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हूतियों का दबदबा बढ़ा, सऊदी को ट्रंप ने अकेला छोड़ा

By Nalini Tewari

यमन में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के करीब एयरबेस पर बड़ा हमला किया है. हूतियों ने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के हामिस मुशैत वायुसेना बेस पर मिसाइलों और ड्रोन से अटैक करके सऊदी अरब को चुनौती दी है. इस अटैक में 10 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है.

हूतियों के ताजा हमले के बाद सऊदी ने खमीस मुशैत, आभा और ताइफ सहित कई दक्षिणी शहरों में इमरजेंसी अलर्ट जारी किया. हूती लड़ाकों को इस हमले को सऊदी अरब की यमन पर की गई एयरस्ट्राइक का बदला बताया जा रहा है.

हूतियों के इस हमले ने मक्का पैक्ट की हवा निकाल दी है. बार-बार सऊदी अरब की मदद मांगने के बावजूद पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया है. जबकि मक्का पैक्ट के अलावा पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले साल एक बड़ा समझौता किया था, जिसमें एक देश पर हमला दोनों देश पर हमला माना जाएगा, लेकिन सऊदी अरब से किए गए पाकिस्तान के सारे वादे हवाबाजी ही हैं.

आपको बताएंगे कि पाकिस्तान ने हूतियों के हमले पर सऊदी अरब से क्या कहा, लेकिन उससे पहले ये जानना जरूरी है कि सऊदी अरब और हूतियों के तनाव में ताजा घटना क्या है.

जेद्दा तक इमरजेंसी, सऊदी अरब की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हूती

यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में स्थित एक प्रमुख सैन्य एयरबेस पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला करके बड़ा नुकसान पहुंचाया है. हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने कहा है कि इस हमले में लड़ाकू विमानों के हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के गोदामों को निशाना बनाया गया है.

हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. हूतियों ने ग्रेटर हनिश और लेसर हनिश द्वीपों पर कब्जा कर लिया है. ये द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं.

आपको बता दे कि बाब अल-मंदेब लाल सागर को खुले समुद्र से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है. होर्मुज की खाड़ी पर ईरान के कब्जे के बाद हूतियों ने बाब अल मंदेब को रोकने की धमकी दी थी.

हूती के हो रहे जवाबी हमलों के बाद सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने ताइफ, जेद्दा, अबहा, अल-उला, जाज़ान और यानबू क्षेत्र के लिए चेतावनी जारी की है. प्रशासन ने लोगों को आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और नजदीकी सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है, साथ ही अफवाहों से दूर रहने को कहा है.

अमेरिका ने सऊदी अरब से खींचे हाथ, ट्रंप ने मदद देने से मना किया

यमन में हूतियों से लड़ रहे सऊदी अरब को अमेरिका से भी झटका लगा है. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 10 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दो बार फोन किया था और वाशिंगटन से हूती बलों पर हमला करने की अपील की थी, लेकिन ट्रंप ने इनकार कर दिया. ट्रंप का कहना है कि वाशिंगटन ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है,ट

आयरलैंड के दौरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा: “हूती बलों ने हमें फोन किया था और वे हमसे लड़ना नहीं चाहते. वे नहीं चाहते कि हम उनका पीछा करें.” 

दरअसल पिछले साल अमेरिका के साथ हुए समझौते में, हूती विद्रोहियों ने यह प्रतिबद्धता जताई थी कि वे अमेरिकी जहाजों, सेनाओं या बुनियादी ढांचे पर हमला नहीं करेंगे, बशर्ते वाशिंगटन हूती विद्रोहियों पर हमला न करे. यही कारण है कि हूती सऊदी अरब के ऊर्जा संयंत्रों और बंदरगाहों पर हमला कर रहे हैं,  लेकिन हूती अमेरिकी ठिकानों को छू तक नहीं रहे. ऐसे में ईरान के साथ जंग लड़ रहा अमेरिकी बिलकुल नहीं चाह रहा है वो सऊदी अरब का साथ देकर तनाव का एक और मोर्चा खोल ले.

मक्का पैक्ट, फिर क्यों साथ नहीं आ रहा पाकिस्तान?

हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने मक्का पैक्ट किया है. लेकिन अब हूतियों के हमले झेल रहे सऊदी अरब की मदद के लिए कई दिनों बाद भी पाकिस्तान सामने नहीं आया है. सऊदी अरब अकेले ही हूतियों से लड़ रहा है. ऐसे में ये समझौता महज कागज़ी समझौता बनकर रह गया है. मक्का पैक्ट साइन करने के बावजूद पाकिस्तान मदद के लिए आगे क्यों नहीं आया.

ईरान समर्थित हूती 8 सितंबर से ही सऊदी अरब के दक्षिणी शहरों पर लगातार हमले कर रहे हैं. लेकिन तमाम देशों ने इन हमलों की निंदा की. सऊदी अरब की मदद करना तो दूर पाकिस्तान तो इन हमलों की निंदा करने में भी देर से जागा.

पीएम शहबाज शरीफ ने 13 सितंबर को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को फोन किया. फोन पर शहबाज शरीफ ने कहा कि “वे, फ़ील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर और उप-प्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार इलाके में तनाव कम करने और शांति को बढ़ावा देने की कोशिश रखेंगे.”

दरअसल मक्का पैक्ट साइन करके पाकिस्तान फंस गया है. अगर वो हूतियों के खिलाफ एक्शन लेगा तो अपने दोस्त ईरान को नाराज कर बैठेगा, क्योंकि हूतियों को हथियार से लेकर फाइनेंशियल सपोर्स ईरान ही देता है. हूती, ईरान के ही प्रॉक्सी हैं. और ईरान कह भी चुका है कि अगर होर्मुज में जंग आगे बढ़ी तो हूती बाब अल मंडेप भी बंद कर देंगे.

वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहराया संकट

हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए ग्रेटर हनिश और लेसर हनिश द्वीपों पर कब्जा कर लिया है. ये द्वीप बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं. बाब अल-मंडेब लाल सागर को खुले समुद्र से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है. अगर ये बाधित हुआ तो पूरी दुनिया में हाहाकार मच जाएगा.

वहीं हूतियों के ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हुई सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को पूरी क्षमता से बहाल होने में तीन से पांच सप्ताह लग सकते हैं. यह पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से से कच्चे तेल को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है, वहां से तेल को टैंकरों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जाता है. अभी आंशिक तौर पर ये पाइपलाइन काम कर रही है, अगर आगे और हमले हुए तो संचालन पूरी तरह रुकता है तो वैश्विक बाजार में इतनी बड़ी मात्रा में तेल की उपलब्धता प्रभावित होगी.   

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