नई दिल्ली में ग्लोबल लीडर्स इकट्ठा हो चुके हैं, जिसको देखकर अमेरिका के पेट में दर्द होने लगा है. ब्रिक्स देशों को टैरिफ की धमकी बेअसर है और ब्रिक्स के बिजनेस फोरम में एक से एक बेहतरीन आइडिया और विचारों के साथ मंथन हुआ है.
ब्रिक्स के बिजनेस फोरम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया में उथल-पुथल का जिक्र करते हुए ब्रिक्स देशों को एकजुट रहने का आह्वान किया है. जयशंकर ने कहा है कि दुनिया में अस्थिरता और जटिलता अब आम बात है, लेकिन इससे निपटने की जरूरत है.
वहीं केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दुनिया को भारत की ताकत गिनाई और कहा दुनिया के लिए ब्रिक्स देशों को मार्केट खोलने की जरूरत है.
दुनिया की अनिश्चितता में जोखिम है तो मौके भी हैं: जयशंकर
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले ब्रिक्स बिजनेस फोरम को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संबोधित किया है. जयशंकर ने कहा, दुनिया में उथल-पुथल के दौर में राजनीतिक और आर्थिक स्तर में बड़े बदलाव हो रहे हैं. ऐसे में भारत की अगुवाई में इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम को मजबूत करने की कोशिश की गई है.
विदेश मंत्री ने कहा, “हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव हो रहे हैं. हमारे आस-पास की दुनिया में अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता आम बात हो गई है. हम जियोपॉलिटिकल टकरावों, महामारियों और जलवायु से जुड़ी समस्याओं के आर्थिक असर देख रहे हैं.”
“टेक्नोलॉजी हमेशा से इकोनॉमिक्स और जियोपॉलिटिक्स से जुड़ी रही है. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग- ये सभी हम लोगों को बड़े अवसर देते हैं, लेकिन इनसे कुछ सवाल भी उठते हैं, जैसे एक्सेस, स्टैंडर्ड, सिक्योरिटी और भरोसे से जुड़े सवाल.”
जयशंकर ने जोखिम और मौके पर खुलकर बाद की कहा, “तेजी से हो रहे डिजिटलाइजेशन और तकनीकी तरक्की से विकास, उत्पादकता और तरक्की के नए रास्ते खुल रहे हैं. इसका नतीजा एक ऐसा आर्थिक माहौल है जहां जोखिम और मौके दोनों का ही विस्तार हो रहा है, और जहां पहले से अंदाजा लगाने, हालात के हिसाब से ढलने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता अधिक अहम होती जा रही है.”
ब्रिक्स देश वैश्विक जीडीपी के 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं: पीयूष गोयल
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स का उद्देश्य सदस्य देशों के लोगों के लिए रोजगार, संपत्ति और समृद्धि के अवसर पैदा करना है. सदस्य देश दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के 40 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और भारत अंतर-ब्रिक्स व्यापार का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है.”
पीयूष गोयल ने कहा- “भारत का मानना है कि साझेदार देशों के बीच व्यापार गहरा और मजबूत होना चाहिए. सप्लाई चेन विविध और लचीली होनी चाहिए. यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी समय व्यापार, विकास और सदस्य देशों के लोगों की भलाई में बाधा न बने.”
पीयूष गोयल ने कहा कि BRICS देशों को एक-दूसरे के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए. इसमें कच्चा माल और महत्वपूर्ण खनिज भी शामिल हैं. सप्लाई चेन तभी वास्तव में मजबूत होगी, जब वह दोनों दिशाओं में काम करेगी. उन्होंने कहा कि गैर-टैरिफ उपाय कई बार निर्यात की लागत को इतना बढ़ा देते हैं कि उनका असर टैरिफ से भी ज्यादा हो जाता है. इसलिए BRICS देशों को बाजार तक पहुंच को आसान और सुगम बनाना होगा.
पीयूष गोयल ने कहा कि “भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है. आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य 140 करोड़ भारतीयों ने अपने लिए तय किया है. भारत ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के साथ सहयोग को और गहरा करने की अपार संभावनाएं देखता है.”

