भारत और अमेरिका की सेनाओं (थल सेनाओं) की सालाना साझा मिलिट्री एक्सरसाइज, ‘युद्ध-अभ्यास’ का इस महीने आगाज होने जा रहा है. थलसेना की किसी भी देश की सेना के साथ ये सबसे बड़ी एक्सरसाइज में से है. भारत में अमेरिकी दूतावास ने खुद युद्ध-अभ्यास के आयोजन की जानकारी साझा की है.
अमेरिका दूतावास के मुताबिक, “वर्ष 2004 से, भारतीय सेना के साथ यूएस आर्मी (पैसिफिक) द्वारा आयोजित द्विपक्षीय अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ (यही नाम है साझा युद्धाभ्यास का) ने संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) को बढ़ाता है और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के समर्थन में भारत और अमेरिका की प्रमुख रक्षा साझेदारी को मजबूत किया है.”
भारत और यूएस आर्मी का ये साझा युद्धाभ्यास, एक वर्ष भारत में होता है और एक वर्ष अमेरिका. पिछले वर्ष, अलास्का में युद्ध-अभ्यास के 21वें संस्करण को आयोजित किया गया था. 20 वां संस्करण, राजस्थान के थार रेगिस्तान में आयोजित किया गया था, जिसमें भारतीय सेना की मद्रास रेजीमेंट के 400 सैनिकों ने हिस्सा लिया था.
माना जा रहा है कि इस बार की मिलिट्री एक्सरसाइज अब तक की सबसे बड़ी होने जा रही है. इस साल, 22 वां संस्करण है और इसी महीने (सितंबर में) होने जा रहा है. इस बार का युद्धाभ्यास भी राजस्थान में आयोजित किया जाएगा. हालांकि, पिछले कई संस्करण, उत्तराखंड के चौबटिया (रानीखेत) और ओली (जोशीमठ) में आयोजित किए गए हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद संबंधों मे आई खटास हुई कम
युद्ध-अभ्यास एक्सरसाइज ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और अमेरिका के संबंध एक बार फिर पटरी पर आते दिखाई दे रहे हैं. पिछले हफ्ते, अमेरिका ने भारतीय सेना को 100 जैवलिन मिसाइल देने का ऐलान किया था. उससे पहले, रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका की जनरल एटॉमिक कंपनी से दो (02) एमक्यू-9 सी गार्डियन ड्रोन लीज पर लेने के लिए करार किया था. ये दोनों ड्रोन, हिंद महासागर की निगरानी के लिए भारतीय नौसेना ऑपरेट करेगी.
सोमवार को अमेरिका की आरटीएक्स (रेथियॉन) कंपनी ने टाटा से जैवलिन मिसाइल के भारत में साझा-निर्माण के लिए समझौता किया है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत और अमेरिका के संबंधों में खटास आ गई थी. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने को लेकर संबंधों में कड़वाहट आ गई थी. भारत का दावा है कि पाकिस्तानी डीजीएमओ के गिड़गिड़ाने के बाद ऑपरेशन सिंदूर को रोका गया था और सीजफायर के लिए भारत तैयार हुआ था.

