By Nalini Tewari
क्या रूस और यूक्रेन के युद्ध का विस्तार होने जा रहा है, सवाल इसलिए क्योंकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आश्वासन के बावजूद यूरोपीय देश रूस के खिलाफ सैन्य लामबंद होते जा रहे हैं. रूस से सटे देश एस्टोनिया ने तो अपनी सीमा पर पूरी फौज उतार दी है.
एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिचाल ने साफ तौर पर घोषणा की है कि अगर रूस कोई आम लामबंदी घोषित करता है, तो एस्टोनिया तुरंत अपनी सीमाएं बंद करने के लिए तैयार है. लातविया में रूस पर दबाव बनाने के लिए नाटो देशों की मिलिट्री ड्रिल शुरु की गई, जो अक्टूबर पहले सप्ताह तक चलेगी. सड़कों पर धड़ाधड़ टैंकर्स निकलते देखे गए. इस ड्रिल को भी रूस के खिलाफ तैयारी कहा गया है.
दरअसल यूरोपीय देशों में ये हड़कंप उस वक्त बढ़ गया जब पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने ये कहकर सनसनी फैला दी कि कुछ महीनों में रूस ड्रोन या फिर मिसाइलों के जरिए नाटो देशों को टारगेट कर सकता है. इस बयान के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी सोशल मीडिया पर रूस के खिलाफ नाटो देशों को एकजुट रहने के लिए कहा.
पुतिन इस सब बयानबाजी को वेस्ट का प्रोपेगेंडा बताया है. यूरोप के नेताओं को जवाब देते हुए पुतिन ने एक बार फिर से कहा है कि यूरोप पर हमला करने का कोई कारण ही नहीं है.
एस्टोनिया की सेना तैयार, लातविया कर रहा ड्रिल
जहां रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति और सीजफायर की बात कही जा रही थी, अचानक से युद्ध और तेज हो चुका है. रूस यूक्रेन दोनों ही देशों पर हमलों में अचानक से बढ़ोतरी आ गई है. ताजा अटैक कीव का है, जहां मॉस्को की रिफाइनरी पर यूक्रेन ने ड्रोन हमला किया, जिसके बाद रूस ने भी पलटवार की बात कही है.
इन दोनों देशों के युद्ध के बीच यूरोपीय देश डरे हुए हैं और लगातार आरोप लगा रहे हैं कि रूस आगे बढ़ा तो अगला शिकार उनका देश बनेगा.
एस्टोनिया ने तो पूरी सेना रूस बॉर्डर पर तैनात कर दी है. एस्टोनिया ने रूस के साथ लगती अपनी सीमा चौकियों, जैसे नारवा, लुहामा और कोइदुला पर के काम करने के घंटे कम कर दिए हैं और पूरी तरह से कड़े कस्टम चेक लागू कर दिए हैं.
एस्टोनियाई विदेश मंत्री मार्गस त्साहकना ने चेतावनी दी है कि “रूस में किसी भी प्रकार की आम लामबंदी से आंतरिक तनाव और यूरोपीय संघ की ओर प्रवासियों का दबाव बढ़ सकता है, जिसे नाटो की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है.”
एस्टोनियाई विदेश मंत्रालय के सेक्रेटरी जनरल जोनाथन वसेवियोव ने कहा, लोगों के बीच रूसी हमलों को लेकर घबराहट है, लेकिन हम लोगों को आश्वासन देना चाहते हैं, कि हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं. अपना काम करते रहें और यूक्रेन का समर्थन करें.”
पिछले साल सितंबर 2025 में रूस और एस्टोनिया दोनों ने एकदूसरे पर हवाई घुसपैठ का आरोप लगाया था. तो बाल्टिक सागर क्षेत्र में समुद्री बुनियादी ढांचे, संचार और ऊर्जा केबलों की सुरक्षा को लेकर भी दोनों देशों के बीच लगातार गतिरोध जारी है.
नाटो सैनिकों ने रूस सीमा के करीब शुरु किया युद्धाभ्यास
तनाव के बीच यूरोपीय देश लातविया की सेना और नाटो सैनिकों का प्रमुख सैन्य अभ्यास ‘नेमज 2026’ किया जा रहा है. इस वक्त रूस के बेहद करीब 12हजार सैनिक और मिलिट्री ड्रिल कर रहे हैं. यह युद्धाभ्यास लातविया के विभिन्न हिस्सों और विशेष रूप से रूस तथा बेलारूस की सीमा के पास के पूर्वी क्षेत्रों में हो रहा है. इसका उद्देश्य समकालीन सुरक्षा खतरों से निपटना, ड्रोन ऑपरेशनों को एकीकृत करना और सामूहिक रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है.
हालांकि ये ड्रिल है, लेकिन इसे रूसी खतरे से भी जोड़कर देखा जा रहा है कि अगर रूस ने यूरोप के किसी देश पर अटैक किया तो रूस-बेलारूस की सीम पर 12000 सैनिक मोर्चा संभाल लेंगे.
पोलैंड ने क्या लगाए रूस पर आरोप
दरअसल यूरोपीय देशों में खलबली पोलैंड के प्रधानमंत्री के बयान के बाद शुरु हुई. पोलैंड के पीएम ने कहा है कि “आने वाले कुछ महीनों में रूस ड्रोन या मिसाइलों के जरिए नाटो देशों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है. और सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि ऐसे हमले को दुर्घटना या गलती के तौर पर पेश किया जा सकता है.
इस बयान के बाद नाटो देश एकजुट नजर आ रहे हैं. नाटो का कहना है कि यूरोप को लापरवाह नहीं होना चाहिए. रूस के किसी भी तरह के हमलों या संघर्ष का जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए.
हालांकि, नाटो ने इस बात को नहीं कहा है कि रूस नाटो के किसी भी देश को तुरंत निशाना बना सकता है.
हमारे टारगेट पर यूरोप नहीं, पुतिन ने सारे अंदेशों को बताया गलत
यूरोप में फैली दहशत के बीच रूसी राष्ट्रपति को सामने आकर बयान देना पड़ा है. पुतिन ने कहा कि उनके टारगेट पर कोई यूरोप के देश नहीं हैं, लेकिन अगर रूस को उकसाया गया तो देश की रक्षा कैसे करनी है, रूसी सैनिक जानते हैं.
पुतिन ने ये भी कहा, कि रूस अपने पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते चाहता है, संबंध सुधारना चाहता है.
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, यूरोप के कुछ नेता नहीं चाहते हैं कि युद्ध शांत हों, क्योंकि वो अपनी जनता के लिए जवाबदेह नहीं हैं, यूक्रेन को सिर्फ चारे की तरह से इस्तेमाल कर रहे हैं.
ट्रंप नहीं करा पा रहे सुलह, क्या है मौजूदा स्थिति
यूक्रेन में शांति लाने के अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रयासों में सफलता के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते थे कि वो 24 घंटे में रूस-यूक्रेन का युद्ध खत्म कर सकते हैं, वो अपने दावों में पूरी तरह से फेल हो चुके हैं. कुछ दिनों पहले सीआईए के चीफ अचानक से मॉस्को पहुंचे थे, ये सीक्रेट दौरा क्यों किया गया, ये सीक्रेट ही रहा. लेकिन इस दौरे के बाद से ही यूक्रेन लगातार रूस पर हमले कर रहा है, और रूस भी यूक्रेन पर.
पिछले कुछ दिनों में यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरियों और अन्य सुविधाओं को निशाना बनाकर रूस के तेल बुनियादी ढांचे का एक बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया है तो रूसी सेना कीव और दूसरे शहरों में यूक्रेन के प्रमुख ठिकानों को टारगेट कर रही है. हाल ही में रूस ने यूक्रेनी की खुफिया एजेंसी के हेडक्वार्टर पर हमला किया था.


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