मेक इन इंडिया के बाद अब भारत की स्वदेशी कंपनियों, मेक फॉर द वर्ल्ड के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी हैं. इसी कड़ी में अडानी डिफेंस अब रूस को एके-203 राइफल का एम्युनेशन (गोलियां) एक्सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं.
जो रूस अभी तक भारत को हथियार और गोला-बारूद निर्यात करता था, वो अब भारत से गोलियां आयात कर रहा है. यूक्रेन जंग के चलते, रूस की डिफेंस इंडस्ट्री पर जबरदस्त दबाव है. ऐसे में रशिया अब अपने पुराने और भरोसेमंद मित्र-देश भारत से अपनी राइफल के लिए एम्युनिशन ले रहा है.
जानकारी के मुताबिक, रशिया ने अडानी डिफेंस से अगले पांच वर्षों के लिए करार किया है. इस करार के तहत, अडानी डिफेंस रूस की एके 203 राइफल के लिए बुलेट्स (गोलियां) सप्लाई करेगी. उत्तर प्रदेश के कानपुर में अडानी डिफेंस का एक बड़ा एम्युनिशन प्लांट है, जहां अलग-अलग कैलिबर की बुलेट्स का उत्पादन किया जाता है.
एके-203 में 7.62x.39 एमएम कैलिबर की बुलेट को इस्तेमाल किया जाता है. ये एम्युनिशन, अडानी डिफेंस भारतीय सेना को सप्लाई होने वाली एके-203 के लिए भी इस एम्युनिशन को सप्लाई करती है.
पुतिन के दौरे से पहले अडानी डिफेंस से करार
इसी हफ्ते, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ब्रिक्स समिट (12-13 सितंबर) में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली का दौरा होने जा रहा है. ऐसे में पुतिन के दौरे से ठीक पहले रूस और अडानी डिफेंस में करार बेहद अहम माना जा रहा है.
रूस को सप्लाई करने वाली कंपनियों से बैन का डर खत्म
यूक्रेन जंग की वजह से अमेरिका ने रूस की डिफेंस इंडस्ट्री की मदद करने वाली दुनियाभर की कई दर्जन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे. इनमें भारत की कंपनियां भी शामिल रही हैं. हालांकि, जुलाई के महीने में अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों से प्रतिबंध हटा लिया था. माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अब रूस-यूक्रेन जंग खत्म करने के प्रयास कर रहा है.
साथ ही ट्रंप के सत्ता आने के बाद से अमेरिका की रूस से नजदीकियां बढ़ गई हैं. ऐसे में अब रुस के साथ संबंध रखने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध की संभावना बेहद कम हैं. यही वजह है कि अडानी डिफेंस ने गोलियों की सप्लाई के लिए रूस से करार किया है.
कोरवा प्लांट में रूस की मदद से बन रही एके-203 राइफल
खास बात है कि रूस की मदद से उत्तर प्रदेश के कोरवा (अमेठी) में बनाई जा रही एके-203 राइफल (‘शेर’) के निर्माण में अडानी डिफेंस भी अहम भूमिका निभा रही है. यही वजह है कि एके-203 राइफल बुलेट्स भी अडानी डिफेंस के कानपुर स्थित प्लांट में बनाई जा रही हैं.
हाल में खबर आई थी कि कोरवा प्लांट में पहली 100 प्रतिशत मेक इन इंडिया एके-203 असॉल्ट राइफल बनकर तैयार हो गई है. इससे पहले तक इन राइफल में रूसी मैटेरियल लगा था. लेकिन अब इन राइफल में पूरी तरह से स्वदेशी माल लगा है.
वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मेक इन इंडिया के तहत एके-203 असॉल्ट राइफल के निर्माण के लिए कोरवा में साझा प्लांट का उद्घाटन किया था. इसके लिए दोनों देशों ने 5200 करोड़ का करार किया था.
भारतीय सेना को सप्लाई होने हैं 06 लाख असॉल्ट राइफल
वर्ष 2021 में भारत और रूस ने कोरबा प्लांट में साढ़े सात लाख (7.50 लाख) से भी ज्यादा एके-203 राइफल के निर्माण के लिए 5000 करोड़ का करार किया था. साल 2024 से राइफल निर्माण ने तेजी पकड़ी और सेना को राइफलों की खेप पहुंचाई गई. अब तक इस प्लांट में बनी 70 हजार से ज्यादा एके-203 राइफल, भारतीय सेना को सप्लाई की जा चुकी हैं.
एके-203 राइफल के निर्माण के लिए भारत और रूस ने पहली बार एक प्राईवेट लिमिटेड कंपनी का गठन किया था, जिसे इंडो रसियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (आईआरआरपीएल) का नाम दिया गया है. कंपनी को दिसंबर 2030 तक सभी छह लाख राइफल की डिलीवरी सेना को करनी हैं.

