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ट्रंप का बड़बोलापन, कतर के अमीर का गला सूखा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बड़बोलेपन ने एक बार फिर मिडिल-ईस्ट को भड़काने का काम किया है. जी-7 की मीटिंग में हिस्सा लेने पहुंचे ट्रंप ने कतर के अमीर (राष्ट्रपति) शेख तमीम हिन हामिद अल थानी से मुलाकात के दौरान ऐसा बयान दिया कि ईरान को जबरदस्त मिर्ची लग सकती है.

ट्रंप ने अमीर की तारीफ करते हुए कह दिया कि ईरान से हुई जंग के दौरान कतर ने बहुत बहादुरी से लड़ाई लड़ी.

ट्रंप की बातों से असहज दिखे कतर के अमीर

कतर और यूएई जैसे देश लगातार ये कहते आ रहे हैं कि जंग के दौरान उन्होंने (कतर इत्यादि) ने ईरान पर एक भी मिसाइल या ड्रोन नहीं दागा है. ये जरूर है कि इन देशों में जो मिलिट्री बेस हैं, उनका इस्तेमाल अमेरिका ने ईरान पर हमला करने के लिए किया है.

यही वजह है कि ईरान ने पलटवार करते हुए कतर, यूएई, इराक, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब में जो यूएस मिलिट्री बेस हैं, उनपर जबरदस्त अटैक कर भारी तबाही मचाई थी. इन हमलों में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. 

ट्रंप की बात सुनकर हालांकि, कतर के अमीर के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी. क्योंकि, अगर ईरान को जरा भी भनक लगी तो कतर के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है. जंग के दौरान, ईरान ने कतर की सबसे बड़ी रास लाफान रिफाइनरी पर हमला किया था. इस हमले से उबरने में कतर को पांच साल का वक्त लग सकता है.

मिडिल ईस्ट का भूगोल नहीं जानते ट्रंप, उड़ी हंसी

कतर के अमीर से बात करते हुए ट्रंप का बड़बोलापन यहीं खत्म नहीं हुआ. ट्रंप ने मुलाकात के दौरान ऐसी बात कह दी, जिससे साफ हो गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति को खाड़ी देशों की ज्योग्राफी यानी भूगोल की भी जानकारी नहीं है.

कतर के अमीर की मौजदूगी में ट्रंप ने कह दिया कि “कतर, ईरान का सबसे करीबी देश है और 45 मिनट में बॉर्डर को पार किया जा सकता है.”

जबकि हकीकत ये है कि ईरान, कतर के दक्षिण में नहीं है. ईरान जिन देशों के दक्षिण में हैं, वे हैं इराक और कुवैत. ईरान और कतर के बीच में फारस की खाड़ी है. ये बात जरूर है कि दोनों देशों के बीच में पार्स आईलैंड है, जिसे ईरान और कतर ने आपस में बांट रखा है. यहां एक बड़ी गैस फील्ड है.

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