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मोदी ने थामा पेजेश्कियान का हाथ, BRICS की सबसे बड़ी फोटो

ब्रिक्स सम्मेलन से पहले सामने आई है सबसे पावरफुल फोटो. ये तस्वीर पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है खासकर इस तस्वीर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर के लंच और टैरिफ धमकी का जवाब माना जा रहा है.

तस्वीर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की. भारत मंडपम में पीएम मोदी के दाहिने ओर पेजेश्कियान थे और पीएम मोदी, पेजेश्कियान का हाथ थामे नजर आए. ब्रिक्स के मंच से आई ये तस्वीर सबसे बड़ी है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार उन देशों को धमका रहे हैं, जो ईरान का साथ दे रहे हैं और व्यापार कर रहे हैं.

मोदी का पेजेश्कियान का हाथ थामना ट्रंप को चुभेगा, क्योंकि अमेरिका का सबसे कट्टर दुश्मन देश के राष्ट्रपति भारत में इस आत्मीयता से मिल रहे हैं और उनका स्वागत किया जा रहा है. और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा ने भी ईरान के साथ मंच साझा करके अमेरिका को बता दिया है कि दादागीरी नहीं चल सकती.

दुनिया में छाई मोदी-पेजेश्कियान की तस्वीर

07 साल बाद ईरान के किसी राष्ट्रपति का नई दिल्ली दौरा बेहद खास है. वो भी ऐसे वक्त में जब ईरान और अमेरिका के बीच भयंकर युद्ध चल रहा है और फरवरी से शुरु हुई जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं. लगातार अमेरिका के दबाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान बेहद सुरक्षा के बीच नई दिल्ली पहुंचे. बतौर राष्ट्रपति पेजेश्कियान पहली बार राजधानी दिल्ली आए हैं.

पीएम मोदी और मसूद पेजेश्कियान की द्विपक्षीय वार्ता से पहले भारत मंडपम में ब्रिक्स के ऑफिशियल बैकड्रॉप के सामने खींची गई एक तस्वीर सोशल मीडिया से लेकर इंटरनेशनल मीडिया में छा गई. वो तस्वीर पीएम मोदी और मसूद पेजेश्कियान की थी. तस्वीर में पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामा हुआ था और ईरानी राष्ट्पति मुसकुरा रहे थे.

इस तस्वीर को कूटनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इस तस्वीर के जरिए भारत की ओर से संकेत दिया गया कि वो अपने मित्र देशों को संकट के वक्त साथ नहीं छोड़ता है, तो ईरान की तरफ से ये संकेत दिया गया कि वो अमेरिकी दबाव में नहीं हैं, पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन जैसे बड़े नेता उसके साथ हैं.

मोदी-मसूद पेजेश्कियान के बीच द्विपक्षीय बैठक, भारतीय नाविकों का उठा मुद्दा

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय मीटिंग हुई है. पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव के बीच ये बैठक बेहद महत्वपूर्ण रही. इस बैठक से पहले पीएम मोदी ने ब्रिक्स के बिजनेस फोरम में भारत के नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था.

पीएम मोदी और पेजेश्कियान के बीच सुरक्षित समुद्री आवाजाही और नाविकों की सुरक्षा पर बात हुई है. दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालात की समीक्षा की और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया.

विदेश मंत्रालय ने इस वार्ता को लेकर जानकारी साझा की, जिसमें कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया. प्रधानमंत्री ने भारत के इस लगातार रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए.

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने “क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने, नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी की रक्षा करने, और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा और भलाई के लिए लगातार प्रयासों की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया.”

विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी और पेजेश्कियान ने द्विपक्षीय संबंधों के अलग अलग पहलुओं पर चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने मुश्किल हालात के बावजूद से जुड़ी बैठकों में ईरान की नियमित और उच्च-स्तरीय भागीदारी के लिए ईरान का धन्यवाद किया.   

हम ब्रिक्स को बड़ी शक्ति बनाना चाहते हैं: ईरानी राष्ट्रपति

दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम की बैठक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों का मुद्दा उठाया. कहा कि “ जियोपॉलिटिकल अस्थिरता के दौर में सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इसके कारण दुनिया बेहद जटिल दौर से गुजर रही है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि, इसने आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है.

पेजेश्कियान ने अपने भाषण में कहा कि “हम ब्रिक्स को एक बड़ी शक्ति बनाना चाहते हैं. ईरान की जो भौगोलिक स्थिति है, उसके ऊर्जा संसाधनों के कारण यह कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण लिंक बन सकता है.”

पेजेश्कियान ने अपने भाषण में कहा, “हम अगर सहयोग को बेहतर करना चाहते हैं और एक निवेश को तैयार करना चाहते हैं तो हमें एक नया आकार देना होगा. कुछ ऐसे क्रेडिट लाइंस लाई जा सकती हैं जिस देश की मदद उनकी अपनी मुद्राओं में किया जा सकता है, ताकि ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को बढ़ाया जा सके. इसमें एक बड़ा कदम अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को लेकर उठाया जा सकता है. इस काम के लिए ईरान पूरी तरह से अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है.”

टैरिफ वॉर और धमकियों के बीच वेस्ट को ब्रिक्स का कड़ा संदेश

यूक्रेन के साथ युद्ध के चलते रूस तमाम तरह के आर्थिक प्रतिबंधों से जूझ रहा है, वहीं न्यूक्लियर हथियारों के चलते ईरान पर भी आर्थिक प्रतिबंधों की मार पड़ी है. अमेरिका ने ईरान की संपत्तियों को सीज कर रखा है.

ऐसे में डॉलर को रिप्लेस करने के लिए ब्रिक्स की अपनी मुद्रा की चर्चा चल रही है. ब्रिक्स देश अब आपस में अपनी-अपनी मुद्राओं में व्यापार करने पर जोर दे रहे हैं. इसके अलावा, डिजिटल करेंसी और फास्ट पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर काम चल रहा है.

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