मिडिल-ईस्ट जंग शुरु होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की है. एससीओ समिट के इतर, किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में दोनों पीएम मोदी और पेजेश्कियान ने पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने सभी मुद्दों का समाधान डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए करने का आह्वान किया. मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन एंड कॉमर्स का हवाला देते हुए नाविकों को किसी भी प्रकार की हानि ना पहुंचाने पर पेजेश्कियान से बात की. ईरान में भारत द्वारा संचालित चाबहार पोर्ट पर भी पीएम मोदी ने पेजेश्कियान से चर्चा की. जंग के दौरान, अमेरिकी नौसेना ने कई बार चाबहार पोर्ट पर हमला किया था.
पीएम मोदी ने 12-13 सितंबर को राजधानी दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स समिट के लिए भी पेजेश्कियान को निमंत्रण दिया. माना जा रहा है कि पेजेश्कियान का भारत दौरा लगभग पक्का है. ब्रिक्स समिट के लिए पेजेश्कियान के अलावा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दिल्ली आना भी लगभग तय है.
अमेरिका की हार के बावजूद समझौते के लिए तैयार ईरान: पेजेश्कियान
जानकारी के मुताबिक, पेजेश्कियान ने पीएम मोदी से कहा कि जंग में अमेरिका की नाकामी के बावजूद ईरान समझौते के लिए तैयार है. ईरानी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि अमेरिका द्वारा अपने वादे पूरे नहीं किए जाने के बावजूद ईरान समझौते के लिए प्रतिबद्ध है. मुलाकात के दौरान पेज़ेश्कियान ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझ और समझौता हासिल करने की कोशिश जारी है. उन्होंने कहा कि युद्ध जारी रखना ईरान, क्षेत्र या मानवता, किसी के हित में नहीं है. पेज़ेश्कियान ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता मजबूत करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका और क्षमता पर भी जोर दिया.
बिश्केक पहुंचने से पहले अमेरिका ने ईरान पर किया हमला
खास बात है कि पेजेश्कियान के बिश्केक में हिस्सा लेने से ठीक पहले अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के लारक द्वीप पर हमला कर दिया. 30 जुलाई के बाद, अमेरिका का ईरान पर ये पहला हमला था. अमेरिका का आरोप है कि ईरानी सेना, होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंग बिछाने की तैयारी कर रही थी. ऐसे में ईरानी सेना पर हमला किया गया. इस हमले में कई ईरानी सैनिक हताहत हुए हैं.
अमेरिका के हमले के तुरंत बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिका के दो (02) सैन्य ठिकानों, किंग हुसैन और अल-अज़राक पर शाहेद ड्रोन से हमला किया. इसके अलावा, आईआरजीसी ने यूएई में भी ड्रोन स्ट्राइक का दावा किया. आईआरजीसी ने अमेरिकी मिलिट्री बेस पर किए गए हमला का एक प्रोपेगेंडा वीडियो भी जारी किया. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका का एक एमक्यू-9 ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया.
28 फरवरी को अमेरिका और ईरान ने किया था ईरान पर हमला
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया था. हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई सहित करीब 30 मिलिट्री कमांडर्स और ईरानी नेताओं की मौत हुई थी. हमले का जवाब देते हुए ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिका के एक दर्जन से भी ज्यादा मिलिट्री बेस पर हमला कर कड़ा जवाब दिया था. युद्ध का पहला चरण 40 दिन तक चला था. पाकिस्तान, कतर और ओमान सहित कई देशों की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए जून के महीने में एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे. लेकिन जुलाई के महीने में अमेरिका ने ईरान पर फिर जोरदार प्रहार किया था. अमेरिका का दावा था कि ईरान ने एमओयू का उल्लंघन करते हुए होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला था और कमर्शियल जहाजों पर हमला किया था. युद्ध का दूसरा चरण करीब दो हफ्ते चला था.

