Acquisitions Breaking News IOR

समंदर की दिशा तय करेगा भारत: राजनाथ

भारत ने अभी तक अपनी दिशा समुद्र के माध्यम से तय की है लेकिन अब समुद्र की दिशा भारत तय करने जा रहा है. ये कहना है देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का.

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रही अमेरिका-ईरान जंग के बीच शनिवार को रक्षा मंत्री, विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना के सबसे नए युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी की कमीशनिंग सेरेमनी में नौसैनिकों को संबोधित कर रहे थे.

राजनाथ सिंह के मुताबिक, भारतीय नौसेना के स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरी एक ब्लू-वाटर जहाज है. यानी यह केवल तट के पास नहीं, बल्कि दूर, गहरे महासागरों में, हफ्तों तक, भारत के समुद्री हितों की रक्षा कर सकता है. यानी, हमारे देश भारत ने, अब तक समुद्र के माध्यम से अपनी दिशा तय की है. पर अब हमारा देश, समुद्र की दिशा तय करने की क्षमता भी विकसित कर रहा है.

आईएनएस महेंद्रगिरी जंगी बेड़े में शामिल
दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस से लैस महेंद्रगिरी, नौसेना के प्रोजेक्ट 17ए का छठा और आखिरी युद्धपोत है. इस प्रोजेक्ट के तहत चार स्टील्थ फ्रिगेट यानी जंगी जहाज, मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (एमडीएल) में बनाए गए हैं और दो (02) कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स यानी जीआरएसई में बनाए गए हैं.

एमडीएल में बनाए गए स्टील्थ फ्रिगेट
1. आईएनएस नीलगिरी
2. आईएनएस विद्यागिर
3. आईएनएस तारागिरी
4. आईएनएस महेंद्रगिरी

जीआरएसई में बनाए गए स्टील्थ फ्रिगेट–
1. आईएनएस दूनागिरी
2. आईएनएस विंध्यागिरी

स्वदेशी मिसाइल और दूसरे सैन्य साजो सामान से लैस महेंद्रगिरी
ये सभी छह युद्धपोत पिछले डेढ़ साल में भारतीय नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल किए गए. ब्रह्मोस के अलावा, महेंद्रगिरी को मल्टीफंक्शन रडार के साथ सरफेस से आसमान में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइल से भी लैस किया गया है, जो आकाश से आने वाले किसी भी खतरे को, दूर से ही पहचानकर नष्ट कर सकते हैं. इसमें स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और दुश्मन की पनडुब्बियों को तबाह करने के लिए टारपीडो लॉन्चर्स भी हैं. एक इंटीग्रेटेड एंटी सबमरीन डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रोनिक वारफेयर सूट और क्लोज इन वेपन सिस्टम है.

ये तमाम हथियार और सैन्य साजो सामान आईएनएस महेन्द्रगिरी को, महेन्द्रगिरी पर्वत के समान ही, अभेद और मजबूत बनाती हैं.

भगवान परशुराम की तपोस्थली के नाम पर रखा युद्धपोत का नाम
पूर्वी घाट यानी ओडिशा के राजसी महेंद्रगिरी पर्वत के नाम पर इस युद्धपोत का नाम रखा गया है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महेंद्रगिरि पर्वत को भगवान परशुराम की तपोस्थली माना जाता है.

नौसेना के मुताबिक, महेंद्रगिरी युद्धपोत के क्रेस्ट पर बाज है जो निडर, प्रबल और अजेय होने का प्रतीक है. यानी महेंद्रगिरी रणशौर्य का आगाज है. नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए इन सभी छह स्टील्थ फ्रीगेट्स को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की दिशा में भारत की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक माना जा रहा है. ये जहाज समुद्री सुरक्षा अभियानों, खोज और बचाव मिशनों, मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) में कारगर साबित होगा.

भारत के लिए पारंपरिक युद्ध-कला और भविष्य की टेक्नोलॉजी, दोनों जरूरी
विशाखापट्टनम में नौसैनिकों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन जंग का नाम लिए बगैर कहा कि नई तकनीकों ने युद्ध का स्वरूप अवश्य बदला है, किन्तु पारंपरिक युद्ध का महत्व कम नहीं किया है. युद्ध के जो मूल सिद्धांत हैं, उन्हें पूरा करने के लिए मजबूत पारंपरिक क्षमताओं की जरूरत, जितनी पहली थी, वो आज भी है.

राजनाथ सिंह के मुताबिक, भले भविष्य के युद्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से लड़े जाएंगे लेकिन जीत हासिल होगी किसी भी राष्ट्र के दृढ़ संकल्प, प्रशिक्षित सैनिक और विश्वसनीय मिलिट्री पावर से.

राजनाथ सिंह के मुताबिक, इसलिए भारत का अप्रोच बेहद साफ है. हमें दोनों में ही अच्छा करना है. दोनों में ही बैलेंस कायम रखना है. हम भविष्य की तकनीक में भी इन्वेस्ट करेंगे और अपनी पारंपरिक क्षमताओं को भी लगातार धार देते रहेंगे. राजनाथ सिंह के मुताबिक, आईएनएस महेंद्रगिरी इसी संकल्प का, इसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है. इसके मायने ये हैं कि नई टेक्नोलॉजी जैसे एआई या फिर ड्रोन और पारंपरिक प्लेटफॉर्म जैसे फाइटर जेट और युद्धपोत एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं.

राजनाथ सिंह के मुताबिक, इतिहास गवाह है, जिन देशों ने नई तकनीक के आकर्षण में अपनी कन्वेंशनल शक्ति की उपेक्षा की, उन्हें उसकी बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी.

दुश्मन का समूल नाश करने में सक्षम भारत
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि हमने हाल के समय में यह भी देखा है कि जब देश की सुरक्षा पर बात आती है, तो हमारी पारंपरिक और आधुनिक, दोनों क्षमताएं मिलकर कैसे एक साथ काम करती हैं. हमारी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह दिखाया, कि भारत अब न केवल अपनी रक्षा करने में बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक उत्तर देने में और दुश्मनों का समूल नाश करने में भी पूरी तरह सक्षम है.

editor
India's premier platform for defence, security, conflict, strategic affairs and geopolitics.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *