खामेनेई के जनाजे में उमड़ी लाखों की भीड़, लेकिन सत्ता की रस्साकशी खुलकर आई सामने. ईरान के पहले सुप्रीम लीडर खुमैनी के पोतों ने खामेनेई के जनाजे को बीच में छोड़ा. कुरान की एक आयत से हुए खफा.
3 जुलाई को पहली बार ईरान के दूसरे सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को दुनिया के सामने लाया गया था. उस दौरान देश-विदेश के सभी गणमान्य व्यक्तियों ने खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान, हर प्रतिनिधिमंडल के साथ कुरान की एक विशेष आयत का गान चल रहा था, ईरान के पहले सुप्रीम लीडर रुहोल्ला खोमैनी (1979-89) के पोते और परिवार के दूसरे सदस्य भी शोक जताने पहुंचे. इस दौरान कुरान की ऐसी आयत का गान हुआ कि पूरा परिवार कुछ सेकंड में वहां से चला गया. जबकि कुरान की आयत अभी चल रही थी.
कुरान की एक आयत से नाखुश खुमैनी का परिवार
दरअसल, कुरान की इस आयत में लड़ाकों और बैठे रहने वाले (यानी जो नहीं लड़ते) लोगों के बीच अंतर को गाकर बताया जा रहा था. ऐसे में माना जा रहा है कि खुमैनी के पोते खफा हो गए और बीच सभा से चले गए.
अभी तक ये साफ नहीं है कि ये आयात जानबूझकर खुमैनी के परिवार के प्रतिनिधिमंडल के लिए बजाई गई थी या फिर अंजाने में ऐसा हुआ है. ये भी साफ नहीं है कि इन आयातों को किसने चुना था. जिस तरह ईरान की राजनीति में आईआरसीजी (इस्लामिक रेवोल्यूशन गार्ड कोर) की पकड़ है, उससे ऐसा लगता है कि खामेनेई के जनाजे का पूरा प्रबंध आईआरजीसी के हाथ में था.
खौमेनी का पोता भी था सर्वोच्च लीडर बनने की दौड़ में
दरअसल, अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अपने बाद जिन तीन लोगों में से एक को उत्तराधिकारी बनाने की बात कही थी, उसमें खौमेनी का एक पोता भी शामिल था. खामेनेई, सुप्रीम लीडर बनाने के लिए वंशवाद के खिलाफ थे. वे नहीं चाहते थे कि उनके परिवार का कोई सदस्य ईरान का सुप्रीम लीडर नियुक्त किया जाए. लेकिन खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता चुन लिया गया. मोजतबा, खामेनेई का बेटा है.
ऐसे में माना जा रहा है कि खुमैनी का परिवार खिन्न है लेकिन खुलकर विरोध नहीं किया. क्योंकि मोजतबा का ईरान के सबसे मजबूत सैन्य संगठन, आईआरजीसी (इस्लामिक रेवोल्यूशन गार्ड कोर) पर जबरदस्त पकड़ थी. खबर है कि आईआरजीसी के इशारे पर मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया (तीसरा) सुप्रीम लीडर चुना गया था.
खौमेनी के बाद 1989 में चुना गया था खामेनेई को
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में अली खामेनेई की अपने परिवार के चार सदस्यों सहित कुल 30 सैन्य कमांडर और वरिष्ठ नेताओं के साथ मौत हो गई थी. खौमेनी के इंतकाल के बाद खामेनेई को 1989 में ईरान का दूसरा सुप्रीम लीडर चुना गया था. खामेनेई ने करीब 37 सालों तक ईरान के राजनीतिक और धार्मिक प्रमुख के तौर पर ईरान पर शासन किया था. खामेनेई की मौत के बाद 8 मार्च को मोजतबा को सर्वोच्च नेता चुना गया था. 28 फरवरी के हमले में मोजतबा भी गंभीर रूप से घायल हुआ था.
वालिद के जनाजे से मोजतबा ने बनाई दूरी
गौरतलब है कि अपने वालिद के जनाजे में मोजतबा भी शामिल नहीं हुआ है. अमेरिका और ईरान के खौफ के चलते, मोजतबा को जनाजे से दूरी बनाकर रखने के लिए कहा गया है. जबकि, खामेनेई के बाकी तीन बेटे (मोजतबा के भाई) अंतिम संस्कार की रस्म में शामिल हुए थे. बेटों को जनाजे के समक्ष रोते हुए भी देखा गया था.


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