भारत और चीन के पटरी पर लौटते रिश्तों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई धार दे दी है. नई दिल्ली में 07 वर्षों बाद आए शी जिनपिंग के साथ पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठक हुई है.
ये बैठक मौजूदा समय में बेहद अहम है, क्योंकि हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर चीन के साथ तनातनी की खबरें आईं थीं, लेकिन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भारत-चीन को एकजुट होने को दुनिया के लिए फायदेमंद बताया है.
पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच शनिवार को द्विपक्षीय बैठक हुई. दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों में लगातार हो रही प्रगति का स्वागत किया और रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया.
आपको बता दें कि जून 2020 में गलवान में हुई झड़प के बाद भारत-चीन के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी, लेकिन संवाद और कूटनीति के जरिए लगातार इस तनाव को कम किया जा रहा है. गलवान घाटी की झड़प के बाद ये पहला मौका है जब चीन के राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आए हैं. इस वक्त जब दुनिया में अलग अलग मोर्चे पर युद्ध छिड़ा हुआ है और अमेरिका लगातार देशों को धमकी देकर दादागीरी दिखा रहा है, ऐसे में भारत और चीन का करीब आना अमेरिका को क़ड़ा संदेश देने जैसा है.
विवाद में न बदलें मतभेद, सम्मान और हित जुड़े रहें: पीएम मोदी
पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच तकरीबन 50 मिनट तक बातचीत हुई. इस बातचीत में दोनों ही देशों ने इस बात पर जोर दिया कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और संबंध लंबे चलने चाहिए.
पीएम मोदी ने भारत-चीन रिश्तों के लिए तीन पारस्परिक सिद्धांतों को अहमियत दी, कहा, “दोनों देशों के संबंध तीन ‘पारस्परिक सिद्धांतों’- सम्मान, संवेदनशीलता और हित से जुड़े होने चाहिए.”
पीएम मोदी ने सीमा से जुड़े समझौतों के पालन को जरूरी बताया, कहा, “भारत-चीन सीमा यानि एलएसी पर शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरी बुनियाद है.”
पीएम मोदी ने शी जिनपिंग का आभार व्यक्त किया, कहा, “भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता हूं. अब हमारे पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है. एक बार फिर, आपका भारत में हार्दिक स्वागत है.”
भारत-चीन को मिलकर काम करना चाहिए: शी जिनपिंग
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को ‘ग्रेटर ब्रिक्स सहयोग’ के तहत उच्च गुणवत्ता वाले विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए. भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं.
चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखता है.
बैठक में दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बिजनेस लिंक बढ़ाने पर भी जोर दिया गया. व्यापार के मुद्दे पर पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन और बाजार को मजबूत करना अहम बताया.
अगले ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा चीन
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने बताया कि “राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने घोषणा की है कि अगले साल चीन ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा और 19वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी करेगा. माओ निंग के मुताबिक, चीन इस मौके का इस्तेमाल ब्रिक्स देशों के बीच आम सहमति बनाने और भविष्य की योजनाओं पर मिलकर काम करने के लिए करेगा.”

