ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के होश फांख्ता करने वाली रूसी एस-400 मिसाइल सिस्टम की आखिरी (पांचवीं) स्क्वाड्रन नवंबर महीने में भारत पहुंचने की संभावना है. पिछले वर्षों से इस सतह से हवा में मार करने वाली रूस की घातक मिसाइल प्रणाली एस-400 ‘ट्रायम्फ’ की सप्लाई बेहद देरी से चल रही है.
एस-400 की सप्लाई बेहद धीमी गति से हो रही है, लेकिन इस एयर डिफेंस सिस्टम की खूबियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना के लिए रक्षा मंत्रालय पांच (05) अतिरिक्त स्क्वाड्रन खरीदने की तैयारी कर रहा है.
पड़ोसियों के नापाक इरादे और चालबाजी को भारत अच्छे से समझता है, इसलिए भारत की वायु शक्ति बढ़ाने के लिए रूसी मिसाइल एस 400 को बेहद अहम समझता है. रूस के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए भारत, अमेरिका की वॉर्निंग भी दरकिनार कर चुका है. रूस का एस-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम भारत में किसी भी संभावित हवाई हमले को नाकाम करने में सक्षम है.
सबसे लंबी दूरी का ‘किल’ नाम है रूसी एयर डिफेंस के
भारतीय वायुसेना ने एस-400 मिसाइल की चार (04) स्क्वाड्रन को चीन और पाकिस्तान से सटे बॉर्डर पर तैनात किया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारत की इस मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान के एक टोही विमान को 380 किलोमीटर की दूरी पर मार गिराया था. मिलिट्री एविएशन के इतिहास में ये आज तक का सबसे लंबी दूरी का ‘किल’ माना जाता है.
ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदमपुर पहुंचकर एस-400 मिसाइल के साथ तस्वीर खिंचवाई थी और रूसी एयर डिफेंस सिस्टम की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी.
वर्ष 2018 में 40 हजार करोड़ में हुआ था पांच स्क्वाड्रन का सौदा
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अक्टूबर 2018 में हुई भारत यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच एस-400 मिसाइल तकनीक के लिए करार हुआ था. इस सौदे की कुल कीमत करीब 40 हजार करोड़ थी. यह दुनिया की सबसे सटीक एयर डिफेंस प्रणाली है. एस-400 मिसाइल सिस्टम की रेंज 40 से 400 किलोमीटर तक है, इसकी जद में पाकिस्तान और चीन हैं.
एस-400 मोबाइल सिस्टम है यानी सड़क के ज़रिए इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है. आदेश मिलने के बाद पांच से 10 मिनट के भीतर इसे तैनात किया जा सकता है. इसे फाइटर जेट से लेकर टोही विमान और हेलीकॉप्टर से लेकर क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइल सहित हाइपरसोनिक हथियारों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. यह आसमान से घात लगाकर आते हमलावर को पलभर में राख कर सकता है.
जंग के दौरान भारत, S-400 सिस्टम से दुश्मन के लड़ाकू विमानों को सटीक निशाना बना सकता है, चाहे चीन का जे-20 फाइटर प्लेन हो या फिर पाकिस्तान का (अमेरिकी) एफ-16 लड़ाकू विमान या फिर को टोही विमान. एस 400 माइनस (-) 50 डिग्री तक तापमान में काम करने में सक्षम है. सबसे खास बात ये है कि रूसी एयर डिफेंस सिस्टम को डिटेक्ट नहीं किया जा सकता.

