है और जहां से आतंकी ढांचे को साफ किया है, वहां से पीछे नहीं हटना चाहिए; हमें ऐसी स्थिति में वापस नहीं जाना चाहिए जहां हजारों आतंकवादी उत्तरी बस्तियों की सीमाओं पर बैठे हों; और निश्चित रूप से, इजरायल पर होने वाले हमलों के सामने हमें एक पल के लिए भी चुप नहीं रहना चाहिए.”
हम मजबूत और गर्व करने वाले लोग हैं: बेन ग्वीर
बेन ग्वीर यहीं नहीं रुके. लिखते हैं, “ लेबनान से इजरायल की ओर ड्रोन, यूएवी या मिसाइल छोड़ने पर इजरायल, दाहिया में जवाबी हमला करेगा. कुछ महीने पहले तक यही शक्ति संतुलन था, और हमें इसे किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहिए. और सबसे बड़ी बात, हमें सबको यह साफ बता देना चाहिए कि इजरायल के लोग 3,000 साल पुराने लोग हैं, एक ऐसा शाश्वत समुदाय जो लंबे सफर से नहीं डरता. हमें ब्रह्मांड के रचयिता पर भरोसा है; हम एक मजबूत और गर्व करने वाले लोग हैं जो मजबूती और गर्व के साथ अपनी मातृभूमि लौटे हैं, और अब दुश्मनों के सामने नजरें झुकाने का हमारा कोई इरादा नहीं है. वे दिन बीत गए जब यहूदी मार सहते थे और चुप रहते थे. अब ऐसा कभी नहीं होगा.”

